हजारीबाग: हजारीबाग नगर निगम में पिछले कुछ समय से चल रहा सस्पेंस और मजदूरों का संघर्ष आखिरकार रंग ले आया है। हक और न्याय की इस लड़ाई में एक बार फिर यह साबित हो गया है कि यदि मजदूरों की आवाज में दम हो और संगठन का नेतृत्व मजबूत हो, तो प्रशासन को झुकना ही पड़ता है। नगर निगम के वार्ड जमादार स्वर्गीय दीपक कुमार के आकस्मिक निधन के बाद, अखिल भारतीय मजदूर संगठन के कड़े रुख और सार्थक संघर्ष के आगे निगम प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा है।
लंबे इंतजार और निरंतर पैरवी के बाद आखिरकार पीड़ित परिवार को उनका हक मिल गया है। नगर निगम प्रशासन द्वारा मृतक कर्मी दीपक कुमार की पत्नी संध्या देवी के नाम पर मुआवजे का चेक जारी कर दिया गया। आज अखिल भारतीय मजदूर संगठन के नगर निगम यूनियन अध्यक्ष सह वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कुमार वाल्मीकि की गरिमामयी उपस्थिति में पीड़ित परिवार को सम्मानपूर्वक यह चेक सौंपा गया। चेक पाकर भावुक हुई संध्या देवी ने संगठन और सभी सहयोगियों का आभार जताया।
स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में हुए ३ बड़े ऐतिहासिक निर्णय
इस पूरे मामले में सिर्फ एक परिवार को मुआवजा ही नहीं मिला, बल्कि संगठन के कड़े स्टैंड के कारण नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी को भविष्य के लिए भी झुकना पड़ा है। मजदूर नेता अधिवक्ता विवेक कुमार वाल्मीकि ने बताया कि सभी कर्मचारियों की एकजुटता के कारण आज स्टैंडिंग कमेटी की बैठक संभव हो सकी, जिसमें कर्मचारी हित में तीन बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं:
आकस्मिक मृत्यु पर सहायता: भविष्य में यदि किसी भी निगम कर्मी का आकस्मिक निधन होता है, तो उसके आश्रित परिजनों को ₹1,20,000 (एक लाख बीस हजार रुपये) की सहायता राशि दी जाएगी।
अंतिम संस्कार के लिए तत्काल मदद: किसी भी दुखद घटना की स्थिति में अंतिम संस्कार हेतु परिवार को तुरंत ₹10,000 की नकद सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
घायल होने पर इलाज का खर्च: ड्यूटी के दौरान किसी भी हादसे या काम करते समय घायल होने पर कर्मचारी को ₹60,000 तक की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।
महापौर, उप महापौर और नगर आयुक्त का जताया आभार
इस बड़ी कामयाबी और कर्मचारी हित में लिए गए फैसलों के बाद अखिल भारतीय मजदूर संगठन ने नगर निगम प्रशासन और इसके पीछे खड़े सभी सहयोगियों के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है।
संगठन की ओर से विशेष रूप से हजारीबाग के नगर आयुक्त, महापौर अरविंद कुमार राणा एवं उप महापौर अविनाश यादव का धन्यवाद किया गया, जिनके सकारात्मक रुख की वजह से यह स्टैंडिंग कमेटी की बैठक और महत्वपूर्ण निर्णय संभव हो पाए। इसके साथ ही निगम के प्रधान सहायक निरंजन सिंह, संगठन के तमाम प्रतिनिधियों और रीढ़ की हड्डी बनकर खड़े रहे सभी सजग कर्मचारियों का भी विशेष आभार प्रकट किया गया।
हमारा मकसद: हर मजदूर को मिले सम्मान और अधिकार
चेक सौंपने के बाद मीडिया से बात करते हुए मजदूर नेता अधिवक्ता विवेक कुमार वाल्मीकि ने बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में कहा:
“अखिल भारतीय मजदूर संगठन का मुख्य उद्देश्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि धरातल पर हर कर्मचारी का कल्याण, उचित सम्मान और उनका हक सुनिश्चित करना है। आज का यह ऐतिहासिक फैसला हमारी एकजुटता की जीत है। हम भविष्य में भी किसी भी मजदूर साथी को विपरीत परिस्थितियों में अकेले जूझने नहीं देंगे। निगम का हर एक सफाईकर्मी और जमादार हमारे परिवार का हिस्सा है।” — अधिवक्ता विवेक कुमार वाल्मीकि (अध्यक्ष, नगर निगम यूनियन)
इस जीत के बाद नगर निगम के दैनिक वेतनभोगी और स्थायी कर्मचारियों में खुशी की लहर है और संगठन के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।


