हजारीबाग में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान भारी बवाल: खाता नंबर 96 की जमीन पर फंसा ‘रैयती बनाम खास महाल’ का पेंच

सदर विधायक के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल रुकी प्रशासनिक कार्रवाई, दुकानदारों को कल सुबह तक का अंतिम अल्टीमेटम, नीलांबर पीतांबर चौक पर भारी तनाव

संध्या न्यूज-sandhya news
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मुख्य बिंदु
  • हाईवोल्टेज ड्रामा: नीलांबर पीतांबर चौक पर अतिक्रमण हटाने गई टीम का रैयतों और दुकानदारों ने किया तीखा विरोध।
  • विवादित भूमि: खाता नंबर 96 और प्लॉट नंबर 301, 302, 304, 305 की कुल 1.20 एकड़ (1 एकड़ 20 डिसमिल) जमीन पर फंसा है कानूनी पेंच।
  • रैयतों का दावा: पूर्वज बिरसा मुंडा के नाम दर्ज खतियानी रैयती जमीन है, जिसका अंचल के पास सरेंडर का कोई मूल दस्तावेज नहीं है।
  • लीजधारकों का तर्क: साल 1948 में ही मुंडा परिवार द्वारा जमीन को विधिवत सरेंडर किया जा चुका है, यह विशुद्ध रूप से खास महाल की भूमि है।
  • प्रशासन का रुख: सीओ ने दुकानदारों को चेताया—"सक्षम न्यायालय ने अतिक्रमण की छूट नहीं दी, कल सुबह तक स्वतः खाली करें।"

संध्या न्यूज ब्यूरो / हजारीबाग: Hazaribagh Khas Mahal Land Dispute शहर के नीलांबर पीतांबर चौक स्थित बेशकीमती सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासनिक टीम को मंगलवार को स्थानीय दुकानदारों, रैयतों और भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ा। देखते ही देखते मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों और जमीन पर अपनी दावेदारी ठोकने वाले रैयतों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते जन-तनाव को देखते हुए स्थानीय सदर विधायक ने तुरंत मौके पर पहुंचकर दखल दिया, जिसके बाद फिलहाल प्रशासनिक बुल्डोजर की कार्रवाई को रोक दिया गया है। हालांकि, प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए दुकानदारों को कल सुबह तक अपना सामान स्वतः हटाने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है।

आखिर क्या है 1 एकड़ 20 डिसमिल जमीन का पूरा पेंच?

इस पूरे उपद्रव और विवाद की जड़ में खाता नंबर 96 और प्लॉट नंबर 301, 302, 304, 305 की कुल 1 एकड़ 20 डिसमिल जमीन है। इस जमीन के लगभग 80 डिसमिल (संशोधित 73 डिसमिल) हिस्से को लेकर दो पक्षों और जिला प्रशासन के बीच दावों का एक ऐसा पेंच फंसा है, जो सुलझने का नाम नहीं ले रहा है।

Hazaribagh Khas Mahal Land Dispute

पहला पक्ष (रैयत): “रजिस्टर-2 में आज भी दर्ज है रैयती”

Hazaribagh Khas Mahal Land Dispute इसमें पहले पक्ष यानी रैयतों का दावा है कि यह जमीन उनके पूर्वज बिरसा मुंडा के नाम पर दर्ज खतियानी रैयती जमीन है। अशोक कुमार मुंडा व अन्य दावेदारों का कहना है कि पूर्व में टाइटल सूट जीतने के बाद बोर्ड ऑफ रेवेन्यू तक से उन्होंने 40 डिसमिल जमीन वापस हासिल की थी। उनका दावा है कि शेष 80 डिसमिल जमीन भी अंचल कार्यालय के रिकॉर्ड में ‘रैयती’ दर्ज है और आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के मुताबिक अंचल के पास इसके सरेंडर (पारित्याग) का कोई मूल कागजात मौजूद नहीं है।

Hazaribagh Khas Mahal Land Dispute

Hazaribagh Khas Mahal Land Dispute अशोक कुमार मुंडा ने प्रशासन पर दोहरी रिपोर्ट पेश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अंचल के रजिस्टर-2 और पूर्व में एसडीएम कोर्ट में दाखिल सीओ, कर्मचारी व अमीन की गोपनीय रिपोर्ट में इस जमीन को ‘रैयती’ माना गया है, तो अब अचानक यह खास महाल कैसे हो गई? उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर हमने उपायुक्त (डीसी) की अदालत में अपील की है, जिसकी सुनवाई अभी चल ही रही है, फिर प्रशासन जबरन बुलडोजर कैसे चला सकता है?

