झारखंड राज्यसभा चुनाव: ‘विश्वास था, वहीं धोखा हुआ!’ के. राजू के बाद अब पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी RJD-वामदलों पर मढ़ा क्रॉस-वोटिंग का आरोप

झारखंड की सियासी गलियारों में भूचाल, राज्यसभा चुनाव में हार के बाद इंडिया गठबंधन के भीतर 'महाभारत' शुरू। राजेश ठाकुर ने खोला वोटों का गणित: 'हमारे पास 26 वोट थे, मिले सिर्फ 21', आरजेडी और वामदलों ने किया तीखा पलटवार

संध्या न्यूज ब्यूरो
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हजारीबाग: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजों ने सूबे की सियासत में एक नया बवंडर खड़ा कर दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद इंडिया गठबंधन के भीतर छिड़ी ‘लेटर और जुबानी जंग’ अब और आक्रामक हो गई है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने अब अपनी ही पार्टी के प्रदेश प्रभारी के. राजू के उन आरोपों पर मुहर लगा दी है, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और वामदलों पर क्रॉस-वोटिंग का संगीन आरोप लगाया गया था।

राजेश ठाकुर ने गठबंधन सहयोगियों पर सीधा निशाना साधते हुए बेहद तल्ख लहजे में कहा, “जहां विश्वास होता है, वहीं धोखा होता है। अब तक जो जानकारी और आंकड़े सामने आए हैं, उससे साफ है कि हमें आरजेडी और वामदल के वोट नहीं मिले हैं। हमारे साथ बड़ा धोखा हुआ है।”

आंकड़ों की जुबानी: कहां गायब हो गए कांग्रेस के 5 वोट?

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने चुनाव के आंकड़ों का गणित समझाते हुए गठबंधन में मचे भीतरघात को खुलकर सामने रखा। उनके मुताबिक:

  • कुल अनुमानित वोट: कांग्रेस प्रत्याशी के पास जीत के लिए कुल 26 वोट होने का भरोसा था।

  • मिले सिर्फ 21 वोट: मतगणना के बाद कांग्रेस उम्मीदवार को महज 21 वोट मिले, जिनमें से भी 1 वोट अमान्य (रिजेक्ट) घोषित कर दिया गया।

  • गठबंधन का वोट गणित: राजेश ठाकुर ने बताया कि हमारे अपने 16 वोट थे। इसके अलावा गठबंधन के तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के 4, आरजेडी (RJD) के 4 और वामदल (Left) के 2 वोट मिलने तय थे।

ठाकुर का सीधा आरोप है कि जेएमएम का साथ तो मिला, लेकिन आरजेडी और वामदलों के विधायकों ने ऐन वक्त पर पाला बदल लिया, जिसके कारण कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का मुंह देखना पड़ा। गौरतलब है कि इस चुनाव में बैद्यनाथ राम और परिमल नाथवानी को विजेता घोषित किया गया है।

प्रभारी के. राजू ने कहा था- ‘पैसों के लिए ईमान बेचा’, अब बढ़ा विवाद

याद दिला दें कि गुरुवार को नतीजे आने के तुरंत बाद झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू ने मर्यादा की सीमाएं लांघते हुए आरजेडी और वामदल के विधायकों पर पैसों की खातिर अपना ईमान बेचने तक का आरोप लगा दिया था। उस वक्त सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने तुरंत प्रभारी के सुर में सुर मिलाया था, जबकि राजेश ठाकुर ने तब थोड़ा संयम बरतते हुए कहा था कि ‘नतीजे पर पहुंचने से पहले हमें तथ्यों की पड़ताल करनी चाहिए।’

लेकिन अब, जांच और आंतरिक समीक्षा के बाद खुद राजेश ठाकुर ने भी मान लिया है कि सहयोगियों ने कांग्रेस की पीठ में छुरा घोंपा है।

RJD और वामदलों का करारा पलटवार: ‘वोट दिखाकर दिया, अपने विधायक संभाल नहीं पा रहे’

कांग्रेस के इन तीखे और सीधे हमलों पर राष्ट्रीय जनता दल और वामदलों ने भी फौरन और बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया है। गठबंधन में दरार अब सार्वजनिक हो चुकी है:

  • सुरेश पासवान (RJD विधायक, देवघर): “हमने चुनाव आयोग की पूरी गाइडलाइन, तय नियम-कानून और खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की निगरानी में हुए मॉक पोल प्रशिक्षण के आधार पर अपने चारों वोट प्रथम वरीयता (First Preference) में कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को दिए हैं। आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं।”

  • भोला प्रसाद यादव (RJD चुनाव एजेंट): “क्रॉस-वोटिंग का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। मतदान करने से पहले सभी विधायकों ने नियमानुसार मुझे अपना बैलट पेपर दिखाया था। आरजेडी के चारों वोट इंडिया गठबंधन के खाते में ही गए हैं।”

  • वामदल (Left) का स्टैंड: वामदलों ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कांग्रेस से अपने खुद के विधायक तो संभल नहीं रहे हैं और अपनी नाकामी छुपाने के लिए वे अब वामदलों और सहयोगियों पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा: क्या खतरे में है गठबंधन का भविष्य?

इस राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड इंडिया गठबंधन में ‘ऑल इज वेल’ नहीं है। एक तरफ जहां सरकार चलाने के लिए दल साथ हैं, वहीं दूसरी तरफ अहम मौकों पर अविश्वास की खाई चौड़ी होती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस और आरजेडी-वामदलों के बीच का यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले समय में राज्य के आगामी राजनीतिक समीकरणों पर इसका बेहद गंभीर असर पड़ सकता है।

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