16 प्रखंडों की शिक्षा व्यवस्था पर अधिकारियों की कमी का असर, महज 2 BEEO के भरोसे पूरा जिला

संध्या न्यूज-sandhya news
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बरकट्ठा के BEEO को 15 प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार, स्कूल निरीक्षण से लेकर विभागीय जांच तक प्रभावित; रबोध स्कूल में बच्चों को पोशाक नहीं मिलने की जांच भी लंबित

हजारीबाग। जिले की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रही है। जिले के सभी 16 प्रखंडों की शैक्षणिक व्यवस्था की निगरानी के लिए फिलहाल महज दो प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (BEEO) उपलब्ध हैं। स्थिति यह है कि इनमें से एक अधिकारी को अपने प्रखंड के अलावा 15 अन्य प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार भी संभालना पड़ रहा है।

अधिकारियों पर बढ़ते अतिरिक्त कार्यभार का सीधा असर विद्यालयों के निरीक्षण, शिक्षकों की समस्याओं के समाधान, सरकारी योजनाओं की समीक्षा और विभागीय मामलों की जांच पर पड़ने की बात सामने आ रही है। एक अधिकारी के जिम्मे इतने बड़े क्षेत्र की जिम्मेदारी होने से शिक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी करना बड़ी चुनौती बन गया है।

बरकट्ठा के BEEO के जिम्मे 15 प्रखंड

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार राकेश कुमार बरकट्ठा प्रखंड में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित हैं। इसके साथ ही उन्हें बरकट्ठा समेत जिले के 15 प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

वहीं विजय राम कटकमसांडी के BEEO हैं और फिलहाल उन्हें कटकमसांडी प्रखंड की जिम्मेदारी ही दी गई है। इस तरह जिले के 16 प्रखंडों की शिक्षा व्यवस्था के लिए दो अधिकारियों पर ही निगरानी का दायित्व है।

व्यवहारिक तौर पर एक अधिकारी के लिए 15 प्रखंडों के विद्यालयों तक नियमित पहुंचना और वहां की व्यवस्थाओं की समीक्षा करना आसान नहीं है। स्कूलों की संख्या, भौगोलिक दूरी और विभागीय बैठकों व कार्यालयी कार्यों को देखते हुए अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था की अपनी सीमाएं हैं।

स्कूलों के निरीक्षण से योजनाओं की समीक्षा तक बढ़ा दबाव

BEEO की जिम्मेदारी केवल कार्यालय में बैठकर विभागीय पत्रों का निपटारा करने तक सीमित नहीं होती। प्रखंड स्तर पर विद्यालयों का निरीक्षण, शिक्षकों की उपस्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी, स्कूलों से संबंधित शिकायतों का समाधान तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा भी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।

ऐसे में जब एक ही अधिकारी को कई प्रखंडों का प्रभार सौंप दिया जाता है तो हर विद्यालय का नियमित निरीक्षण करना मुश्किल हो जाता है। इससे विभागीय योजनाओं की जमीनी स्थिति की लगातार निगरानी और समस्याओं पर समय से कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

राकेश कुमार के अनुसार पूरे राज्य में BEEO की संख्या करीब 43 है। उन्होंने कहा कि आने वाले एक-दो वर्षों में अधिकारियों की संख्या में और कमी आने की संभावना है। ऐसे हालात में सीमित संसाधनों के बीच विभागीय कार्यों को संचालित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

रबोध स्कूल की जांच एक महीने बाद भी पूरी नहीं

अधिकारियों की कमी का असर विभागीय जांच के मामलों में भी देखने को मिल रहा है। डाड़ी प्रखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय रबोध में पहली और दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले 16 बच्चों को अब तक स्कूली पोशाक नहीं मिलने का मामला सामने आया था।

बताया गया कि बच्चों के लिए पोशाक की निर्धारित राशि लैप्स हो गई। मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला स्तर से इसे गंभीरता से लिया गया और करीब एक महीने पहले जांच का आदेश जारी किया गया। जांच के लिए एक कमेटी भी गठित की गई, जिसमें अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी और BEEO को शामिल किया गया।

हालांकि, आदेश जारी होने के लगभग एक महीने बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि अधिकारियों पर पहले से मौजूद अतिरिक्त प्रभार का असर विभागीय जांच की गति पर कितना पड़ रहा है।

अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बीच जांच और निगरानी की रफ्तार धीमी

शिक्षा विभाग में किसी शिकायत या अनियमितता की जांच समय पर पूरी होना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई की जा सके। लेकिन जब सीमित संख्या में अधिकारी कई प्रखंडों की जिम्मेदारी संभाल रहे हों, तो निरीक्षण और जांच जैसे कार्यों के लिए पर्याप्त समय निकालना चुनौती बन जाता है।

रबोध स्कूल में बच्चों को पोशाक नहीं मिलने की जांच का लंबित रहना इसी स्थिति का एक उदाहरण माना जा रहा है। हालांकि जांच लंबित रहने का एकमात्र कारण अधिकारियों की कमी है, यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन अतिरिक्त प्रभार के कारण विभागीय अधिकारियों पर काम का दबाव जरूर बढ़ा है।

पर्याप्त BEEO की जरूरत

जिले में 16 प्रखंडों की शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए प्रत्येक प्रखंड में पर्याप्त प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था जरूरी है। अधिकारियों की उपलब्धता होने से विद्यालयों का नियमित निरीक्षण, शिक्षकों की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई, योजनाओं की समीक्षा और शिकायतों की जांच बेहतर तरीके से की जा सकती है।

वर्तमान में जिस तरह एक अधिकारी को 15 प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार मिला हुआ है, उससे शिक्षा विभाग के सामने प्रशासनिक चुनौती साफ दिखाई देती है। यदि अधिकारियों की कमी जल्द दूर नहीं हुई तो आने वाले समय में विद्यालयों की नियमित निगरानी और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर इसका असर और बढ़ सकता है।

मुख्य तथ्य

  • जिले में कुल 16 प्रखंड
  • उपलब्ध BEEO की संख्या 2
  • बरकट्ठा के BEEO राकेश कुमार के पास 15 प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार
  • कटकमसांडी के BEEO विजय राम
  • राज्य में BEEO की संख्या करीब 43
  • डाड़ी के रबोध स्कूल में 16 बच्चों को पोशाक नहीं मिलने का मामला
  • पोशाक मामले की जांच का आदेश करीब एक माह पहले, जांच अब भी लंबित
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