ग्रामीणों और ट्रांसपोर्टरों ने CCL प्रबंधन से की जांच की मांग, 12 से 16 चक्का वाहनों के लिए अलग-अलग राशि वसूलने का आरोप
हजारीबाग। CCL के आम्रपाली-चंद्रगुप्त क्षेत्र की चंद्रगुप्त कोयला परियोजना में कोयला ढुलाई करने वाले वाहनों से कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों और ट्रांसपोर्टरों की ओर से CCL प्रबंधन को सौंपे गए शिकायत आवेदन में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों द्वारा अलग-अलग गांवों के नाम का इस्तेमाल कर कथित तौर पर समितियां बनाई गई हैं और इन समितियों की आड़ में ट्रक एवं हाइवा चालकों से पैसे वसूले जा रहे हैं।
- कई गांवों के नाम से समितियां बनाने का आरोप
- वाहन के पहियों के हिसाब से कथित वसूली
- निर्धारित लोडिंग शुल्क से कई गुना ज्यादा लेने का दावा
- शुशी इंफ्रा से जुड़े कोल स्टॉक की भी जांच की मांग
- अध्यक्ष-सचिव बनकर दबाव बनाने का आरोप
- CCL महाप्रबंधक को सौंपा गया शिकायत आवेदन
- शिकायत के बाद CCL प्रबंधन की कार्रवाई पर नजर
शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी समिति को ग्रामीण हित या लोडिंग व्यवस्था के नाम पर राशि लेने का अधिकार नहीं है, तो ऐसी गतिविधियों पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।
कई गांवों के नाम से समितियां बनाने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हजारीबाग जिले के पचड़ा, सिझुआ, चट्टी-बरियातू, बुकरू, भादेखाप, नावाखाप और जोरदाग समेत चतरा जिले के टंडवा प्रखंड के उड़सू गांव के नाम का इस्तेमाल कर कथित समितियां बनाई गई हैं।
ग्रामीणों और ट्रांसपोर्टरों का दावा है कि इन समितियों के पदाधिकारी या उनसे जुड़े लोग चंद्रगुप्त परियोजना में कोयला लाने-ले जाने वाले वाहनों पर कथित रूप से दबाव बनाते हैं। शिकायतकर्ताओं ने समितियों की वैधता, उनके गठन और उनके द्वारा राशि लेने के अधिकार की जांच कराने की मांग की है।
वाहन के पहियों के हिसाब से कथित वसूली
शिकायत में वाहनों के आकार के अनुसार अलग-अलग रकम लिए जाने का आरोप लगाया गया है। आवेदन में दावा किया गया है कि 12 चक्का ट्रक से करीब 2,700 रुपये, 14 चक्का वाहन से लगभग 3,000 रुपये और 16 चक्का वाहन से करीब 4,000 रुपये लिए जा रहे हैं।
वहीं, हाइवा वाहनों से 100 रुपये प्रति टन तक राशि वसूलने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, वाहन चालकों द्वारा कथित रूप से निर्धारित रकम देने से इनकार करने पर लोडिंग में बाधा डालने या वाहन को परियोजना से बाहर कर देने की धमकी दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
निर्धारित लोडिंग शुल्क से कई गुना ज्यादा लेने का दावा
शिकायत में लोडिंग शुल्क की मौजूदा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि लोडर का निर्धारित शुल्क करीब 900 रुपये है, लेकिन चंद्रगुप्त परियोजना में लोडिंग के नाम पर इससे कई गुना अधिक रकम कथित तौर पर वसूली जा रही है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि यदि अतिरिक्त राशि की वसूली किसी अधिकृत व्यवस्था के तहत नहीं हो रही है, तो इससे कोयला परिवहन से जुड़े वाहन मालिकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव बढ़ता है। इसी वजह से शिकायतकर्ताओं ने पूरे शुल्क ढांचे और राशि वसूली की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
शुशी इंफ्रा से जुड़े कोल स्टॉक की भी जांच की मांग
शिकायत में शुशी इंफ्रा से जुड़े कोल स्टॉक और परिवहन व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कोल स्टॉक और परिवहन गतिविधियों की आड़ में कथित वसूली का नेटवर्क संचालित किया जा रहा है।
हालांकि, कंपनी के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कंपनी या आरोपित पक्ष की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही आरोपों की दूसरी तरफ की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
अध्यक्ष-सचिव बनकर दबाव बनाने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ लोग खुद को अलग-अलग समितियों का अध्यक्ष या सचिव बताकर परियोजना क्षेत्र में प्रभाव कायम करने की कोशिश कर रहे हैं। आरोप है कि इन्हीं समितियों के नाम पर वाहन चालकों से राशि मांगी जाती है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि रकम देने में असहमति जताने वाले वाहन चालकों को कथित तौर पर लोडिंग या परिवहन प्रक्रिया में परेशानी का सामना करने की चेतावनी दी जाती है। ग्रामीणों और ट्रांसपोर्टरों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए पूरे नेटवर्क की पहचान करने की मांग की है।
CCL महाप्रबंधक को सौंपा गया शिकायत आवेदन
मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और प्रतिनिधियों की ओर से आम्रपाली-चंद्रगुप्त क्षेत्र के महाप्रबंधक को लिखित शिकायत सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत की प्रतियां चंद्रगुप्त परियोजना पदाधिकारी तथा शुशी इंफ्रा के प्रबंध निदेशक को भी भेजे जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ताओं ने CCL प्रबंधन से मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की है—
- परियोजना क्षेत्र में संचालित कथित समितियों की वैधता की जांच।
- समितियों के अध्यक्ष और सचिव के नाम एवं उनकी भूमिका की जांच।
- वाहनों से ली जा रही कथित राशि की पूरी जानकारी जुटाना।
- लोडिंग शुल्क और अन्य अधिकृत शुल्क की स्पष्ट जांच।
- कथित अवैध वसूली में शामिल लोगों की पहचान।
- वाहन चालकों पर दबाव या धमकी दिए जाने के आरोपों की जांच।
- दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई।
- परियोजना में कोयला परिवहन से जुड़े वाहनों से कथित अवैध वसूली पर तत्काल रोक।
शिकायत के बाद CCL प्रबंधन की कार्रवाई पर नजर
चंद्रगुप्त परियोजना जैसे महत्वपूर्ण कोयला क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को लेकर सामने आई शिकायत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन समितियों के नाम पर राशि लिए जाने का आरोप लगाया गया है, उनका गठन किस आधार पर हुआ और क्या उन्हें किसी प्रकार की राशि वसूलने की अनुमति है।
फिलहाल पूरा मामला शिकायत और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। कथित अवैध वसूली, फर्जी समितियों और धमकी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इनकी वास्तविकता CCL प्रबंधन अथवा प्रशासनिक स्तर पर होने वाली जांच के बाद ही सामने आएगी।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CCL प्रबंधन शिकायत पर किस स्तर की जांच शुरू करता है और परियोजना क्षेत्र में वाहनों से राशि वसूली की व्यवस्था को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है। यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ कोयला परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की आवश्यकता होगी।


