संध्या न्यूज ब्यूरो / हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है, जहां प्रशासन ने भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. सदर प्रखंड के कोर्रा चौक स्थित जूनियर डीएवी स्कूल से महज दो किलोमीटर की दूरी पर Hazaribagh Orchard Lease Encroachment मामले को लेकर प्रशासन का पीला पंजा चला है. लगभग 2 एकड़ 2 डिसमिल की विशाल बागवानी (ऑर्चर्ड) लीज की जमीन पर नियमों को ताक पर रखकर बसाई जा रही अवैध आवासीय कॉलोनी को अंचल अधिकारी (सीओ) आशुतोष कुमार के नेतृत्व में पहुंची टीम ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई से हजारीबाग के अवैध जमीन कारोबारियों में हड़कंप मच गया है.
ऑर्चर्ड लीज का उल्लंघन: पेड़ों की जगह खड़ी की जा रही थीं कंक्रीट की दीवारें
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोर्रा चौक की यह बेशकीमती जमीन अभिजीत लहरी के नाम पर ‘बागवानी पट्टा’ (ऑर्चर्ड लीज) के तहत सरकारी स्तर से आवंटित है. नियमावली के मुताबिक, इस जमीन का उपयोग केवल पर्यावरण संरक्षण, पेड़-पौधे लगाने और बागवानी के लिए ही किया जा सकता था. लेकिन पिछले कुछ समय से प्रशासन को शिकायतें मिल रही थीं कि यहाँ Hazaribagh Orchard Lease Encroachment के जरिए कंक्रीट का जाल बिछाया जा रहा है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर अंचल अधिकारी आशुतोष कुमार ने अपनी टीम के साथ गुप्त रूप से स्थल का औचक निरीक्षण किया था. जांच में शिकायतें सही पाए जाने के बाद बुधवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों से अवैध ढांचों को जमींदोज कर दिया गया.
सदर सीओ आशुतोष कुमार ने स्पष्ट कहा: “हमें लगातार शिकायतें मिल रही थीं. पूर्व में भी इस मामले को लेकर सनाद दर्ज कराई गई थी और संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे. इसके बावजूद अवैध निर्माण कार्य को तीव्रता से जारी रखा गया. आज विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए अवैध ढांचों को गिराया गया है ताकि इस जमीन का उपयोग केवल ऑर्चर्ड के रूप में ही हो, न कि आवासीय बिल्डिंग के रूप में.”
पूर्व जिला परिषद सदस्य ने की ‘जुर्माने’ की मांग, स्थानीय लोगों ने सराहा
प्रशासनिक बुलडोजर चलने के दौरान मौके पर स्थानीय लोगों और जन-प्रतिनिधियों की भारी भीड़ जमा हो गई. सदर प्रखंड के पूर्व जिला परिषद सदस्य विनोद प्रसाद मेहता ने मौके पर पहुंचकर बीच-बचाव की कोशिश की. उन्होंने मीडिया के सामने यह खुलकर स्वीकार किया कि बागवानी पट्टे की जमीन पर घर बनाना पूरी तरह से अवैध है.
विनोद प्रसाद मेहता ने हजारीबाग उपायुक्त (डीसी) और मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा, “हम मानते हैं कि यह 100% गलत है. लेकिन जो गरीब लोग यहाँ आशियाना बना चुके हैं, उनसे 110% या 120% तक का भारी जुर्माना (Fine) लेकर नियमों को शिथिल किया जाए और उन्हें यहीं वैध रूप से बसाया जाए.” इसके विपरीत, स्थानीय निवासी भूपेंद्र प्रसाद ने प्रशासन के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ ऐसी कार्रवाई बेहद जरूरी है.
“बिना लाइसेंस के हथियार जैसा है बिना अनुमति का निर्माण”
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों और निर्माणकर्ताओं के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली. जब कुछ लोगों ने क्षेत्र की अन्य जगहों पर हो रहे अवैध निर्माणों का हवाला देकर बुलडोजर रोकने की कोशिश की, तो प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें दो टूक जवाब दिया.
अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जिस तरह बिना वैध लाइसेंस के आर्म्स (हथियार) रखना पूरी तरह गैर-कानूनी है, ठीक उसी तरह ऑर्चर्ड लीज की जमीन पर बिना प्रशासनिक अनुमति के आवासीय मकान बनाना भी दंडनीय अपराध है. दूसरे के गलत कार्यों की आड़ में अपने अवैध निर्माण को सही नहीं ठहराया जा सकता.
हजारीबाग में खासमहल जमीनों का बड़ा सर्वे, रडार पर हैं कई रसूखदार
इस बड़ी कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया है कि हजारीबाग जिला प्रशासन इस समय सरकारी और लीज की जमीनों की बंदरबांट को लेकर बेहद सख्त है. जिले में इस समय लगभग 800 एकड़ खासमहल और सरकारी लीज की जमीनों का व्यापक डिजिटल सर्वे किया जा रहा है. प्रशासन यह जांच कर रहा है कि मूल लीजधारी के बाद किन जमीनों की अवैध रूप से खरीद-बिक्री की गई है. इस सर्वे के कारण आने वाले दिनों में हजारीबाग के कई अन्य इलाकों में भी बड़े पैमाने पर बुलडोजर चलने और अवैध कॉलोनियों पर गाज गिरने के पूरे आसार हैं.


