भुरकुंडा में विस्थापन के मुद्दे पर गरजे सांसद मनीष जायसवाल: सौंदा डी पंचायत बचाओ संघर्ष मोर्चा की बैठक में खुली हुंकार— “उजाड़ने आएगा कोई, तो अग्रिम पंक्ति में मुझे पाएंगे”

60 वर्षों से बसे हजारों परिवारों पर मंडराया विस्थापन का खतरा; सरकारी उपक्रम सीसीएल के रेवेन्यू शेयरिंग प्रोजेक्ट के खिलाफ एकजुट हुआ जनसैलाब, सांसद ने केंद्रीय कोयला मंत्री तक लड़ाई लड़ने का दिया भरोसा

संध्या न्यूज-sandhya news
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भुरकुंडा सौंदा डी
मुख्य बिंदु
  • विशाल जनसभा: सौंदा डी पंचायत बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले पंचायत सचिवालय परिसर में आवासीय कॉलोनीवासियों की विस्थापन विरोधी एक महाबैठक आयोजित की गई।
  • मुख्य अतिथि: हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर जनता को हर स्तर पर सुरक्षा देने का वादा किया।
  • प्रोजेक्ट का स्वरूप: भारत सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम सीसीएल (CCL) द्वारा रेवेन्यू शेयरिंग मोड पर आवंटित इस नए माइनिंग प्रोजेक्ट के तहत आगामी 25 वर्षों तक खनन कार्य होना है, जिससे स्थानीय आबादी प्रभावित हो रही है।
  • जनता का सर्वसम्मत फैसला: स्थानीय ग्रामीणों और संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि खनन कार्य आवासीय कॉलोनियों को पूरी तरह छोड़कर किया जाए, किसी भी कीमत पर लोग नहीं उजड़ेंगे।

हजारीबाग: रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड अंतर्गत भुरकुंडा सौंदा डी पंचायत में विस्थापन और पुनर्वास का एक बहुत बड़ा और गंभीर मोर्चा खुल गया है। वर्षों से सरकारी उपक्रम सीसीएल की आवासीय कॉलोनियों में रह रहे हजारों परिवारों के आशियाने पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए सौंदा डी पंचायत बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले रविवार को पंचायत सचिवालय परिसर में एक विशाल और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रस्तावित खनन परियोजना के कारण अपनी माटी और रोजगार छिनने की आशंका से डरे बड़ी संख्या में स्थानीय महिला-पुरुष और नौजवान इस बैठक में पहुंचे और अपनी गंभीर चिंताएं सांसद के समक्ष रखीं।

“60 साल पुराने आशियाने को फिर से उजाड़ना कतई न्यायोचित नहीं” — मनीष जायसवाल

महाबैठक में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सांसद मनीष जायसवाल बेहद आक्रामक और भावुक नजर आए। उन्होंने विस्थापन के दंश को विकास का सबसे बड़ा रोड़ा बताया।

सांसद मनीष जायसवाल ने प्रबंधन और कंपनी को चेतावनी देते हुए कहा:

“विस्थापन का दर्द क्या होता है, इसे मैं बहुत बखूबी और गहराई से समझता हूं। इतिहास गवाह है कि जब सरकारी संस्थान सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) को अपनी फैक्ट्रियां और खदानें शुरू करने के लिए जमीन की जरूरत थी, तब आप लोगों ने अपनी जमीनों का बलिदान दिया और संस्थान ने ही आपको इस जगह पर लाकर विस्थापित के रूप में बसाया था। यहां रहते हुए आपकी कई पीढ़ियां बीत गईं, बच्चों की शादियां हुईं, बूढ़े यहीं शांत हुए। अब साठ साल बाद अचानक रेवेन्यू शेयरिंग मोड के व्यावसायिक फायदे के लिए आपको फिर से बेघर और बेसहारा करने की बात करना कतई न्यायोचित, विधिक और मानवीय नहीं है। संस्थान के बुरे वक्त में साथ देने वालों को आज इस तरह सड़क पर नहीं लाया जा सकता।”

🏗️ संघर्ष का नया रोडमैप: 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का होगा गठन

बैठक के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने माइनिंग प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं को रखते हुए बताया कि सीसीएल ने इस क्षेत्र में आगामी 25 वर्षों के लिए रेवेन्यू शेयरिंग मोड पर एक माइनिंग डेवलपर कंपनी को खनन का जिम्मा सौंपा है।

