हजारीबाग। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने 1 सितंबर 2026 को अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर एलआईसी के मंडल कार्यालय में बीमा कर्मचारी संघ की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। संघ के महामंत्री जगदीश चंद्र मित्तल ने एलआईसी की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि 1956 में स्थापित निगम आज देश की वित्तीय व्यवस्था का मजबूत आधार बन चुका है।
उन्होंने बताया कि एलआईसी की कुल संपत्ति 59.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। मार्च 1995 में 53,480 करोड़ रुपये का निवेश पोर्टफोलियो मार्च 2026 तक बढ़कर 51.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। एलआईसी ने बुनियादी ढांचे, आवास, सिंचाई और सड़क जैसे क्षेत्रों में करीब 40 लाख करोड़ रुपये का योगदान किया है। पिछले सात दशकों में केंद्र सरकार को लाभांश के रूप में 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक दिए गए हैं।
2025-26 में कई रिकॉर्ड
वक्ताओं के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में एलआईसी की कुल प्रीमियम आय 5,35,984 करोड़ और कुल आय 9,72,914 करोड़ रुपये रही। प्रथम वर्ष के प्रीमियम में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी 56.66 प्रतिशत रही, जबकि कुल पॉलिसियों में हिस्सेदारी 65.16 प्रतिशत बताई गई।
इस दौरान एलआईसी ने 67,676 करोड़ रुपये का नया व्यवसाय प्रीमियम हासिल किया और 1.84 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत पॉलिसियां बेचीं। इनमें 44.26 प्रतिशत पॉलिसियां मिलेनियल्स द्वारा खरीदी गईं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों से 48.05 प्रतिशत नया व्यवसाय प्रीमियम प्राप्त हुआ।
पॉलिसीधारकों के लिए 59,726 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बोनस घोषित किया गया। वहीं 253.91 लाख दावों के भुगतान में 3,12,771 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई। मृत्यु दावा निपटान अनुपात करीब 99.5 प्रतिशत रहा। एलआईसी का सॉल्वेंसी रेशियो 2.35 गुना बताया गया, जो नियामकीय सीमा 1.50 गुना से अधिक है।
IRDAI के बदलावों पर जताई चिंता
महामंत्री जगदीश चंद्र मित्तल ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े नियामकीय बदलावों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एलआईसी की 98.42 प्रतिशत पॉलिसियां और 91.75 प्रतिशत नया व्यवसाय प्रीमियम व्यक्तिगत एजेंटों के माध्यम से हासिल होता है। ऐसे में वितरण व्यवस्था में होने वाले बदलावों का सीधा प्रभाव एलआईसी के कारोबार पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र और एलआईसी को कमजोर करने वाली किसी भी कोशिश का कर्मचारी संगठन मजबूती से विरोध करेगा। साथ ही एजेंटों और पॉलिसीधारकों के बीच जागरूकता अभियान चलाकर व्यापक समर्थन जुटाने की बात कही गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयुक्त सचिव शंकर कुमार, सांगठनिक सचिव मदन कुमार पाठक, सुशील लकड़ा, सहायक सचिव दुर्गा सिंह, कोषाध्यक्ष विजय कुमार चौबे, सह कोषाध्यक्ष सुदर्शन सिंह सहित अख्तर हुसैन, बसंत कुमार, बिरसा मुंडा, राजेंद्र प्रसाद, प्रवीर राणा, निरंजन यादव, रविंद्र कुमार, अजय रविदास, रौनक भूषण और सौरभ शंकर मौजूद रहे।


