हजारीबाग: हजारीबाग के मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत सदर प्रखंड के सीतागढ़ा (गुड़वा मौजा) में टीचर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (टीटीआई) के समीप स्थित एक बेशकीमती भूखंड को लेकर जिला प्रशासन और जन-प्रतिनिधियों के बीच एक भीषण राजनैतिक और विधिक संग्राम छिड़ गया है। किसी अज्ञात और रसूखदार ‘टेलीफोन कॉल’ के प्रभाव में आकर ब्लॉक प्रशासन और पुलिस द्वारा ग्रामीणों की पुश्तैनी और खेती योग्य जमीन पर एकपक्षीय कब्जा दिलाने की कथित कोशिश ने पूरे इलाके को सुलगा दिया है। हद तो तब हो गई जब इस प्रशासनिक तांडव के दौरान हुई धक्का-मुक्की में पुलिस विभाग से ही सेवानिवृत्त एक बुजुर्ग का हाथ तक टूट गया। इस गंभीर ज्यादती के बाद हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल खुद ग्राउंड जीरो पर पहुंचे, घटनास्थल का सघन निरीक्षण किया और पीड़ितों से विस्तृत रणनीति बनाई। इसके तुरंत बाद, सांसद लाव-लश्कर के साथ सीधे सदर अंचल कार्यालय पहुंचे और अंचल अधिकारी (सीओ) आशुतोष कुमार के चैंबर में साक्ष्यों को रखकर प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली को बेनकाब कर दिया।
- रिटायर्ड पुलिसकर्मी कुदुस अंसारी का टूटा हाथ, सांसद ने कहा— “वर्दी के साए में जुल्म स्वीकार्य नहीं”
- 🗺️ विवादित भूखंड का विधिक एवं भौगोलिक ढांचा (Core Legal Dimensions)
- 🕵️ खोजी रिपोर्ट: सीओ चैंबर के भीतर जब सांसद ने घेरा प्रशासनिक तंत्र
- सार्वजनिक मार्ग पर लगे अवैध गेट को हटाने का अल्टीमेटम
- सीओ आशुतोष कुमार का पक्ष: “हम केवल शांति व्यवस्था बनाने गए थे, कागजातों की करेंगे जांच”
रिटायर्ड पुलिसकर्मी कुदुस अंसारी का टूटा हाथ, सांसद ने कहा— “वर्दी के साए में जुल्म स्वीकार्य नहीं”
सीतागढ़ा दौरे के दौरान सांसद मनीष जायसवाल ने सबसे पहले प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान लहूलुहान और चोटिल हुए बुजुर्ग कुदुस अंसारी से उनके आवास पर मुलाकात की। कुदुस अंसारी, जो खुद पुलिस विभाग (पीटीसी) से रिटायर्ड हैं, उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार प्रशासनिक अधिकारियों और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दूसरे पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए उनके साथ बर्बरता से धक्का-मुक्की की गई, जिसके कारण उनके हाथ की हड्डी टूट गई।
बुजुर्ग का कुशलक्षेम जानने के बाद सांसद का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस देश में कानून से ऊपर कोई नहीं है। यदि वर्दी और सरकारी रसूख की आड़ में किसी निर्दोष, बुजुर्ग और देश के पूर्व सेवक के साथ ऐसा अत्याचार हुआ है, तो इसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए। सांसद ने चेतावनी दी कि दोषी अधिकारियों के विरुद्ध जब तक नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो जाती, वे शांत नहीं बैठेंगे। विकास और कानून-व्यवस्था के नाम पर आमजन की आवाज को अनसुना करना भारी पड़ेगा।
🗺️ विवादित भूखंड का विधिक एवं भौगोलिक ढांचा (Core Legal Dimensions)
सदर अंचल कार्यालय में समीक्षा बैठक के दौरान सांसद ने सीओ के सामने न केवल जमीन के मालिकाना हक के पुख्ता विधिक दस्तावेज पेश किए, बल्कि जनहित से जुड़े एक बड़े और नए विवाद का भी पर्दाफाश किया।
⚖️ सीतागढ़ा गुड़वा मौजा का कानूनी व जमीनी ढांचा:
• ऐतिहासिक विधिक ढाल: एडिशनल सेशन जज हजारीबाग का साल 1982 का फैसला, जिसके तहत ग्रामीणों को मालिकाना हक हासिल है।
• विधिक इतिहास: ग्रामीणों ने तत्कालीन बिहार सरकार के संबंधित विभाग से लंबी विधिक लड़ाई जीतकर यह हक पाया था।
• रकबा व चौहद्दी: कुल 24.52 एकड़ की कृषि योग्य भूमि, जिसके उत्तर (North) में TTI इंस्टीट्यूट व अब्दुल अजीज की जमीन और दक्षिण (South) में फैमिन रिलीफ रोड है।
• नया विवाद (अवैध गेट): दूसरे पक्ष द्वारा सार्वजनिक मार्ग पर अवैध रूप से लोहे का गेट लगाकर आसपास के कई गांवों का रास्ता पूरी तरह ठप कर दिया गया है।
🕵️ खोजी रिपोर्ट: सीओ चैंबर के भीतर जब सांसद ने घेरा प्रशासनिक तंत्र
सदर अंचल कार्यालय के भीतर का माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया जब सांसद मनीष जायसवाल ने सीओ आशुतोष कुमार को उनके ही चैंबर में विधिक रूप से घेर लिया। सांसद ने सीधे शब्दों में अंचल प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब विवादित स्थल पर कोई लॉ एंड ऑर्डर का मुद्दा ही नहीं था और ग्रामीण अपनी जमीनों पर शांतिपूर्वक खेती कर रहे थे, तो आखिर अंचल कार्यालय और मुफस्सिल पुलिस एक पूरी बस फोर्स लेकर वहां किस हैसियत से कब्जा दिलाने पहुंची थी?
