नगवा और चुरचू में लाभुकों से सीधा संवाद, बायोफ्लॉक और पर्ल क्लस्टर को बढ़ावा देने पर जोर
हजारीबाग। सरकारी योजनाओं की सफलता का आकलन सिर्फ फाइलों और आंकड़ों से नहीं, बल्कि इससे होना चाहिए कि योजनाओं से आम लोगों की जिंदगी में कितना बदलाव आया है। इसी उद्देश्य के साथ कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने हजारीबाग जिले के नगवा और चुरचू गांव का दौरा कर मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की जमीनी स्थिति की जानकारी ली।
दौरे के दौरान मंत्री ने योजनाओं से जुड़े लाभुकों से सीधे बातचीत की। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि सरकारी सहायता मिलने के बाद उनकी आय और रोजगार की स्थिति में कितना बदलाव आया है, योजनाओं के संचालन में किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और आगे उन्हें किस तरह के तकनीकी अथवा बाजार संबंधी सहयोग की जरूरत है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजना बनाकर बजट जारी करना नहीं है। वास्तविक लक्ष्य यह है कि सरकारी सहायता किसान, युवा और ग्रामीण परिवार तक पहुंचे और उसके परिणाम उनके जीवन में दिखाई दें।
बायोफ्लॉक से गांव में ही रोजगार की राह
निरीक्षण के दौरान बायोफ्लॉक योजना के लाभुकों से बातचीत करते हुए मंत्री ने मत्स्य पालन को ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
विभाग के अनुसार 25 बायोफ्लॉक टैंकों की एक इकाई स्थापित करने में करीब 25 लाख रुपये की लागत आती है। इस योजना में सरकार की ओर से 60 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। मंत्री ने लाभुकों से योजना के संचालन, उत्पादन और आय से संबंधित जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि बायोफ्लॉक जैसी तकनीक के माध्यम से युवाओं को पारंपरिक रोजगार की तलाश में बाहर जाने के बजाय अपने गांव में ही व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिल सकता है। इसके लिए योजना के साथ तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार की सुविधा उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
मोती की खेती बनी आकर्षण का केंद्र
हजारीबाग दौरे के दौरान मंत्री ने मोती की खेती का भी अवलोकन किया। जिले में विकसित हो रहे पर्ल क्लस्टर को उन्होंने मत्स्य क्षेत्र में नए प्रयोग और ग्रामीण आय के वैकल्पिक स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण बताया।
मोती की खेती के जरिए किसान पारंपरिक कृषि गतिविधियों के साथ अतिरिक्त आमदनी का जरिया तैयार कर सकते हैं। सरकार की ओर से इसके लिए प्रति यूनिट 16 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई।
मंत्री ने कहा कि हजारीबाग में मोती उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, उत्पादन के बाद बाजार उपलब्ध कराने और बेहतर विपणन व्यवस्था से जोड़ने पर काम किया जाएगा।
हजारीबाग को पर्ल फार्मिंग का मॉडल जिला बनाने पर जोर
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि सरकार का प्रयास सिर्फ योजनाओं की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि करना है। उन्होंने हजारीबाग में मोती की खेती को बड़े स्तर पर विकसित करने की दिशा में काम करने की बात कही।
उनके अनुसार यदि किसानों को तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और बाजार का उचित सहयोग मिल जाए तो मोती की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक अतिरिक्त आय के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
लाभुकों की समस्याओं को प्राथमिकता से दूर करने का निर्देश
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने विभागीय अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली और जमीनी स्तर पर नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि लाभुकों को योजना का लाभ मिलने के बाद भी यदि तकनीकी, उत्पादन या बाजार से जुड़ी समस्या आती है तो उसका समाधान विभागीय स्तर पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने किसान, युवा और ग्रामीण उद्यमियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि योजनाओं का फोकस इन्हीं वर्गों को मजबूत बनाने पर होना चाहिए।
मंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और लाभुकों से फीडबैक लेने पर भी जोर दिया, ताकि सरकारी योजनाओं और जमीन पर उनके वास्तविक परिणाम के बीच किसी तरह का अंतर न रहे।
इस दौरान मत्स्य निदेशक और जिला कृषि पदाधिकारी सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।


