हजारीबाग: हजारीबाग और चतरा जिले की सार्वजनिक सड़कों पर दिन-रात दौड़ रहे अनियंत्रित कोयला लदे भारी वाहनों (हाइवा और ट्रकों) के खिलाफ पूर्व सैनिकों का आक्रोश फूट पड़ा है। इस जानलेवा रफ्तार और लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने की मांग को लेकर ‘पूर्व सैनिक वेलफेयर ट्रस्ट एसोसिएशन’ ने शुक्रवार को हजारीबाग के उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। केंद्रीय अध्यक्ष अरविंद कुमार ओझा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने सार्वजनिक सड़कों को आम जनता के लिए सुरक्षित बनाने और कोयला वाहनों के लिए कड़े नियम तय करने की पुरजोर मांग उठाई।
देल्हो घाटी का खूनी खेल और ‘डेडिकेटेड कोल कॉरिडोर’ की मांग
ज्ञापन में इस बात पर गहरा सरोकार जताया गया कि भारी कोयला वाहनों के कारण सड़कों पर न सिर्फ घंटों लंबा जाम लग रहा है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा भी दांव पर लग चुकी है। हाल ही में चतरा जिले के सिमरिया प्रखंड स्थित देल्हो घाटी में हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना, जिसमें सीआरपीएफ (CRPF) जवान लक्ष्मण यादव को अपनी जान गंवानी पड़ी, उसका विशेष उल्लेख करते हुए एसोसिएशन ने प्रशासन से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल कड़े कदम उठाने को कहा।
प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखते हुए केंद्रीय अध्यक्ष अरविंद कुमार ओझा ने कहा:
“सार्वजनिक सड़कों पर कोयला लदे वाहनों का परिचालन अब आम जनता के लिए काल बन चुका है। हमारी स्पष्ट मांग है कि कोयला वाहनों के लिए एक अलग और समर्पित (Dedicated) परिवहन मार्ग/कॉरिडोर विकसित किया जाए। इसके साथ ही, शहरों और घनी आबादी वाले इलाकों में सख्त नो-एंट्री व्यवस्था लागू की जाए। ओवरलोडिंग और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले चालकों और संबंधित कोयला कंपनियों के खिलाफ जब तक क्रिमिनल केस दर्ज नहीं होगा, तब तक यह खूनी खेल बंद नहीं होने वाला।”
31 जुलाई तक का वक्त, वरना सड़कों पर उतरेंगे पूर्व सैनिक
एसोसिएशन ने जिला और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट रूप से अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यह मामला सीधे तौर पर जन सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा नियमित संयुक्त जांच चलाने, पूर्व में हुए हादसों की उच्चस्तरीय जांच करने तथा मृतकों व घायलों के परिवारों को उचित मुआवजा सुनिश्चित कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों को दो टूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा:
“यदि आगामी 31 जुलाई 2026 तक जिला प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा इन मांगों पर कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई धरातल पर नहीं की जाती है, तो 1 अगस्त 2026 से पूरा संगठन आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सड़कों पर उतरेगा। जनहित में एक बड़ा, शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जवाबदेही जिला प्रशासन की होगी।”
इस महत्वपूर्ण मौके पर ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय अध्यक्ष अरविंद कुमार ओझा के साथ मुख्य रूप से अवध कुमार भारती, भोलानाथ प्रसाद, शिवनंदन कुमार, महेंद्र गोप, नीरज ओझा, मनोज गोप सहित संगठन के कई अन्य पदाधिकारी और पूर्व सैनिक मुख्य रूप से उपस्थित रहे।


