महाराष्ट्र में फिर ‘बगावत’ की आहट! शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों पर शिंदे गुट की नजर? ओम बिरला की चौखट पर पहुंचे संजय राउत, लगाया ’50 करोड़’ का आरोप

संध्या न्यूज ब्यूरो
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नई दिल्ली/मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में एक बार फिर लोकसभा स्तर पर बड़ी टूट के संकेत मिल रहे हैं। इन चर्चाओं के बीच शिवसेना (UBT) के शीर्ष नेताओं और सांसदों ने आनन-फानन में दिल्ली का रुख किया है। बुधवार को उद्धव गुट के वरिष्ठ सांसद संजय राउत, अरविंद सावंत और अनिल देसाई ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर एक महत्वपूर्ण रिप्रेजेंटेशन (ज्ञापन) सौंपा है।

इस मुलाकात के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि उद्धव ठाकरे गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 से 7 सांसद पाला बदलकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

’15 करोड़ आज रात ही डिलिवर होने वाले थे…’ – संजय राउत का विस्फोटक दावा

लोकसभा स्पीकर से मिलने से ठीक पहले शिवसेना (UBT) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए। राउत ने दावा किया कि उनके सांसदों को तोड़ने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है।

संजय राउत ने कहा:

“मुझे पुख्ता जानकारी मिली है कि हमारे सांसदों को पाला बदलने के लिए 50-50 करोड़ रुपये का ऑफर दिया जा रहा है। खेल इस कदर सेट है कि आज रात तक ही प्रत्येक सांसद को 15 करोड़ रुपये की पहली किस्त डिलीवर कर दी जाएगी। खबरें तो यहां तक हैं कि वे लोग पैसे की डिलीवरी लिए बिना चार्टर्ड एयरक्राफ्ट में चढ़ने तक को तैयार नहीं थे।”

राउत ने आगे बताया कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला एक बेहद सम्मानित व्यक्ति हैं और उन्होंने भरोसा दिलाया है कि यदि कोई भी गुट उनके पास आता है, तो वह कानून के सभी पहलुओं को बारीकी से देखने के बाद ही कोई फैसला लेंगे।

कानून का पेंच: क्या 6 सांसद मिलकर अलग गुट बना सकते हैं?

मुलाकात के बाद शिवसेना (UBT) के सांसद अनिल देसाई ने मीडिया को एंटी-डिफेक्शन लॉ (दलबदल विरोधी कानून) का तकनीकी पहलू समझाया। उन्होंने साफ कहा कि अब पहले की तरह सिर्फ दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होना काफी नहीं है।

अनिल देसाई की दलील:

  • मूल पार्टी का विलय जरूरी: देसाई के अनुसार, कानून के तहत कोई भी व्यक्ति या ग्रुप किसी दूसरी पार्टी में आसानी से मर्ज (विलय) नहीं हो सकता, भले ही उसके पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन ही क्यों न हो। नियमों के मुताबिक, केवल ओरिजिनल (मूल) पार्टी ही खुद का विलय कर सकती है।

  • 6 सांसदों से नहीं पड़ेगा फर्क: उन्होंने कहा कि अगर कोई ग्रुप दो-तिहाई बहुमत का दावा करते हुए किसी दूसरी पार्टी के साथ विलय की कोशिश करता है, तो स्पीकर उसे मान्यता नहीं दे सकते। अगर 6 सांसद अलग होते भी हैं, तो भी वे अयोग्य घोषित होने से नहीं बच पाएंगे क्योंकि मूल सांगठनिक पार्टी उद्धव ठाकरे के पास है।

9 में से 6 पर संशय, कौन है उद्धव के साथ वफादार?

गौरतलब है कि लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल 9 सांसद हैं। एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत अगर 2/3 यानी कम से कम 6 सांसद एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तभी वे अपनी सदस्यता बचा सकते हैं।

फिलहाल, अरविंद सावंत, अनिल देसाई और नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे ने खुलकर मीडिया के सामने कहा है कि वे पार्टी सुप्रीमो उद्धव ठाकरे के प्रति पूरी तरह वफादार हैं और कहीं नहीं जा रहे हैं। इन तीन के अलावा बाकी बचे 6 सांसदों को ही संभावित दलबदलू के तौर पर देखा जा रहा है, जिन्हें लेकर शिंदे गुट में जाने की अटकलें तेज हैं। अगर ये अटकलें सच साबित होती हैं, तो संसद के भीतर उद्धव ठाकरे को एक और बड़ा झटका लग सकता है।

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