🎯 विस्थापन विरोधी आंदोलन की मुख्य रणनीति:
• सर्वसम्मत प्रस्ताव: माइनिंग प्रोजेक्ट आवासीय क्षेत्रों को छुए बिना अन्य खाली पड़े हिस्सों में करे खनन कार्य
• सांसद का सुझाव: शीघ्र वार्ता के लिए संघर्ष समिति गठित करे 11 सदस्यीय कोर-कमेटी प्रतिनिधिमंडल
• प्रशासनिक घेराव: सीसीएल के जीएम (GM) स्तर से लेकर केंद्रीय कोयला मंत्री तक उठाई जाएगी आवाज
• अंतिम चेतावनी: सौंदा डी पंचायत के नागरिकों को उजाड़ने की हर कोशिश का जमीनी स्तर पर होगा विरोध

सांसद मनीष जायसवाल ने आंदोलन को एक सही और संवैधानिक दिशा देने के लिए सौंदा डी पंचायत बचाओ संघर्ष समिति को तत्काल प्रभाव से एक 11 सदस्यीय मजबूत प्रतिनिधिमंडल गठित करने का व्यावहारिक सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस कमेटी के माध्यम से सीसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन के साथ आधिकारिक वार्ता की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाएगा ताकि कोई भी एकतरफा कार्रवाई न कर सके।

“संवैधानिक लड़ाई भी लड़ेंगे, जरूरत पड़ी तो बुलेट के आगे चेस्ट मेरा होगा”

सांसद मनीष जायसवाल ने जनता को पूरी तरह आश्वस्त करते हुए कहा कि वे इस पूरे विस्थापन के मामले को बेहद संवैधानिक, विधिक और लोकतांत्रिक तरीके से सीसीएल के जीएम स्तर से लेकर सीधे दिल्ली में केंद्रीय कोयला मंत्री तक पहुंचाएंगे। वे संबंधित शीर्ष अधिकारियों को कागजों के साथ यह एहसास कराएंगे कि जिन नागरिकों ने विपरीत परिस्थितियों में इस देश के कोयला उद्योग को खड़ा करने में अपना खून-पसीना बहाया, उन्हें आज इस तरह बेघर करना घोर अमानवीय है।

अपने संबोधन के अंत में सांसद ने बेहद भावुक और कड़े अंदाज में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि बातचीत और संवेदनशीलता के माध्यम से इस गंभीर समस्या का कोई न कोई सुरक्षित और सकारात्मक निस्तारण जरूर निकलेगा। लेकिन यदि किसी कारणवश या तानाशाही के चलते ऐसा नहीं हो सका, और भविष्य में कोई भी आपको यहां से बलपूर्वक उजाड़ने या हटाने आएगा, तो उस दमनकारी प्रशासनिक अमले के सामने सबसे अगली पंक्ति में खड़े होकर मुकाबला करने के लिए आप मुझे अपने साथ पाएंगे।

रामगढ़ भाजपा जिला अध्यक्ष और कई सांसद प्रतिनिधियों की रही मौजूदगी

सांसद मनीष जायसवाल के इस ऐतिहासिक और साहसिक आश्वासन पर पूरे मैदान में मौजूद हजारों लोगों ने गगनभेदी नारों के साथ उनका जोरदार समर्थन किया। इस बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक में मुख्य रूप से रामगढ़ भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव कुमार बाबला, पूर्व जिला महामंत्री विजय जायसवाल, लोकसभा सांसद प्रतिनिधि सत्येंद्र नारायण सिंह, राधेश्याम अग्रवाल, रामगढ़ जिला सांसद प्रतिनिधि राजीव जायसवाल, सीसीएल सांसद प्रतिनिधि रंजीत पांडेय, पुरुषोत्तम पांडेय, सुखदेव प्रसाद उपस्थित रहे। इनके अलावा पंचायत के मुखिया एवं अध्यक्ष उपेंद्र शर्मा, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि डब्ल्यू पांडेय, संजय यादव, दशरथ कुर्मी, अशोक कुमार शर्मा, संतोष शर्मा, सुनील कुमार सिंह, असलम मियां, राकेश जायसवाल, राजू मल्होत्रा, अजय पासवान, योगेश दांगी, अमरेश सिंह, सुरेंद्र करमाली, कला बाबू, राजेश गुप्ता, जय श्री मेहता सहित सैकड़ों गणमान्य लोग और हजारों ग्रामीण मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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