संध्या न्यूज ब्यूरो / हजारीबाग: Hazaribagh Zila Parishad: जिले में जिला परिषद द्वारा 52 वाटर सप्लाई सिस्टम (जल आपूर्ति प्रणाली) लगाने के लिए आयोजित की गई टेंडर प्रक्रिया अब पूरी तरह से विवादों और सवालों के घेरे में आ गई है। इस मामले को लेकर स्थानीय समाजसेवी अभिषेक कुमार ने हजारीबाग के उपायुक्त (डीसी) को एक आधिकारिक आवेदन सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। सौंपे गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 28 जून 2026 को आयोजित निविदा प्रक्रिया के दौरान कार्यालय से महज 15 टेंडर पेपर ही बेचे गए, जबकि कई इच्छुक और योग्य संवेदकों को टेंडर पेपर उपलब्ध ही नहीं कराया गया।
“स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सरकारी नियमों की उड़ी धज्जियां”
समाजसेवी अभिषेक कुमार द्वारा उपायुक्त को दिए गए आवेदन में कहा गया है कि यदि धरातल पर यह आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे सरकारी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर बेहद गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। किसी भी सरकारी योजना के सफल और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के लिए उसमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Healthy Competition) होना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह प्रभावित करने की आशंका जताई गई है।
इन मुख्य बिंदुओं पर जांच करने की उठाई गई मांग
अभिषेक कुमार ने उपायुक्त से मांग करते हुए अपने आवेदन में कुछ मुख्य बिंदुओं पर गहनता से जांच कराने का आग्रह किया है:
जिला परिषद कार्यालय में इस योजना के लिए कुल कितने टेंडर पेपर (फॉर्म) उपलब्ध कराए गए थे?
आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड के अनुसार कुल कितने टेंडर पेपर बेचे गए?
किन-किन ठेकेदारों, व्यक्तियों एवं फर्मों को ये टेंडर पेपर जारी किए गए हैं?
सबसे महत्वपूर्ण कि जिन इच्छुक और योग्य आवेदकों को टेंडर पेपर नहीं मिला, उसके पीछे क्या तकनीकी या प्रशासनिक कारण थे?
समाजसेवी ने स्पष्ट कहा है कि यदि इस प्राथमिक जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित विभाग के अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत और कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
जनहित और पारदर्शिता का हवाला, प्रशासन के रुख पर टिकी नजरें
अपने आवेदन के अंत में अभिषेक कुमार ने जोर देते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखना जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। चूंकि यह मामला जनता की पेयजल व्यवस्था से जुड़ा है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति को जनता के सामने लाया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में जिला परिषद की टेंडर प्रक्रिया पर किसी प्रकार का संदेह न रहे।
फिलहाल इस गंभीर शिकायत और आवेदन पर हजारीबाग जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अब देखना यह होगा कि उपायुक्त इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और जांच के बाद क्या सच बाहर आता है।


