हजारीबाग: एक तरफ स्मार्ट सिटी और चौतरफा विकास के ऊंचे-ऊंचे दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ हजारीबाग के ठीक कलेजे यानी कॉलेज मोड़ के समीप स्थित सरकारी प्रोफेसर कॉलोनी का यह नजारा किसी घोषित आपदा क्षेत्र जैसा भयावह हो चुका है। यहाँ विकास की चमचमाती फाइलों के पीछे एक बेहद दर्दनाक और विचलित कर देने वाली हकीकत छिपी है। हजारीबाग के हृदय स्थल पर चार संभ्रांत सरकारी परिवार पिछले एक साल से ऐसी जिंदगी काट रहे हैं, जिसे ‘नरक’ कहना भी शायद छोटा शब्द होगा। ‘संध्या न्यूज़’ की टीम ने जब ग्राउंड जीरो पर जाकर इस त्रासदी को अपनी आंखों से देखा, तो तस्वीरें रूह कंपा देने वाली थीं।
सड़कें नहीं, बह रही है सेप्टिक टैंक की गंदगी; डाइनिंग टेबल तक पहुंची बदबू
कॉलोनी के मुख्य रास्ते पर पैर रखने की जगह नहीं है। वहां जमा हुआ काला पानी कोई सामान्य जलजमाव नहीं है, बल्कि पास ही स्थित एक निजी बहुमंजिला इमारत (मल्टीस्टोरी बिल्डिंग) के सेप्टिक टैंक से चौबीसों घंटे रिसता हुआ इंसानी मल और कचरा है। जो गंदा पानी जमीन के भीतर नालियों में बहना चाहिए था, वह आज खुली सड़कों पर सरेआम बह रहा है।
सरकारी क्वार्टर के पीड़ित निवासियों का कहना है कि उन्हें अपने ही घरों से बाहर निकलने के लिए हर दिन इस जानलेवा और दूषित गंदगी को लांघकर जाना पड़ता है। स्थिति इस कदर नारकीय हो चुकी है कि घरों के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखने के बावजूद भीतर चौबीसों घंटे तीखी दुर्गंध का वास रहता है। डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाना तो दूर, लोगों का अपने ही कमरों में सांस लेना दुश्वार हो गया है।
24 परिवारों की आड़ में 5 ‘मास्टरमाइंड’ की दबंगई; विधायक फंड का गेट भी रोका
इस पूरी मानवीय त्रासदी के पीछे एक गहरी प्रशासनिक और रसूखदार साजिश काम कर रही है। पीड़ित श्रवण कुमार उपाध्याय और उनके साथियों ने जब ‘संध्या न्यूज़’ के कैमरे के सामने अपनी व्यथा रखी, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए।
पता चला कि पास की उस निजी इमारत में रहने वाले 24 परिवारों में से कुछ 4-5 ‘मास्टरमाइंड’ किस्म के लोग हैं, जो इस पूरे विवाद को हवा दे रहे हैं। इन रसूखदारों ने न केवल सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है, बल्कि अन्य मासूम परिवारों को भी भड़का कर अपने पक्ष में कर रखा है।
दबंगई का आलम देखिए: जब क्वार्टर वासियों ने मर्यादा में रहकर अपने मुख्य गेट के सामने बेतरतीब खड़ी गाड़ियों को हटाने और वहां कचरा न फेंकने की विनम्र प्रार्थना की, तो उन्हें इंसाफ की जगह सीधे शब्दों में धमकी दी गई— “जहां कंप्लेंट करनी है कर दो, हमारा जो मन करेगा हम वही करेंगे, हम यहां से नहीं हटेंगे।”
हद तो तब हो गई जब स्थानीय विधायक फंड से इन परिवारों की सुरक्षा के लिए एक लोहे का गेट लगाने का प्रयास किया गया। इन दबंगों ने अपने रसूख और प्रभावशाली लोगों की आड़ में आकर उस सरकारी विकास कार्य को भी बीच में ही रुकवा दिया।
“पढ़े-लिखे हैं, पर हफ्ते में 4 दिन बेड पर रहते हैं” — सरकारी नौकरी की ‘सजा’!
इस नरक में अपनी जिंदगी और करियर को तिल-तिल दम तोड़ते देख सरकारी क्वार्टर में रहने वाले ये पढ़े-लिखे लोग अपनी पीड़ा साझा करते-करते बेहद भावुक हो गए। श्रवण कुमार उपाध्याय ने नम आंखों से अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा:
“हम लोग पढ़े-लिखे इंसान हैं, समाज के जिम्मेदार नागरिक हैं। हमारा अपना एक टारगेट है, एक लाइफ है। लेकिन इस जहरीले माहौल के कारण सप्ताह में चार दिन तो हम सिर्फ बीमारी के चलते बेड पर लेटे रहते हैं। यह हमारी सरकारी नौकरी की मजबूरी है कि हम इस क्वार्टर में टिके हुए हैं, वरना इंसानियत के नाते हम कब का यह घर छोड़कर यहाँ से भाग गए होते।”
आज इस कॉलोनी में बच्चे लगातार बीमार पड़ रहे हैं, बुजुर्ग अस्वस्थ हैं और घर का पूरा वातावरण पूरी तरह से विषाक्त (Poisonous) हो चुका है। निवासियों के चेहरों पर साफ डर दिख रहा है कि आने वाली मानसूनी बारिश इस जमा कचरे को एक भयावह महामारी में बदल देगी।
बहरे सिस्टम की असंवेदनशीलता: फाइलों में दफन हो गए दर्जनों आवेदन
इस मामले का सबसे काला पक्ष यह है कि नगर निगम से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक के दरवाजे खटखटाए जा चुके हैं। क्वार्टर वासियों ने दर्जनों बार लिखित शिकायतें दीं, बड़े-बड़े अफसरों को आवेदन सौंपे, लेकिन नतीजा आज भी ‘सिफर’ (शून्य) है। विभाग के आला अधिकारी मुंह पर पट्टी बांधकर और कानों में तेल डालकर मौन साधे हुए हैं, जबकि ये चार परिवार हर एक सेकंड साक्षात नरक से गुजर रहे हैं।
‘संध्या न्यूज़’ की सीधी अपील और मांग:
यहाँ आकर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है: क्या चंद रसूखदार परिवारों का आराम, इन ४ परिवारों के जीने के मौलिक अधिकार और स्वास्थ्य से बड़ा हो गया है? क्या सरकारी क्वार्टरों में रहने वाले इन पढ़े-लिखे लोगों की पुकार सुनने वाला कोई नहीं है?
‘संध्या न्यूज़’ जिला प्रशासन और नगर निगम के आला अधिकारियों से यह पुरजोर मांग करता है कि इस पूरे मामले की तुरंत एक उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए। सरकारी जमीन को बाधित करने वाले दोषियों पर तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई हो और ड्रेनेज सिस्टम (जल निकासी) का उचित व स्थायी समाधान निकाला जाए।
सरकारी कॉलोनी की इस बदहाली और इस लड़ाई से जुड़ी हर एक छोटी-बड़ी अपडेट के लिए लगातार देखते रहें ‘संध्या न्यूज़’। क्योंकि, हम सिर्फ खबर नहीं दिखाते, हम आपकी आवाज बनते हैं!

