हजारीबाग: सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के अभिभावकों का फूटा गुस्सा, ‘वार्षिक शुल्क’ के नाम पर मनमानी वसूली के खिलाफ DEO को सौंपा आवेदन

ट्यूशन फीस के अलावा ₹7 से ₹8 हजार सालाना चार्ज का विरोध; पैरेंट्स का आरोप- फीस के लिए बच्चों को किया जा रहा मानसिक रूप से प्रताड़ित

संध्या न्यूज-sandhya news
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सरस्वती शिशु विद्या मंदिर
मुख्य बिंदु
  • DEO से मिले अभिभावक: हजारीबाग के पार नाला, कुम्हारटोली स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से मिलकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।
  • अवैध वसूली का गंभीर आरोप: पैरेंट्स का आरोप है कि स्कूल प्रशासन द्वारा हर साल 'वार्षिक शुल्क' के नाम पर ₹7,000 से ₹8,000 की अवैध वसूली की जा रही है।
  • भारी-भरकम मासिक फीस: विद्यालय द्वारा पहले से ही कक्षा-अनुसार ₹1700 से लेकर ₹2400 प्रति माह ट्यूशन फीस के रूप में वसूले जाते हैं।
  • प्रधानाध्यापक का अड़ियल रवैया: अभिभावकों ने शिकायत में कहा कि जब इस अतिरिक्त शुल्क को लेकर स्कूल के प्रधानाध्यापक से बात की जाती है, तो वे अड़ियल रुख अपनाते हुए कहते हैं कि 'शुल्क तो लगेगा ही, जहां शिकायत करनी है करो।'

हजारीबाग: हजारीबाग के निजी विद्यालयों में अभिभावकों की जेब पर बढ़ते अतिरिक्त आर्थिक बोझ और स्कूल प्रशासनों की कथित मनमानी के खिलाफ अब पैरेंट्स ने मोर्चा खोल दिया है। ताजा मामला शहर के पार नाला, कुम्हारटोली स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर का है, जहां के दर्जनों मध्यम-वर्गीय अभिभावकों ने एकजुट होकर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), हजारीबाग से मुलाकात की। अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन द्वारा वार्षिक शुल्क (एनुअल चार्ज) के नाम पर की जा रही कथित अवैध वसूली और बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के विरोध में एक लिखित आवेदन सौंपा है।

“कमाई का गाढ़ा हिस्सा फीस में जा रहा, अतिरिक्त बोझ उठाने में हम असमर्थ”

जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौंपे गए पत्र में अभिभावकों ने अपनी आर्थिक लाचारी और स्कूल प्रबंधन के दबाव का विस्तार से जिक्र किया है। उनका कहना है कि वे सभी मध्यम-वर्गीय आय वाले लोग हैं और अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा पहले ही बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर रहे हैं, जिससे परिवार का जीवन-यापन मुश्किल हो जाता है।

आवेदन पत्र में स्कूल की फीस संरचना और प्रबंधन के रवैये को लेकर अभिभावकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं:

“स्कूल प्रशासन द्वारा प्रति माह ट्यूशन फीस के नाम पर कक्षा के अनुसार ₹1700 से लेकर ₹2400 तक की भारी वसूली की जाती है। हम पैरेंट्स किसी तरह हर महीने यह फीस जमा कर पाते हैं। लेकिन अब इसके अलावा ₹7-8 हजार रुपये का अतिरिक्त वार्षिक शुल्क थोप दिया गया है, जिसे देने में हम पूरी तरह असमर्थ हैं। जब इसके विरोध में प्रधानाध्यापक से बात की जाती है, तो उनका सीधा जवाब होता है कि ‘वार्षिक शुल्क लगेगा ही, आपको जहाँ शिकायत करना है कीजिये।’ विद्यालय द्वारा इस शुल्क को जमा कराने के लिए छात्रों और अभिभावकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया जा रहा है।”

उचित कार्रवाई और मनमानी लूट बंद करने की मांग

अभिभावकों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से इस गंभीर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि नियम विरुद्ध और बिना किसी ठोस आधार के वसूले जा रहे इस वार्षिक शुल्क पर तुरंत रोक लगाई जाए और मनमानी कर रहे विद्यालय प्रबंधन पर उचित कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि मध्यम-वर्गीय परिवारों को इस वित्तीय शोषण से राहत मिल सके।

इस शिकायत पत्र पर मुख्य रूप से अजय कुमार, बीरेन्द्र सिंह, संगीता गुप्ता, अकोरी राम, गुड़िया कुमारी, विक्की कुमार, अमरेश कुमार शर्मा, अवध कुमार यादव, सचिन कुमार, सुबोध कुमार यादव, सन्नी कुमार, मंटू कुमार, सुभराज वर्मा, पिंकी कुमारी, विशाल कुमार सिन्हा, बादल कुमार वर्मा और संतोषी केशरी सहित दर्जनों पीड़ित अभिभावकों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।

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