सांसद ने अत्यंत तीखे शब्दों में अंचल अधिकारी को चेताया कि वे किसी भी कीमत पर 150 गरीब ग्रामीणों के मुंह का निवाला और उनके हक की जमीन को भू-माफियाओं के हाथ में जाने नहीं देंगे। उन्होंने सीओ की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा:
“ऐसा प्रतीत होता है कि अंचल प्रशासन किसी रसूखदार के ‘टेलीफोनिक कॉल के भूत’ के इशारे पर नाच रहा है। शिकायतकर्ता के पास अपनी जमीन का दावा सिद्ध करने के लिए एक पन्ना कागज़ तक नहीं है, इसके बावजूद प्रशासन ने एकपक्षीय रुख अपनाते हुए गरीबों की हकमारी करने का दुस्साहस किया। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि इस देश में सिर्फ और सिर्फ कानून का राज चलेगा, किसी अधिकारी की तानाशाही या मौखिक आदेश का नहीं।”
इसी तीखी बहस के दौरान जब अंचल कार्यालय के एक कनिष्ठ कर्मचारी ने बीच में अनावश्यक हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो सांसद ने उसकी क्लास लगाते हुए उसे कड़े लहजे में अनुशासन का पाठ पढ़ाया और प्रशासनिक शिष्टाचार की याद दिलाई। इसके तुरंत बाद, सांसद ने फोन उठाकर सीधे राज्य के वरीय अधिकारियों और मुख्यमंत्री सचिवालय को इस गंभीर मामले से अवगत कराया और पूरे अंचल प्रशासन के इस रवैये पर अपनी आधिकारिक वर्बल कंप्लेंट दर्ज कराई।
सार्वजनिक मार्ग पर लगे अवैध गेट को हटाने का अल्टीमेटम
सांसद ने सीओ को कागजात सौंपते हुए एक और गंभीर मामले को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि दूसरे पक्ष द्वारा सार्वजनिक मार्ग पर लोहे का बड़ा गेट लगाकर आसपास के कई गांवों का आवागमन पूरी तरह बाधित कर दिया गया है। सांसद ने सीओ को अल्टीमेटम दिया कि इस मार्ग को अविलंब सुचारु कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को असुविधा न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का दायित्व निष्पक्षता और पारदर्शिता से न्याय करना है। यदि किसी राजनैतिक या बाहरी दबाव में आकर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई जारी रही, तो इस पूरे मामले को वे उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) तक ले जाएंगे।
सीओ आशुतोष कुमार का पक्ष: “हम केवल शांति व्यवस्था बनाने गए थे, कागजातों की करेंगे जांच”
इन तमाम तीखे आरोपों और राजनैतिक हुंकार पर अपना पक्ष रखते हुए अंचल अधिकारी (सीओ) आशुतोष कुमार ने प्रशासनिक मजबूरी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सांसद महोदय द्वारा लगाए जा रहे आरोप सही नहीं हैं। वास्तविकता यह है कि गुड़वा मौजा में टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज द्वारा अपनी पुरानी और क्षतिग्रस्त बाउंड्री का मरम्मत कार्य कराया जा रहा था, जिसका ग्रामीणों ने भारी संख्या में जुटकर विरोध किया। लिखित आवेदन मिलने के बाद वहां कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े, केवल इसी उद्देश्य से वे पुलिस बल के साथ वहां गए थे।
बुजुर्ग कुदुस अंसारी के घायल होने पर सीओ ने सफाई दी कि वहां 40-50 की संख्या में महिलाएं अचानक आगे आ गई थीं, जिससे बचाव के दौरान ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई होगी, प्रशासन द्वारा किसी भी तरह का बल प्रयोग या मारपीट नहीं की गई है। सीओ ने आश्वस्त करते हुए कहा:
“सांसद महोदय द्वारा ग्रामीणों के पक्ष में जो भी भूमि संबंधी विधिक दस्तावेज, कोर्ट के फैसले और चौहद्दी के कागजात सौंपे गए हैं, उनका सरकारी रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। सार्वजनिक रास्ते पर गेट लगाने की शिकायत पर भी अंचल कार्यालय तुरंत संज्ञान लेगा और पूरी तरह से निष्पक्ष व न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”