दूसरा पक्ष (लीजधारक): “1948 में ही हो चुका है जमीन का सरेंडर”

Hazaribagh Khas Mahal Land Dispute वहीं दूसरी ओर, लीजधारकों का दावा इसके बिल्कुल विपरीत है। इस पक्ष के शुभम खंडेलवाल व अन्य का कहना है कि इस 80 डिसमिल जमीन को साल 1948 में ही मंगरा मुंडा, कारू मुंडा और किसुन मुंडा द्वारा विधिवत सरेंडर किया जा चुका है, जिसके प्रामाणिक दस्तावेज उन्होंने हजारीबाग रिकॉर्ड रूम से निकलवाए हैं। उनके अनुसार यह जमीन पूरी तरह से खास महाल की है और उनकी दादी के नाम पर इसका लीज था, जिस पर अब अवैध कब्जा किया गया है।

शुभम खंडेलवाल ने विपक्ष पर अदालतों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने साफ कहा कि एलआरडीसी (LRDC), एडिशनल कलेक्टर और बोर्ड ऑफ रेवेन्यू तक से यह साफ हो चुका है कि यह जमीन खास महाल की है। उनके पास पूर्वजों के सरेंडर किए हुए हस्ताक्षरित दस्तावेज मौजूद हैं और एसडीओ कोर्ट की रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट है कि खास महाल भूमि को छोड़कर केवल शेष हिस्से पर ही विवाद है।

“सक्षम न्यायालय ने अतिक्रमण की छूट नहीं दी” — अंचल अधिकारी

Hazaribagh Khas Mahal Land Dispute कार्रवाई के दौरान जब साल 2001 से जगदीश मुंडा से इकरारनामा कराकर दुकानें चला रहे स्थानीय दुकानदारों ने कोर्ट के कागजात दिखाने की कोशिश की, तो मौके पर मौजूद सदर अंचल अधिकारी (सीओ) ने सख्त लहजे में दुकानदारों को हिदायत देते हुए कहा कि सक्षम न्यायालय ने आपको कहीं भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके रहने की छूट नहीं दी है। उन्होंने दुकानदारों से जजमेंट और नोटिस को ध्यान से पढ़ने की बात कही और सख्त चेतावनी दी कि अपना और प्रशासन का समय बर्बाद न करें और कल सुबह तक अपना सामान स्वतः यहाँ से हटा लें।

खास महाल का विशेष सर्वे जारी: सदर अंचल अधिकारी ने आगे स्पष्ट किया कि यहाँ खास महाल की 51 डिसमिल जमीन का बिल्कुल साफ मामला है। अंचल स्तर से दो-दो बार नोटिस देकर अतिक्रमणकारियों से जमीन खाली करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिले में इस समय खास महाल जमीनों का विशेष सर्वे चल रहा है और वरीय पदाधिकारियों के निर्देश पर सरकारी जमीन से हर हाल में विधिपूर्वक अतिक्रमण हटाया जाएगा।

विधायक के हस्तक्षेप से टला टकराव, पर सिर पर मंडरा रहा है बुलडोजर

Hazaribagh Khas Mahal Land Dispute अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी और रैयतों व अंचल अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई, तो स्थानीय सदर विधायक ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। उन्होंने दोनों पक्षों की दलीलें और कानूनी दस्तावेजों को देखा। मामला फिलहाल उपायुक्त (डीसी कोर्ट) में लंबित होने और रैयती दावों के कानूनी पेंच को देखते हुए विधायक ने अंचल अधिकारी और पुलिस अधिकारियों से बात कर तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई को रुकवा दिया।

कल सुबह तक की अंतिम मोहलत:

Hazaribagh Khas Mahal Land Dispute फिलहाल पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच एक तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। जिला प्रशासन ने अब पूरी तरह साफ कर दिया है कि विधायक के हस्तक्षेप पर सिर्फ आज की मोहलत दी गई है। यदि कल सुबह के भीतर दुकानदारों और कब्जाधारियों ने जमीन को खाली नहीं किया, तो प्रशासन बल प्रयोग कर अवैध ढांचों को गिराने की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

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