हजारीबाग के नगर आयुक्त को हाई कोर्ट का अवमानना नोटिस, पूछा- क्यों न शुरू की जाए कार्रवाई!

जाम, अतिक्रमण और बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों पर अदालत ने जताई कड़ी नाराजगी, 17 जुलाई तक व्यक्तिगत रूप से मांगा जवाब

संध्या न्यूज-sandhya news
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नगर आयुक्त
मुख्य बिंदु
  • व्यक्तिगत शपथ पत्र का निर्देश: हाई कोर्ट ने हजारीबाग नगर आयुक्त को 17 जुलाई तक व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दायर करने का कड़ा निर्देश दिया है।
  • 23 जुलाई को अगली सुनवाई: इस बड़े मामले पर अदालत अब अगली सुनवाई 23 जुलाई को करेगी।
  • पुराने आदेशों की अनदेखी: कोर्ट ने नाराजगी जताई कि 28 अगस्त 2025 को पारित आदेशों का अब तक पालन नहीं किया गया है।
  • ठप पड़ी निगरानी व्यवस्था: अधिकांश सीसीटीवी कैमरे खराब होने से शहर में चोरी और छिनतई जैसी आपराधिक घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।

हजारीबाग शहर में लगातार बढ़ रही ट्रैफिक अव्यवस्था, सड़कों पर अतिक्रमण और बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों के गंभीर मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने हजारीबाग नगर आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने सीधे शब्दों में पूछा है कि बार-बार आदेशों की अनदेखी करने पर उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए।

नगर आयुक्त की कार्यप्रणाली पर हाई कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने इस बात पर तीव्र आपत्ति जताई कि जब न्यायालय द्वारा 9 जनवरी और 16 फरवरी को स्पष्ट रूप से नगर आयुक्त को खुद शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, तो उनकी जगह नगर निगम के कार्यपालक अभियंता ने शपथ पत्र कैसे दाखिल कर दिया।

अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए हजारीबाग जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कहा:

“न्यायालय के स्पष्ट आदेशों की इस तरह से अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत के कई आदेशों के बावजूद हजारीबाग शहर में आज तक ट्रैफिक लाइट की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। प्रमुख सड़कों पर रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है और व्यापक अतिक्रमण के कारण पूरी यातायात व्यवस्था चरमरा गई है।”

आदेशों की अनदेखी से शहर में बढ़ीं आपराधिक घटनाएं

मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी अच्युत स्वरूप मिश्र ने अदालत के समक्ष शहर की बदहाल स्थिति का पूरा ब्यौरा रखा। उन्होंने बताया कि 28 अगस्त 2025 को पारित हाई कोर्ट के आदेशों का अब तक धरातल पर कोई पालन नहीं किया गया है। शहर की सड़कों और पार्किंग स्थलों पर धड़ल्ले से अतिक्रमण जारी है, ट्रैफिक लाइटें नहीं लगाई गई हैं और अधिकांश सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से खराब पड़े हैं।

निगरानी व्यवस्था के पूरी तरह ठप रहने का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि इसके कारण चोरी और छिनतई जैसी आपराधिक वारदातों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। खंडपीठ ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि 17 जुलाई तक ट्रैफिक व्यवस्था की वास्तविक स्थिति और अब तक उठाए गए कदमों पर एक विस्तृत जवाब दाखिल किया जाए। अदालत ने साफ किया है कि हजारीबाग शहर में पार्किंग स्थलों से अतिक्रमण हटाना, यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना और बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को तत्काल चालू करना बेहद आवश्यक है।

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