मनीष कुमार मुन्ना
संध्या न्यूज ब्यूरो / हजारीबाग (भाग 2)
अगर आपको लगता है कि हजारीबाग के ‘बोडम बाजार’ का राज सिर्फ उसकी सीधी गलियों और दुकानों तक खत्म हो जाता है, तो अपनी सांसें थाम लीजिए। क्योंकि इतिहास की परतों और पुराने सैन्य रिकॉर्ड्स से जो सच अब बाहर आया है, वो हजारीबाग के भूगोल को एक नए और बेहद दिलचस्प मोड़ पर लाकर खड़ा कर देता है।
जिसे हम आज ‘बोडम बाजार’ कहते हैं, वह दरअसल एक ऐसी विशाल ‘मिलिट्री सिटी’ (सैन्य छावनी) का हिस्सा था, जिसके ऊपर से आज पूरा हजारीबाग रोज गुजरता है, लेकिन उसके नीचे दबे अतीत से बिल्कुल अनजान है।
द मास्टरप्लान: सेंट कोलंबा से लेकर मिशन स्कूल तक फैला ‘द ग्रेट कंटोनमेंट’
इतिहास के पन्नों को पलटें तो एक चौंकाने वाला नक्शा सामने आता है। आज हम जिन जगहों को शिक्षा का मंदिर कहते हैं, वो सन 1790 और 1800 के शुरुआती दशकों में बारूद और मिलिट्री बूटों की धमक से कांपा करती थीं। कैप्टन बोडम ने पूरी छावनी को इस तरह डिजाइन किया था कि शहर के सारे मुख्य केंद्र एक-दूसरे से जुड़े रहें:
- सेंट कोलंबा कॉलेज (St. Columba’s College) का पुराना परिसर: आज की यह मशहूर ऐतिहासिक लाल इमारत और इसके आसपास का इलाका, 1884 तक जब हजारीबाग एक सक्रिय छावनी था, तब ब्रिटिश मिलिट्री और मिशनरी पत्राचार के मुख्य प्रशासनिक केंद्र के रूप में इस्तेमाल होता था।
- कार्मेल स्कूल से मिशन स्कूल का कॉरिडोर: पुराने नक्शे गवाह हैं कि आज के कार्मेल स्कूल (Carmel School) से लेकर मिशन स्कूल (Mission School) तक का जो पूरा इलाका है, वही कैप्टन बोडम की असली और मुख्य ‘कंटोनमेंट बाउंड्री’ (Cantonment Area) हुआ करती थी। यानी आज जहाँ बच्चे कॉपियां और किताबें लेकर जाते हैं, वहां कभी फौजियों के बैरक हुआ करते थे।
द नाच बाड़ी: होली क्रॉस VTI का वो रंगीन और खुफिया अतीत
इस ऐतिहासिक थ्रिलर का सबसे सस्पेंस और दिलचस्प मोड़ आता है आज के होली क्रॉस VTI (Holy Cross VTI) के परिसर पर। आज जहाँ बेटियां और महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की ट्रेनिंग लेती हैं, वो ब्रिटिश काल का सबसे गुप्त मनोरंजन केंद्र था।
पुराने सरकारी रिकॉर्ड्स और स्थानीय इतिहासकार बताते हैं कि यह ब्रिटिश अफसरों की ‘नाच बाड़ी’ (Natch Bari / Recreation Area & Officers’ Club) हुआ करती थी। शाम ढलते ही यहाँ मोमबत्तियों की रोशनी में महफिले सजती थीं, संगीत गूंजता था और कूटनीति के बीच जंग की बड़ी-बड़ी रणनीतियां तय की जाती थीं।
द परेड ग्राउंड्स: जहाँ गूंजती थी ‘रामगढ़ बटालियन’ की दहाड़
फौज होगी तो कदमताल भी होगी और हथियारों की टेस्टिंग भी। कैप्टन बोडम ने इसके लिए शहर के तीन सबसे बड़े कोनों को चुना, जो आज भी हजारीबाग के सबसे बड़े मैदान हैं:
- PTC ग्राउंड (Police Training Centre)
- मिशन स्कूल मैदान (Mission School Ground)
- वेल्स ग्राउंड (Wels Ground)
ये तीनों मैदान आज भले ही खिलाड़ियों और रैलियों के काम आते हों, लेकिन यह वही ऐतिहासिक ‘परेड ग्राउंड्स’ हैं, जहाँ सुबह की पहली किरण के साथ रामगढ़ बटालियन के हजारों सैनिक युद्ध का अभ्यास करते थे और मिलिट्री मार्च निकाला करते थे।
सस्पेंस अभी और गहरा है…
हजारीबाग के सीने पर बने इस सवा दो सौ साल पुराने ब्रिटिश चक्रव्यूह की परतें तो अभी सिर्फ खुलना शुरू हुई हैं। सेंट कोलंबा की वो ऐतिहासिक इमारतें, कार्मेल और मिशन स्कूल के बीच की वो अदृश्य सैन्य सीमाएं और होली क्रॉस की वो ‘नाच बाड़ी’… यह सब गवाह हैं कि बोडम बाजार का इतिहास जितना गहरा है, उतना ही तिलस्मी भी।
लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती। खबर है कि इस मिलिट्री बेस के कुछ और पन्ने, कुछ और गुप्त कड़ियां बहुत जल्द सामने आने वाली हैं, जो हजारीबाग के इतिहास की पूरी किताब को ही पलट कर रख देंगे!
देखते रहिए ‘द बोडम बाजार फाइल्स’, क्योंकि अगला पन्ना (पार्ट-3) इससे भी ज्यादा धमाकेदार होने वाला है!
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