शिल्पी नेहा तिर्की का तीखा हमला—जनता के वोट से जीतकर दिल्ली में बैठे हैं, फिर झारखंड के हक पर आवाज क्यों नहीं?
हजारीबाग। हजारीबाग की बदहाल सड़कों को लेकर पत्रकारों के सवाल पर कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सीधे तौर पर स्थानीय सांसद और विधायकों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए। हजारीबाग परिसदन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सड़क की समस्या पर पूछे गए सवाल के बाद मंत्री ने कहा कि जनता ने अपने प्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है, इसलिए जनता के अधिकार और क्षेत्र की समस्याओं को लेकर आवाज उठाना भी उनकी जिम्मेदारी है।
सड़क की बदहाली पर सवाल, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर पलटवार
पत्रकारों ने मंत्री के सामने हजारीबाग की सड़कों की बदहाल स्थिति का मुद्दा रखा। सड़कें खराब हैं, जगह-जगह परेशानी है और आम लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने बात को सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर ही सवाल खड़ा कर दिया।
उनका कहना था कि जनता अपने सांसद और विधायक को वोट देकर सदन तक भेजती है। ऐसे में जब राज्य और जनता के अधिकार से जुड़ा कोई बड़ा मुद्दा सामने आता है तो चुने हुए प्रतिनिधियों को जनता की आवाज बनना चाहिए।
“अपने आलाकमान के सामने चुप क्यों?”
मंत्री ने केंद्र की नीतियों और राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर हजारीबाग के भाजपा सांसद और विधायकों की चुप्पी पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जब झारखंड के हित प्रभावित होने की बात सामने आ रही है, तब यहां के चुने हुए जनप्रतिनिधि अपनी आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं?
मंत्री के बयान का सीधा निशाना भाजपा के उन जनप्रतिनिधियों पर रहा, जो हजारीबाग से चुनकर संसद और विधानसभा तक पहुंचे हैं।
MMDR संशोधन पर ₹22 हजार करोड़ नुकसान का दावा
मंत्री ने बातचीत के दौरान MMDR बिल में संशोधन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस संशोधन के कारण झारखंड को लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और ऐसे में राज्य के आर्थिक हितों से जुड़े फैसलों पर जनप्रतिनिधियों को भी आवाज उठानी चाहिए।
यह पैसा मिलता तो शिक्षा, अस्पताल और सड़क पर खर्च होता
मंत्री ने कहा कि अगर यह राशि झारखंड के हिस्से में आती तो इसका इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण और मंईयां सम्मान योजना जैसी योजनाओं में किया जा सकता था।
उनके मुताबिक राज्य की जनता पहले से ही आर्थिक दबाव और महंगाई जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे समय में राज्य के राजस्व को प्रभावित करने वाले फैसले का असर सीधे जनता पर पड़ता है।
परिसीमन पर भी झारखंड के अधिकार की बात
परिसीमन के सवाल पर मंत्री ने इसे झारखंड के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों और आदिवासी प्रतिनिधित्व की सुरक्षा जरूरी है।
मंत्री ने हाल में मोरहाबादी मैदान में हुए बड़े जनसमागम का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड की आवाज और चिंता को दिल्ली तक पहुंचाया गया है।
मंत्री के बयान ने खड़ा किया सियासी सवाल
हजारीबाग की सड़क से शुरू हुई पत्रकारों की बातचीत में मंत्री ने सड़क की समस्या के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को मुद्दा बना दिया। इसके बाद MMDR संशोधन और परिसीमन जैसे बड़े सवालों पर भी उन्होंने केंद्र की नीतियों पर अपना पक्ष रखा।
अब मंत्री के इस तीखे बयान के बाद हजारीबाग के सांसद और विधायकों की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी। सवाल यही है कि जिस जनता ने उन्हें चुनकर सदन तक भेजा, उसके सवालों और झारखंड के अधिकारों पर वे क्या रुख अपनाते हैं।


