डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस मनाया गया: वक्ताओं ने कहा- ‘उनका राष्ट्रवाद आज भी करोड़ों को करता है प्रेरित’

भाजपा जिला कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित, विधायक अमित यादव और जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं ने लिया संकल्प

संध्या न्यूज-sandhya news
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मुख्य बिंदु
  • अवसर: भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 73वां बलिदान दिवस।
  • मुख्य अतिथि: बरकट्ठा विधानसभा क्षेत्र के विधायक अमित यादव रहे मौजूद।
  • ऐतिहासिक नारा: "एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे" के संकल्प को किया गया याद।
  • संसदीय नेतृत्व: जिला महामंत्री जय नारायण प्रसाद ने किया संचालन, जिला मंत्री मनोरमा राणा ने जताया आभार।

हजारीबाग। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 73वें बलिदान दिवस के अवसर पर मंगलवार को कालीबाड़ी रोड स्थित जिला भाजपा कार्यालय में एक भव्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह ने की, जिसमें पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिरकत कर डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।

जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए डॉ. मुखर्जी ने दिया था सर्वोच्च बलिदान

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बरकट्ठा विधायक अमित यादव एवं जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, उनके विराट व्यक्तित्व एवं राष्ट्र निर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था तथा 23 जून 1953 को राष्ट्र सेवा के दौरान उनका निधन हुआ। वे एक महान शिक्षाविद, बैरिस्टर, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे।

वक्ताओं ने उनके ऐतिहासिक संघर्ष को याद करते हुए कहा कि डॉ. मुखर्जी ने “एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” का गगनभेदी नारा देकर जम्मू-कश्मीर के भारत में पूर्ण एकीकरण के लिए देशव्यापी आंदोलन चलाया था। इसी महान और पवित्र उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दे दिया, जिसे देश कभी नहीं भूल सकता।

मात्र 33 वर्ष की आयु में बने थे कुलपति, नेहरू मंत्रिमंडल से दिया था इस्तीफा

श्रद्धांजलि सभा के दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए नेताओं ने बताया कि डॉ. मुखर्जी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में उन्हें कोलकाता विश्वविद्यालय का कुलपति बनने का ऐतिहासिक गौरव प्राप्त हुआ था। स्वतंत्रता के बाद वे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बनाए गए थे। हालांकि, जब राष्ट्रहित के मुद्दों पर नेहरू-लियाकत समझौता हुआ, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध करते हुए स्वाभिमान के साथ मंत्रिमंडल और कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था।

बताए मार्ग पर चलने का लिया संकल्प: कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी भाजपाइयों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के तैलचित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके दिखाए अखंड भारत और अंत्योदय के मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया।

इस श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हरीश श्रीवास्तव, केपी ओझा, पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक यादव, वरिष्ठ नेता दिनेश सिंह राठौर, उपेंद्र सिंह, रेणुका साहू, निरंजन मेहता, विवेक सिंह, अजीत बक्शी, राजकरण पांडे, महेंद्र बिहारी, अजीत चंद्रवंशी, तनवीर अहमद, आनंद देव, विवेक बैरियर तथा ऋषि शर्मा सहित भाजपा के अनेक पदाधिकारी, मोर्चा अध्यक्ष और सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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