संध्या न्यूज ब्यूरो / हजारीबाग: NTPC Kerandari Coal Mine Expansion: झारखंड के हजारीबाग और इसके आस-पास के इलाकों की आबो-हवा में आने वाले दिनों में कोयले की काली धूल का गुबार और भी गहरा होने जा रहा है. एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड (NTPC Mining Limited) के केरंडारी-ए ओपनकास्ट कोल माइन प्रोजेक्ट ने कोयला निकासी और परिवहन का जो नया खाका खींचा है, वह स्थानीय निवासियों की सेहत और पर्यावरण के लिए किसी बड़े संकट की घंटी से कम नहीं है. नवीनतम ‘ट्रैफिक स्टडी रिपोर्ट’ के चौंकाने वाले दस्तावेजों से साफ हो गया है कि NTPC Kerandari Coal Mine Expansion के कारण हजारीबाग से लेकर चतरा जिले तक की प्रमुख सड़कें अब कोयले से लदे भारी ट्रकों के पहियों के नीचे कराहेंगी. सड़कों पर बढ़ने वाले इस बेतहाशा दबाव और उससे होने वाले भयानक वायु प्रदूषण को लेकर अब झारखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (JSPCB) ने भी अपने तेवर पूरी तरह तल्ख कर लिए हैं.
महज 2,988 टन से सफर शुरू कर 16,000 टन प्रतिदिन तक पहुँचेगा कोयले का उठाव
अगर इस बड़ी परियोजना के शुरुआती सफर और इसकी रफ्तार पर नजर डालें, तो जून 2024 में कुल कोयला परिवहन की मात्रा महज 2,988 टन प्रतिदिन थी, जिसे ढोने के लिए सड़कों पर केवल 200 ट्रकों की आवाजाही होती थी. लेकिन इसके बाद रफ्तार इतनी तेज रही कि दिसंबर 2024 आते-आते यह मात्रा बढ़कर 7,000 टन प्रतिदिन हो गई और 466 ट्रकों का रेला सड़कों पर उतर आया.
साल 2025 के अप्रैल महीने में यह आंकड़ा 10,000 टन और दिसंबर तक 11,500 टन प्रतिदिन तक जा पहुँचा, जिसके लिए 770 ट्रक हर रोज धुंआ उड़ाने लगे. वर्तमान वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में 12,000 टन कोयले के लिए 804 ट्रक और अप्रैल में सीधा उछाल मारते हुए 14,500 टन कोयले के लिए 970 ट्रक सड़कों पर दौड़ने लगे. जून 2026 तक यह मात्रा 15,000 टन (1,004 ट्रक) को पार कर चुकी है. अब अगस्त 2026 से लेकर मार्च 2027 तक का जो लक्ष्य तय किया गया है, वह हिला देने वाला है. इसके तहत खदानों से रोजाना 16,000 टन कोयले का उठाव होगा, जिसके लिए प्रतिदिन 1,070 ट्रकों का भारी-भरकम बोझ इन सड़कों को झेलना पड़ेगा.
जानिए कहां खप रहा है यह कोयला और किन रास्तों पर रहेगा सबसे ज्यादा दबाव
केरंडारी की खदानों से निकलने वाला यह काला सोना सड़क मार्ग से हजारीबाग और चतरा जिले की विभिन्न रेलवे साइडिंग और पावर प्लांटों तक पहुंचाया जा रहा है. परिवहन की इस पूरी फैक्ट फाइल को देखें तो सबसे ज्यादा भारी दबाव ‘शिवपुर साइडिंग’ और ‘नॉर्थ कर्णपुरा सुपर थर्मल पावर प्लांट (STPP)’ पर देखने को मिल रहा है.
आगामी अगस्त 2026 से अकेले शिवपुर साइडिंग की ओर हर रोज 6,000 टन कोयला भेजने के लिए 400 ट्रकों की फौज मुस्तैद रहेगी. वहीं, नॉर्थ कर्णपुरा पावर प्लांट के लिए 5,000 टन कोयले के साथ 334 ट्रकों की निरंतर आवाजाही तय की गई है. इसके अलावा टोरी साइडिंग की तरफ हर दिन 3,000 टन कोयला लेकर 200 ट्रक दौड़ेंगे. बाचरा साइडिंग, कटकमसंडी साइडिंग, कुशमही साइडिंग और बिरा टोली साइडिंग के लिए भी 500-500 टन कोयले का दैनिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके चलते इन चारों रूटों पर क्रमशः 34-34 भारी ट्रक हर रोज पर्यावरण की सेहत बिगाड़ेंगे.
प्रदूषण बोर्ड की चिंता: हर दिन सड़कों पर बढ़ेगा 13,012 टन अतिरिक्त कोयले का बोझ
साल 2027 के शुरुआती तीन महीनों (जनवरी से मार्च) तक भी यही पीक लोड यानी 16,000 टन प्रतिदिन का कोयला परिवहन और 1,070 ट्रकों का बेलगाम परिचालन जारी रहने वाला है. तकनीकी गणना के आधार पर देखा जाए तो शुरुआती दौर के मुकाबले कुल 13,012 टन अतिरिक्त कोयला हर दिन हजारीबाग और चतरा की धमनियों (सड़कों) से होकर गुजरेगा.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस बेतहाशा वृद्धि को स्थानीय परिवेश, खेती, वन संपदा और आम इंसानी जिंदगी के लिए एक बेहद गंभीर पर्यावरणीय खतरा माना है. इतनी बड़ी संख्या में ट्रकों के चलने से सड़कों के टूटने, उड़ने वाली धूल से फेफड़ों की गंभीर बीमारियां बढ़ने और आए दिन होने वाले सड़क हादसों का ग्राफ बढ़ने की आशंका है. अब देखना यह है कि विकास की इस अंधी दौड़ में प्रदूषण बोर्ड के कड़े रुख के बाद एनटीपीसी स्थानीय जनता को इस प्रदूषण के डंक से बचाने के लिए क्या पुख्ता इंतजाम करती है.


