हजारीबाग: देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) को लागू हुए लंबा समय हो चुका है, लेकिन इसे कक्षाओं में सही मायने में कैसे उतारा जाए, इसे लेकर जमीनी स्तर पर प्रयास तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में आज हजारीबाग के मालवीय मार्ग स्थित प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में एक बेहद महत्वपूर्ण और एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का मुख्य फोकस ‘पंचपदी शिक्षण प्रणाली’ पर रहा। इसका सीधा उद्देश्य ब्लैकबोर्ड रटंत विद्या से हटकर, आधुनिक दौर के बच्चों के लिए पढ़ाई को अधिक रोचक, व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित (Student-Centric) बनाना है। कार्यक्रम में स्कूल के तमाम शिक्षकों (आचार्य बंधु-भगिनी) ने हिस्सा लिया और यह सीखा कि कैसे नए दौर की चुनौतियों के हिसाब से खुद को अपग्रेड किया जाए।
क्या है पंचपदी प्रणाली और क्यों है इसकी जरूरत? विभाग प्रमुख ने समझाया
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और हजारीबाग विभाग के विभाग प्रमुख ब्रजेश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में बहुत ही व्यावहारिक बातें रखीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते समय में अगर शिक्षक खुद को अपडेट नहीं करेंगे, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।
पंचपदी शिक्षण प्रणाली (जिसमें मुख्य रूप से अदिति, बोध, अभ्यास, प्रयोग और प्रसार जैसे चरण शामिल होते हैं) पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा:
“राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल कागजों पर नहीं, बल्कि क्लासरूम के भीतर सफल होनी चाहिए। इसके लिए शिक्षकों में नवाचार (Innovation) का होना जरूरी है। नियमित अभ्यास, अपने विषय की गहरी तैयारी और नए गैजेट्स या शिक्षण तकनीकों का इस्तेमाल करके ही हम बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकते हैं।”
— ब्रजेश कुमार सिंह, विभाग प्रमुख
उन्होंने शिक्षकों को कई ऐसे टिप्स दिए जिससे वे रोजाना के उबाऊ पाठ को भी एक खेल या गतिविधि में बदल सकते हैं, जिससे बच्चों का स्कूल आने का उत्साह बना रहे।

शिक्षकों के विकास से ही सुधरेगा छात्रों का भविष्य: सचिव ज्ञानचंद प्रसाद मेहता
इस पूरे आयोजन की सराहना करते हुए विद्यालय प्रबंधन समिति के सचिव ज्ञानचंद प्रसाद मेहता ने कहा कि यह कार्यशाला स्कूल के इतिहास में एक बड़ा कदम है। उन्होंने मुख्य वक्ता के प्रति आभार व्यक्त किया और प्रधानाचार्य डॉ. अजय कुमार पाठक समेत पूरी टीम को इस तरह के अकादमिक माहौल को तैयार करने के लिए बधाई दी।
सचिव महोदय ने अपने संबोधन में मुख्य बातें कहीं:
सतत विकास: शिक्षकों का लगातार ट्रेनिंग लेते रहना उनके प्रोफेशनल करियर के साथ-साथ छात्रों के मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।
बदलाव की नींव: यह कार्यशाला आने वाले दिनों में क्लासरूम के माहौल को बदलने में मील का पत्थर साबित होगी।
वन-वे लेक्चर नहीं, क्लासरूम जैसा दिखा माहौल
आमतौर पर सरकारी या औपचारिक कार्यशालाएं एकतरफा भाषण बनकर रह जाती हैं, लेकिन मालवीय मार्ग शिशु विद्या मंदिर में आयोजित इस कार्यशाला का नजारा कुछ अलग था।
ओपन डिस्कशन (संवाद सत्र): पूरे सत्र के दौरान शिक्षक केवल सुन नहीं रहे थे, बल्कि उन्होंने अपने सामने आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों (जैसे- बच्चों का ध्यान केंद्रित न होना, डिजिटल टूल्स का सही उपयोग आदि) को मुख्य वक्ता के सामने रखा।
ग्रुप डिस्कशन: आचार्यों ने अलग-अलग ग्रुप बनाकर पंचपदी प्रणाली को अपनी डेली डायरी और लेसन प्लान में शामिल करने का रोडमैप तैयार किया।
कार्यक्रम का समापन बेहद गरिमामयी माहौल में माननीय सचिव महोदय के धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्र कल्याण की कामना के साथ हुआ।
संध्या न्यूज एनालिसिस (संपादकीय टिप्पणी):
हजारीबाग के मालवीय मार्ग सरस्वती शिशु विद्या मंदिर द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है। जब तक निजी और सरकारी स्तर पर शिक्षकों को इस तरह की ट्रेनिंग नहीं मिलेगी, तब तक नई शिक्षा नीति के बड़े लक्ष्यों को हासिल करना नामुमकिन है। उम्मीद है कि इस कार्यशाला का सीधा असर अब स्कूल के बच्चों के रिजल्ट और उनके व्यवहार में देखने को मिलेगा।


