हजारीबाग में भगवान भरोसे 108 एंबुलेंस सेवा, गंभीर मरीजों की जिंदगी पर संकट

संध्या न्यूज-sandhya news
6 Min Read
eaec c be edd

स्वास्थ्य विभाग के दावों की खुली पोल! बदहाल गाड़ियां, तकनीकी खामियां और चालकों के बकाया मानदेय से चरमराई आपातकालीन सेवा

हजारीबाग। गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए शुरू की गई 108 एंबुलेंस सेवा हजारीबाग जिले में सवालों के घेरे में है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों के लिए यह सेवा जीवनरक्षक मानी जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके संचालन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। कहीं एंबुलेंस तकनीकी खराबी के कारण खड़ी है तो कहीं मरीजों को वाहन मिलने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में गंभीर मरीजों के परिजनों को मजबूरी में निजी एंबुलेंस या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।

कागज पर 23 एंबुलेंस, जमीन पर कई वाहन खस्ताहाल

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले में करीब 23 एंबुलेंस संचालित होने का दावा किया जा रहा है। प्रखंडों में भी इनकी तैनाती की गई है। बड़कागांव में दो, बरकट्ठा में एक, इचाक में एक, चौपारण में तीन, पदमा में एक, दारू में एक, डाड़ी में एक, केरेडारी में एक, चुरचू में एक और बरही में एक एंबुलेंस होने की जानकारी दी गई है। वहीं, दो एंबुलेंस को मरम्मत के लिए रांची भेजे जाने की बात भी सामने आई है।

लेकिन सवाल एंबुलेंस की संख्या से ज्यादा उनकी वास्तविक परिचालन स्थिति को लेकर है। शिकायतों के मुताबिक कई वाहनों में टायर, बैटरी और ब्रेक जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी समस्याएं हैं। कुछ जगहों पर वाहनों के ठीक से स्टार्ट नहीं होने की भी बात सामने आ रही है। ऐसे में आपातकालीन सेवा के लिए उपलब्ध कराए गए वाहनों की नियमित मेंटेनेंस व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

धक्का देकर स्टार्ट करने की नौबत, ब्रेक को लेकर भी शिकायत

108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े वाहनों की बदहाल स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ वाहनों को धक्का देकर स्टार्ट करने तक की नौबत आने की शिकायत है। वहीं, कुछ एंबुलेंस में ब्रेक सिस्टम को लेकर भी परेशानी बताई जा रही है।

यदि ऐसी तकनीकी खामियों वाले वाहन मरीजों को लेकर लंबी दूरी तय करते हैं तो यह मरीज के साथ-साथ चालक और अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है। ऐसे में सभी एंबुलेंस की तकनीकी जांच और फिटनेस की स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।

मेडिकल कॉलेज से रिम्स रेफर मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी

सबसे गंभीर स्थिति शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल से रिम्स, रांची रेफर किए जाने वाले मरीजों को लेकर सामने आ रही है। परिजनों के अनुसार, मरीज को रांची रेफर किए जाने के बाद 108 एंबुलेंस के लिए कई बार संपर्क करने के बावजूद समय पर वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता।

जब इंतजार लंबा हो जाता है और मरीज की हालत गंभीर होती है, तो परिजनों के पास निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। निजी एंबुलेंस का खर्च उठाना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

आपातकालीन चिकित्सा में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एंबुलेंस उपलब्ध होने में देरी मरीज और उसके परिवार के लिए गंभीर परेशानी पैदा कर सकती है।

चालकों के मानदेय का बकाया भी बना चिंता का विषय

एंबुलेंस सेवा के संचालन से जुड़े चालकों के मानदेय के भुगतान में बकाया होने की बात भी सामने आ रही है। यदि सेवा से जुड़े कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं मिलता है तो इसका असर व्यवस्था के संचालन और कर्मचारियों के मनोबल पर पड़ सकता है।

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने केवल खराब वाहनों को दुरुस्त करने की चुनौती नहीं है, बल्कि एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना भी जरूरी है।

आखिर कहां अटक रही है जीवनरक्षक सेवा?

108 एंबुलेंस का उद्देश्य ही आपात स्थिति में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना है। लेकिन यदि वाहन उपलब्ध होने के बावजूद तकनीकी खराबियों के कारण सड़क पर नहीं उतर पा रहे हैं या जरूरत के समय मरीज को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल रही है, तो पूरी व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक हो जाती है।

स्वास्थ्य विभाग को जिले की सभी एंबुलेंस की भौतिक जांच, फिटनेस, मेंटेनेंस रिकॉर्ड, चालक की उपलब्धता और कॉल मिलने से लेकर मरीज तक पहुंचने के समय की समीक्षा करनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि समस्या वाहन की कमी है, तकनीकी खराबी है या संचालन व्यवस्था में कहीं और खामी है।

जांच और जवाबदेही से ही सुधरेगी व्यवस्था

हजारीबाग में बड़ी संख्या में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्र हैं, जहां आपातकाल में सरकारी एंबुलेंस ही मरीजों और उनके परिवारों के लिए सबसे बड़ा सहारा होती है। ऐसे में इस सेवा का सुचारु और सुरक्षित संचालन बेहद जरूरी है।

अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और खराब एंबुलेंस को दुरुस्त कराने, चालकों के बकाया भुगतान और मरीजों को समय पर सेवा उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाता है। कागजों में एंबुलेंस की संख्या बताने के बजाय जरूरत के वक्त कितनी गाड़ियां वास्तव में सड़क पर उपलब्ध हैं, यही इस पूरी व्यवस्था की असली परीक्षा है।

Share This Article
"संध्या न्यूज हजारीबाग और झारखंड की स्थानीय खबरों को कवर करने वाली एक समर्पित टीम है, जो निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता में विश्वास रखती है।"
🏠 होम 🔥 ताज़ा ख़बरें 💬 व्हाट्सएप 📺 यूट्यूब
error: Content is protected !!