पोर्टल की गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाने वाले बस संचालक का आरोप—डेटा लॉक कर अवैध राशि मांगने की कोशिश, उच्चस्तरीय जांच की मांग
हजारीबाग। झारखंड की ऑनलाइन परिवहन व्यवस्था में कथित तकनीकी गड़बड़ी ने एक बस संचालक की परेशानी बढ़ा दी है। मामला उन दो निजी बसों से जुड़ा है, जिनका टैक्स भुगतान किए जाने का दावा संचालक ने किया है, लेकिन विभागीय ऑनलाइन पोर्टल पर संबंधित वाहनों का टैक्स रिकॉर्ड शून्य (जीरो) दिखाई दे रहा है। बस संचालक ने इस पूरे मामले की शिकायत परिवहन विभाग के वरीय अधिकारियों से करते हुए तकनीकी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
- पोर्टल की गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाने वाले बस संचालक का आरोप—डेटा लॉक कर अवैध राशि मांगने की कोशिश, उच्चस्तरीय जांच की मांग
- दो बसों का टैक्स जमा होने का दावा, पोर्टल पर रिकॉर्ड शून्य
- कंप्यूटर ऑपरेटर पर डेटा लॉक करने का आरोप
- अधिकारियों को ई-मेल से शिकायत, कार्रवाई का इंतजार
- मामला सामने आने के बाद बस संचालकों में नाराजगी
- जांच से साफ होगा तकनीकी खामी या किसी की लापरवाही?
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि पोर्टल की खामियों को लेकर आवाज उठाने के बाद उनकी परेशानियां और बढ़ गईं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
दो बसों का टैक्स जमा होने का दावा, पोर्टल पर रिकॉर्ड शून्य
शिकायत के केंद्र में WB 76-6344 और WB 76-6345 नंबर की दो बसें हैं। बस संचालक पंकज कुमार का कहना है कि दोनों वाहनों का निर्धारित टैक्स समय पर जमा किया गया है और उनके पास भुगतान से संबंधित दस्तावेज भी मौजूद हैं।
इसके बावजूद ऑनलाइन टैक्स पोर्टल पर दोनों वाहनों के संबंध में टैक्स की स्थिति जीरो प्रदर्शित हो रही है। संचालक के मुताबिक, ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक भुगतान के बीच इस अंतर के कारण उन्हें वाहन संचालन से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि यदि विभागीय रिकॉर्ड में भुगतान दर्ज है, तो उसे पोर्टल पर भी सही तरीके से प्रदर्शित किया जाना चाहिए। वहीं यदि पोर्टल पर रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ है, तो विभाग को तकनीकी स्तर पर इसकी जांच कर समस्या का समाधान करना चाहिए।
कंप्यूटर ऑपरेटर पर डेटा लॉक करने का आरोप
बस संचालक पंकज कुमार ने परिवहन सचिव को भेजी शिकायत में एक पूर्व कंप्यूटर ऑपरेटर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, उनका ऑनलाइन डेटा कथित तौर पर लॉक कर दिया गया था। संचालक का आरोप है कि इसके पीछे अवैध राशि की मांग का उद्देश्य था।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि जब उन्होंने इस कथित मांग का विरोध किया तो उनके ऑनलाइन रिकॉर्ड से जुड़ी परेशानियां और बढ़ गईं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव है।
अधिकारियों को ई-मेल से शिकायत, कार्रवाई का इंतजार
पंकज कुमार के अनुसार, उन्होंने अपनी समस्या को लेकर परिवहन विभाग के कई अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से जानकारी दी। शिकायत के साथ भुगतान से जुड़े दस्तावेज और अन्य जानकारी भी उपलब्ध कराए जाने का दावा किया गया है।
इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने का आरोप लगाया गया है। संचालक का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है।
मामला सामने आने के बाद बस संचालकों में नाराजगी
इस घटनाक्रम को लेकर बस संचालकों के बीच भी नाराजगी की बात सामने आ रही है। उनका कहना है कि ऑनलाइन टैक्स व्यवस्था में यदि भुगतान के बावजूद रिकॉर्ड अपडेट नहीं होता है, तो इसका सीधा असर वाहन मालिकों और संचालकों पर पड़ता है।
संचालकों की मांग है कि केवल व्यक्तिगत शिकायत के तौर पर मामले को देखने के बजाय परिवहन विभाग के टैक्स पोर्टल और संबंधित डेटा एंट्री प्रक्रिया की भी तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि यह पता चल सके कि रिकॉर्ड में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई।
जांच से साफ होगा तकनीकी खामी या किसी की लापरवाही?
पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यही है कि दोनों बसों का टैक्स भुगतान वास्तव में विभागीय रिकॉर्ड में किस स्थिति में दर्ज है और ऑनलाइन पोर्टल पर शून्य दिखने की वजह क्या है। साथ ही डेटा लॉक किए जाने और कथित अवैध राशि की मांग के आरोप भी जांच का विषय हैं।
बस संचालक ने उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच, दोनों वाहनों के टैक्स रिकॉर्ड को तत्काल दुरुस्त करने तथा यदि किसी स्तर पर जानबूझकर गड़बड़ी की गई है तो संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि परिवहन विभाग इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जांच के बाद इस पूरे प्रकरण की वास्तविक वजह क्या सामने आती है।


