चट्टी बारियातु कोयला परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध तेज, बोले- एनटीपीसी को नहीं देंगे एक इंच जमीन
केरेडारी। हजारीबाग जिले के केरेडारी प्रखंड में चट्टी बारियातु कोयला परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब तेज होता जा रहा है। परियोजना के दक्षिणी हिस्से में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर करीब 11 गांवों के ग्रामीणों और रैयतों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी उपजाऊ जमीन और आजीविका से जुड़े सवालों को नजरअंदाज कर कोई भी फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इसी मुद्दे को लेकर आगामी रविवार को कृषि फार्म मैदान में महाजुटान की तैयारी है। ग्रामीणों के अनुसार, इस जुटान में बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार शामिल होंगे और आगे की आंदोलनात्मक रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।
जमीन अधिग्रहण की सुगबुगाहट से बढ़ा आक्रोश
ग्रामीणों का दावा है कि करीब 1,800 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में शामिल है। अधिसूचना की जानकारी सामने आने के बाद प्रभावित परिवारों में चिंता और आक्रोश बढ़ गया है।
किसानों का कहना है कि जमीन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि उनके परिवारों की आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का आधार है। इसलिए जमीन अधिग्रहण से पहले उनके सवालों का समाधान जरूरी है।
पहले पुराने विस्थापितों का हिसाब मांग रहे ग्रामीण
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल पुराने विस्थापित परिवारों को लेकर है। उनका कहना है कि पूर्व में परियोजनाओं के लिए जमीन देने वाले कई परिवार आज भी मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास से जुड़े मामलों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि पहले पुराने मामलों का निष्पक्ष समाधान किया जाए और प्रभावित परिवारों को उनका अधिकार मिले। इसके बाद ही नए भू-भाग के अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
16 सूत्री मांगों पर अड़े रैयत
आंदोलन से जुड़े ग्रामीणों ने 16 सूत्री मांगें रखी हैं। इनमें विस्थापन से पहले लिखित कानूनी गारंटी, उचित मुआवजा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, पुनर्वास और गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विकास जैसी मांगें शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से अब काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि विस्थापन से पहले रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
11 गांव एक मंच पर, महाजुटान पर टिकी नजर
इस आंदोलन की खास बात यह है कि 11 गांवों के ग्रामीण एक मंच पर आने की तैयारी में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के खिलाफ उनकी लड़ाई सामूहिक होगी।
महाजुटान में ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति तय करेंगे। वहीं, अब निगाह प्रशासन और परियोजना प्रबंधन के रुख पर भी है कि इस बढ़ते विरोध के बीच बातचीत और समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
ग्रामीणों का ऐलान- जमीन पर फैसला हमारा
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि वे अपनी जमीन और अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। “एक इंच जमीन नहीं देंगे” का उनका ऐलान अब आंदोलन का प्रमुख नारा बनता जा रहा है।
फिलहाल रविवार को होने वाले महाजुटान को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की भी नजर बनी हुई है। इस जुटान के बाद आंदोलन किस दिशा में जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।


