हजारीबाग: हजारीबाग शहर का प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाने वाला मालवीय मार्ग स्थित चांदनी मार्केट इन दिनों एक बेहद गंभीर और चौकाने वाले कारणों से चर्चा में है। यह बाजार अब कथित तौर पर डुप्लीकेट और नकली इलेक्ट्रॉनिक सामानों के अवैध कारोबार का सबसे बड़ा ‘सेकंड हब’ बनता जा रहा है। बाजार की कई बड़ी और छोटी दुकानों में अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर की नामी कंपनियों के नाम, लोगो और पैकिंग से हूबहू मिलते-जुलते इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। सबसे हैरत की बात यह है कि उपभोक्ताओं की आंखों में धूल झोंककर और सरकार के राजस्व को चूना लगाकर चल रहे इस करोड़ों के खेल पर संबंधित विभागों की कार्रवाई पूरी तरह से नदारद दिखाई देती है।
बिना जीएसटी बिल और वैध दस्तावेजों के खप रहा है माल
स्थानीय जागरूक व्यापारियों और बाजार की गतिविधियों पर नजर रखने वाले लोगों का साफ तौर पर दावा है कि यहाँ हर रोज बड़ी मात्रा में ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की खरीद-बिक्री की जाती है, जिनकी गुणवत्ता, वारंटी और असलियत पर गंभीर कानूनी सवाल खड़े होते हैं।
गंभीर आरोप यह भी है कि उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए ब्रांडेड सामानों को बेहद कम कीमत पर दिया जाता है और बदले में उन्हें कोई वैध जीएसटी बिल (GST Invoice) नहीं थमाया जाता। इसके अतिरिक्त, विदेशी मूल के उत्पादों, विशेषकर घटिया चीनी (चाइनीज) गैजेट्स की बिक्री में भी सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) और आयात संबंधी नियमों के खुले उल्लंघन की बातें सामने आ रही हैं।
📉 प्रशासनिक चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल: आखिर मौन क्यों हैं एजेंसियां?
इस पूरे कथित नेटवर्क के सामने आने के बाद हजारीबाग जिला प्रशासन की कार्यशैली और चौकसी पर भी उंगलियां उठनी शुरू हो गई हैं। आखिर क्या वजह है कि शहर के बीचों-बीच स्थित इस बाजार पर कभी कोई बड़ी सामूहिक कार्रवाई नहीं हुई?
❓ जनता और उपभोक्ताओं के 4 बड़े सवाल (Core Questions):
1. वाणिज्य कर विभाग (Commercial Tax Department) ने क्या कभी इन दुकानों के टर्नओवर और इनपुट टैक्स क्रेडिट की जांच की?
2. जिला पुलिस और उपभोक्ता संरक्षण विभाग (Consumer Protection Cell) ने संयुक्त छापेमारी क्यों नहीं की?
3. ट्रेडमार्क और कॉपीराइट उल्लंघन के मामलों पर कंपनियों के लीगल सेल ने अब तक संज्ञान क्यों नहीं लिया?
4. बिना वैध इनवॉइस और दस्तावेजों के माल मंगाने वाले सप्लायरों के मुख्य स्रोत (Source) का पता क्यों नहीं लगाया गया?
बाजार के ही कुछ अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि चांदनी मार्केट अब केवल खुदरा (रिटेल) बिक्री तक सीमित नहीं रह गया है। यह बाजार अब एक बड़े डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर का रूप ले चुका है, जहाँ से हजारीबाग जिले के विभिन्न प्रखंडों, सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों और आस-पास के छोटे दुकानदारों तक कथित तौर पर डुप्लीकेट इलेक्ट्रॉनिक सामान थोक भाव में सप्लाई किया जाता है। यदि उच्च स्तरीय जांच बैठती है, तो यह केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी का मामला नहीं निकलेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर कर चोरी, ट्रेडमार्क का गंभीर उल्लंघन और जनसुरक्षा से खिलवाड़ का एक बड़ा रैकेट उजागर हो सकता है।
सस्ते के चक्कर में जान का जोखिम: शॉर्ट सर्किट और आगजनी को न्योता
इलेक्ट्रॉनिक विशेषज्ञों का मानना है कि डुप्लीकेट इलेक्ट्रॉनिक सामानों की खरीद से उपभोक्ताओं को न केवल तात्कालिक आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि यह उनकी जान-माल की सुरक्षा के लिए भी एक सीधा और बड़ा खतरा है।
बाजार में बिकने वाले घटिया गुणवत्ता वाले डुप्लीकेट मोबाइल चार्जर, पतली केबल, बिना मानक वाले एडेप्टर और लोकल पावर बैंक में सुरक्षा मानकों (जैसे BIS सर्टिफिकेशन) का पूरी तरह अभाव होता है। इन उपकरणों में बिजली का उतार-चढ़ाव झेलने की क्षमता नहीं होती, जिससे इनमें शॉर्ट सर्किट होना, मोबाइल का ब्लास्ट होना, घरों में आग लगना और अन्य भयानक हादसे होना बेहद आम बात हो चुकी है।
क्या जागेगा प्रशासन या ठगे जाते रहेंगे उपभोक्ता?
अब हजारीबाग की जागरूक जनता और ठगे जा रहे उपभोक्ताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि क्या जिला प्रशासन, वाणिज्य कर विभाग और पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा इस बाजार में चल रहे कथित काले कारोबार की कोई निष्पक्ष और सघन जांच करेगी? क्या कभी इन दुकानों के गोदामों पर अचानक छापेमारी कर सामानों की सत्यता परखी जाएगी, या फिर हमेशा की तरह प्रशासनिक खामोशी का फायदा उठाकर यह सिंडिकेट यूं ही फलता-फूलता रहेगा और आम लोग नकली सामान खरीदकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवाते रहेंगे?


