Hazaribagh Local News: हजारीबाग में अंधविश्वास की भेंट चढ़ा 13 वर्षीय मासूम: सांप काटने के बाद अस्पताल की जगह तंत्र-मंत्र और गोबर के भरोसे रहा परिवार

चौपारण के रेमो करमा गांव में 12 घंटे तक चलता रहा अंधविश्वास का खेल, बच्चे को गोबर में दबाकर जीवित करने का किया गया प्रयास

संध्या न्यूज-sandhya news
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मुख्य बिंदु
  • अंधविश्वास की पराकाष्ठा: सांप काटने के बाद मासूम को अस्पताल ले जाने के बजाय 12 घंटे तक तंत्र-मंत्र का खेल चलता रहा।
  • अजीबोगरीब दावा: जहर उतारने और बच्चे को जीवित करने के नाम पर उसे घंटों गोबर के ढेर में दबाकर रखा गया।
  • झोलाछाप की लापरवाही: शुरुआत में एक ग्रामीण चिकित्सक के पास ले जाया गया, जिसने गंभीरता समझे बिना सामान्य सुई देकर घर भेज दिया।
  • वैज्ञानिक सच: डॉक्टरों के अनुसार सांप काटने का एकमात्र इलाज एंटी-स्नेक वेनम है, गोबर में दबाने से दम घुटने का खतरा बढ़ जाता है।

संध्या न्यूज ब्यूरो / हजारीबाग: Hazaribagh Local News: विज्ञान और आधुनिकता के तमाम दावों के बीच आज भी ग्रामीण इलाकों से अंधविश्वास की ऐसी हृदयविदारक तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो मानवता को झकझोर कर रख देती हैं। ताजा मामला हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड अंतर्गत देबो पंचायत के रेमो करमा गांव का है, जहां सर्पदंश के शिकार एक 13 वर्षीय मासूम बच्चे ऋषि कुमार की अंधविश्वास के कारण दर्दनाक मौत हो गई। आरोप है कि बच्चे को समय पर अस्पताल ले जाकर एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन दिलवाने के बजाय परिजन और ग्रामीण उसे तंत्र-मंत्र, झाड़-फूंक और जड़ी-बूटी के सहारे बचाने की कोशिश करते रहे।

मां के साथ जमीन पर सोया था मासूम ऋषि, रात में डंसा जहरीले सांप ने

परिजनों के अनुसार, अरविंद रविदास का 13 वर्षीय पुत्र ऋषि कुमार रात में अपनी मां के साथ जमीन पर सोया था। देर रात उसने शरीर में किसी जहरीले जीव के काटने की शिकायत की। शरीर पर डंक के निशान देखकर परिजनों को आशंका हुई कि उसे किसी बेहद जहरीले सांप ने काट लिया है। इस आपातकालीन स्थिति में तुरंत किसी बड़े अस्पताल भागने के बजाय परिजन स्थानीय स्तर पर ही झाड़-फूंक और पारंपरिक उपाय ढूंढने लगे, जो बाद में मासूम की जान पर भारी पड़ गया।

ग्रामीण चिकित्सक की लापरवाही ने और बिगाड़ी बात

सांप काटने की बात सामने आने के बाद परिजन पहले बच्चे को एक स्थानीय ग्रामीण चिकित्सक (झोलाछाप डॉक्टर) के पास ले गए। उस चिकित्सक ने भी मामले की गंभीरता और सांप के जहर के असर को समझे बिना बच्चे को एक सामान्य इंजेक्शन देकर घर भेज दिया। घर लौटने के कुछ ही देर बाद सांप का जहर ऋषि के पूरे शरीर में फैलने लगा और उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इस शुरुआती लापरवाही ने बच्चे की स्थिति को और अधिक नाजुक बना दिया।

अस्पताल की जगह गोबर में दबाकर जीवित करने का प्रयास, तमाशबीन बनी रही भीड़

स्थिति पूरी तरह बेकाबू होने के बाद भी बच्चे को किसी सरकारी अस्पताल या बड़े चिकित्सा केंद्र नहीं ले जाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के ही एक व्यक्ति ने जड़ी-बूटी और तंत्र-मंत्र के जरिए सांप का जहर उतारने और बच्चे को पूरी तरह ठीक करने का दावा किया।

हद तो तब हो गई जब अंधविश्वास के नाम पर बच्चे के शरीर से जहर निकालने के लिए उसे पिछले 12 घंटे से गोबर के ढेर में दबाकर रख दिया गया। सोशल मीडिया पर भी इस अमानवीय कृत्य का वीडियो प्रसारित हो रहा है, जिसमें भीड़ तमाशबीन बनी रही और पिछले 12 घंटों से तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास का यह दौर चलता रहा।

गांव में पसरा मातम, व्यवस्था और सोच पर खड़े हुए बड़े सवाल

Hazaribagh Local News: घंटों तक चले इस कथित उपचार और झाड़-फूंक के बाद आखिरकार सुबह मासूम ऋषि की जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मासूम की मौत ने एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में वैज्ञानिक उपचार की बजाय अंधविश्वास पर भरोसा किया जा रहा है।

चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि सांप काटने का एकमात्र इलाज केवल और केवल एंटी-स्नेक वेनम (Anti-Snake Venom) ही है, गोबर में दबाने से पीड़ित का दम घुट जाता है और बचने की बची-खुची उम्मीद भी खत्म हो जाती है। जब तक ऐसी कुप्रथाओं और तांत्रिकों के खिलाफ कड़ा एक्शन नहीं लिया जाएगा, तब तक मासूमों की जिंदगी ऐसे ही खत्म होती रहेगी।

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