दिन में खुलेआम उठाव, रात में तेज हो जाता है कारोबार; चौपारण से बड़कागांव, बरही और बरकट्ठा तक अवैध बालू उठाव की शिकायतें
हजारीबाग। जिले की नदियों में बालू के अवैध कारोबार का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई और वाहनों की जब्ती के बावजूद जिले के कई प्रखंडों में अवैध बालू उत्खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के अनुसार जिले में प्रतिदिन करीब 40 हजार सीएफटी बालू अवैध रूप से निकाले और परिवहन किए जाने का अनुमान है। यदि इस आंकड़े को महीने के हिसाब से देखा जाए तो करीब 9 लाख से 12 लाख सीएफटी तक बालू अवैध कारोबार की भेंट चढ़ने का दावा किया जा रहा है। इससे सरकारी राजस्व को हर महीने लाखों रुपये के संभावित नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
दिन में रेत उठ रही, रात में बढ़ जाता है खेल
चौपारण, बड़कागांव, बरही, पदमा, केरेडारी और बरकट्ठा प्रखंडों से बालू के अवैध उत्खनन और परिवहन की शिकायतें सामने आती रही हैं। ढाढ़र, बराकर, इटखोरी तथा भलुआ-महाने नदी के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर बालू उठाव किए जाने की बात कही जा रही है।
चौपारण क्षेत्र में भगहर पंचायत की ढाढ़र नदी, हजारीधमना और पेठादेरी क्षेत्र की बराकर नदी तथा चोरदाहा-भलुआ के समीप महाने नदी के इलाकों में अवैध बालू उठाव ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर दिन के उजाले में ही ट्रैक्टरों से बालू उठाया जाता है, जबकि देर रात से अहले सुबह तक गतिविधियां और तेज हो जाती हैं।
300 से 400 ट्रैक्टरों की आवाजाही का दावा
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार विभिन्न नदी घाटों से प्रतिदिन करीब 300 से 400 ट्रैक्टर बालू ढोने में लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। लगातार उत्खनन से नदी घाटों की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होने के साथ पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
वहीं, अवैध परिवहन में लगे वाहनों की लगातार आवाजाही से ग्रामीण सड़कों पर दबाव बढ़ रहा है। इससे सड़क क्षतिग्रस्त होने और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
बालू घाटों की नीलामी नहीं होने का फायदा उठा रहे कारोबारी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से कई बालू घाटों की नियमानुसार नीलामी नहीं होने के कारण लोगों को सरकारी दर पर आसानी से बालू उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर निर्माण कार्यों के लिए बालू की मांग लगातार बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार वैध आपूर्ति व्यवस्था कमजोर होने और मांग बनी रहने के बीच पैदा हुए अंतर का फायदा अवैध कारोबारी उठा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से घाटवार स्थिति और नीलामी प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
सिर्फ छापेमारी से नहीं रुकेगा खेल, स्थायी व्यवस्था की मांग
क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों का कहना है कि केवल छापेमारी और वाहनों की जब्ती से बालू के अवैध कारोबार पर स्थायी रोक नहीं लग सकती। उन्होंने नियमानुसार बालू घाटों की नीलामी कर वैध आपूर्ति व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
इसके अलावा प्रमुख परिवहन मार्गों पर स्थायी जांच चौकी स्थापित करने, नदी घाटों की नियमित निगरानी बढ़ाने और अवैध उत्खनन तथा परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावी कार्रवाई होने से एक तरफ सरकारी राजस्व के संभावित नुकसान को रोका जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर नदियों और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
प्रशासन का दावा- अवैध बालू कारोबार पर लगातार कार्रवाई
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि अवैध बालू उत्खनन और परिवहन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है और अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी परिस्थिति में अवैध बालू तस्करी की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अब सवाल यह है कि जब रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टरों की आवाजाही और हजारों सीएफटी बालू के अवैध उठाव की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो नदियों से हो रहे इस कथित बड़े पैमाने के दोहन पर स्थायी रोक कब लगेगी?


