Hazaribagh Local News: शहर की लाइफलाइन को कब मिलेगी हरी झंडी? हजारीबाग में रिंग रोड के अधूरे निर्माण को लेकर फिर उठी मांग

"जाम की जंजीरों में जकड़ा शहर, जनता का ईंधन और समय दोनों हो रहा स्वाहा" — समाजसेवी राकेश गुप्ता ने केंद्र और राज्य सरकार से लगाई गुहार

संध्या न्यूज-sandhya news
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मुख्य बिंदु
  • विकास की अटकी रफ्तार: बढ़ते शहरीकरण के बीच हजारीबाग की जीवनरेखा कहे जाने वाले रिंग रोड प्रोजेक्ट की फाइलें धूल फांक रही हैं।
  • महाजाम से हाहाकार: रिंग रोड न होने से भारी और औद्योगिक वाहन शहर के बीचों-बीच से गुजरते हैं, जिससे हर वक्त हादसों का साया बना रहता है।
  • आर्थिक उन्नति का द्वार: इस बाईपास के बनते ही जिले के सीमावर्ती इलाकों में उद्योग, व्यापार और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का नया हब तैयार होगा।
  • दिल्ली और रांची से अपील: जदयू नेता राकेश गुप्ता ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र और राज्य सरकार दोनों से त्वरित कदम उठाने की मांग की।

संध्या न्यूज ब्यूरो / हजारीबाग: Hazaribagh Local News: क्या हजारीबाग की सड़कों को कभी ट्रैफिक के इस दमघोंटू महाजाम से मुक्ति मिल पाएगी? यह सवाल आज हर उस शहरवासी का है जो रोज घंटों सड़कों पर रेंगने को मजबूर है। हजारीबाग के इसी चौतरफा विकास और आम जनता की इस सबसे बड़ी तकलीफ को देखते हुए अब बहुप्रतीक्षित रिंग रोड के निर्माण की मांग एक बार फिर सुलग उठी है। समाजसेवी और जदयू नेता राकेश गुप्ता ने इस गंभीर जनहित के मुद्दे पर सीधे हुक्मरानों को झकझोरा है और परियोजना के बरसों से अधूरे पड़े काम को बिना किसी तकनीकी बहानेबाजी के तुरंत शुरू करने की पुरजोर वकालत की है।

जब थम जाती है शहर की धड़कन: ईंधन और वक्त दोनों की बर्बादी

हजारीबाग अब कोई छोटा कस्बा नहीं, बल्कि एक बड़े औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। लेकिन इसके बावजूद यहां की बुनियादी ढांचा (Infrastructure) पुरानी व्यवस्था के सहारे ही हांफ रहा है। मामले की गंभीरता को समझाते हुए जदयू नेता राकेश गुप्ता ने दोटूक कहा, “रिंग रोड का निर्माण अब कोई चुनावी वादा या केवल एक सड़क का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह समय की सबसे बड़ी और अनिवार्य मांग है।”

उन्होंने आंकड़ों और जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए बताया कि एक सुव्यवस्थित रिंग रोड न होने के कारण न केवल पूरी यातायात व्यवस्था सुस्त पड़ गई है, बल्कि हर दिन हजारों लीटर ईंधन और जनता का लाखों कीमती घंटा इस ट्रैफिक जाम की भेंट चढ़कर स्वाहा हो रहा है।

भारी वाहनों का आतंक थमेगा, सुरक्षित होंगी हजारीबाग की सड़कें

वर्तमान स्थिति यह है कि शहर से गुजरने वाले भारी ट्रक और डंपर मुख्य रिहायशी इलाकों और चौराहों से होकर निकलते हैं। इससे न सिर्फ सड़कें समय से पहले जर्जर हो रही हैं, बल्कि स्कूली बच्चों और आम राहगीरों की जान भी हर वक्त जोखिम में रहती है।

राकेश गुप्ता के अनुसार, रिंग रोड के धरातल पर उतरते ही इन तमाम भारी वाहनों का शहर के भीतर प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएगा। ये गाड़ियां शहर के बाहरी छोर से ही बिना किसी व्यवधान के अपने गंतव्य की ओर निकल जाएंगी। इससे हजारीबाग की अंदरूनी सड़कें शांत, सुरक्षित और पूरी तरह सुव्यवस्थित हो सकेंगी।

उद्योग और रोजगार को लगेंगे पंख, सरकार से त्वरित एक्शन की उम्मीद

आर्थिक दृष्टिकोण से यह प्रोजेक्ट पूरे हजारीबाग जिले की तकदीर बदलने की ताकत रखता है। रिंग रोड के किनारे नए व्यापारिक गलियारे, लॉजिस्टिक्स हब और कुटीर उद्योगों के रास्ते खुलेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर ही युवाओं को रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।

समाजसेवी राकेश गुप्ता ने केंद्र और राज्य सरकार से बेहद कड़े शब्दों में आग्रह किया है कि जनहित के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक लेटलतीफी या कागजी दांव-पेच में न उलझाया जाए। उन्होंने मांग की है कि दोनों सरकारें मिलकर इस अधूरे कार्य को तुरंत प्रारंभ करने के लिए बजट और जरूरी स्वीकृतियां जारी करें, ताकि हजारीबाग के विकास को एक नई और आधुनिक दिशा दी जा सके।

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