NTPC माइनिंग ने जारी की आम सूचना, खाता-प्लॉट से लेकर अधिग्रहित रकबे तक का ब्योरा सामने आया; अब दस्तावेज सत्यापन की तैयारी
हजारीबाग/बड़कागांव। चट्टी बारियातु कोयला खनन परियोजना से जुड़ी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। NTPC माइनिंग लिमिटेड की ओर से 30 अगस्त 2026 को आम सूचना प्रकाशित कर परियोजना के तहत आने वाली जमीन से संबंधित रैयतों और भू-अभिलेखों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक किया गया है। आम सूचना में क्रम संख्या 1 से 110 तक भूमि संबंधी प्रविष्टियां दर्ज हैं, जबकि सूचीबद्ध जमीन का कुल रकबा 26.514810 एकड़ बताया गया है।
प्रकाशित सूचना में संबंधित रैयतों के नाम, पिता या पति का नाम, खाता संख्या, प्लॉट संख्या, भूमि का विवरण और अधिग्रहित रकबे की जानकारी दी गई है। कई प्रविष्टियों में एक से अधिक प्लॉट भी शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि परियोजना से जुड़े पुराने भूमि-अधिग्रहण रिकॉर्ड को अब दावों और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में आगे बढ़ाया जा रहा है।
110 प्रविष्टियों में खुला जमीन का रिकॉर्ड
आम सूचना में क्रम संख्या 1 से 110 तक जमीन से संबंधित विवरण दर्ज किए गए हैं। प्रत्येक प्रविष्टि में संबंधित रैयत की पहचान के साथ खाता और प्लॉट संख्या दी गई है। इसके अलावा संबंधित भूमि का अधिग्रहित रकबा भी दर्ज है। सूची में जोरदाग समेत चट्टी बारियातु कोयला परियोजना से जुड़े क्षेत्रों की जमीन का विवरण शामिल है।
रैयतों के लिए यह सूचना इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अब वे सार्वजनिक किए गए रिकॉर्ड में अपने नाम, खाता संख्या, प्लॉट संख्या और रकबे का मिलान अपने मूल भू-अभिलेखों से कर सकते हैं।
26.514810 एकड़ जमीन का ब्योरा सार्वजनिक
आम सूचना में सूचीबद्ध जमीन का कुल रकबा 26.514810 एकड़ दर्ज किया गया है। यानी करीब 26.51 एकड़ भूमि से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक किए गए हैं। खास बात यह है कि सूचना में केवल कुल रकबा ही नहीं, बल्कि अलग-अलग रैयतों से संबंधित खाता, प्लॉट और भूमि विवरण भी उपलब्ध कराया गया है।
इस लिहाज से यह सूचना केवल सामान्य जानकारी नहीं है, बल्कि संबंधित जमीनों की पहचान और आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज बन जाती है।
2008-09 से जुड़ी है अधिग्रहण की कहानी
आम सूचना में कोयला धारण क्षेत्र (अर्जन और विकास) अधिनियम, 1957 के तहत जारी पूर्व अधिसूचनाओं का भी उल्लेख किया गया है। इसमें 24 जून 2008 की अधिसूचना संख्या 1822 और 31 मार्च 2009 के राजपत्र संख्या 668 का संदर्भ दिया गया है।
इससे स्पष्ट है कि चट्टी बारियातु परियोजना से जुड़ी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया कोई नई कवायद नहीं है। पुरानी वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर अब संबंधित भू-अभिलेखों और दावों को आगे बढ़ाने की कार्रवाई होती दिख रही है।
रैयतों से दस्तावेज के साथ उपस्थित होने की अपील
NTPC माइनिंग लिमिटेड की ओर से जारी आम सूचना में संबंधित रैयतों से आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित कार्यालय में उपस्थित होकर अपने दावे और अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य जमीन पर अधिकार रखने वाले व्यक्तियों के दावों और सरकारी रिकॉर्ड का मिलान कर आगे की कार्रवाई करना है।
ऐसे में सूची में नाम दर्ज रैयतों के लिए अपने खाता, प्लॉट, रकबा और अन्य भू-अभिलेखों का मिलान करना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही सूचना के अनुसार मांगे गए दस्तावेज निर्धारित प्रक्रिया के तहत जमा करने होंगे।
जमीन का रिकॉर्ड सामने आने से बढ़ी सक्रियता
चट्टी बारियातु कोयला परियोजना क्षेत्र में जमीन और विस्थापन का मुद्दा पहले से ही ग्रामीणों के बीच महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में 26.51 एकड़ भूमि से संबंधित 110 प्रविष्टियों को सार्वजनिक किए जाने के बाद संबंधित रैयतों के बीच सक्रियता बढ़ने की संभावना है।
आम सूचना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संबंधित भूमि, रैयत का नाम, खाता-प्लॉट संख्या और अधिग्रहित क्षेत्रफल अब सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन गया है। इसके बाद वास्तविक रैयतों के दावों और सरकारी अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
अब दस्तावेजों की जांच पर टिकी नजर
आम सूचना के प्रकाशन के बाद अब संबंधित रैयतों की ओर से दस्तावेज प्रस्तुत करने और रिकॉर्ड के सत्यापन का चरण महत्वपूर्ण होगा। दावों और अभिलेखों की जांच के बाद भूमि अधिग्रहण से जुड़ी आगे की प्रशासनिक कार्रवाई बढ़ सकती है।
यानी चट्टी बारियातु परियोजना में 26.514810 एकड़ जमीन से जुड़े 110 रिकॉर्ड का सार्वजनिक होना सिर्फ एक सूचना नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के एक और महत्वपूर्ण पड़ाव का संकेत है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि दस्तावेज सत्यापन के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।


