संध्या न्यूज ब्यूरो / हजारीबाग: क्या किसी वीआईपी या देश के सांसद को दिया जाने वाला आमंत्रण पत्र बिना महंगे कागज, प्लास्टिक कोटिंग या चमकीले लिफाफे के भी बेहद खास हो सकता है? हजारीबाग में हूल दिवस के मौके पर एक ऐसी ही अद्भुत और पर्यावरण को नई जिंदगी देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने आधुनिकता की चकाचौंध के बीच पूरी दुनिया को प्रकृति से जुड़ने का एक बेहद अनूठा संदेश दिया है। हूल दिवस के पावन अवसर पर खोड़ाहार आदिवासी समाज ने अपनी गौरवशाली परंपरा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा संगम पेश किया है।
सांसद प्रतिनिधि रंजीत चन्द्रवंशी की प्रेरणा और विशेष पहल पर आदिवासी समाज के सचिव व पदाधिकारी सुनील टोप्पो ने हजारीबाग के लोकप्रिय सांसद मनीष जयसवाल को सागवान के एक हरे-भरे पत्ते पर लिखकर पारंपरिक आमंत्रण पत्र भेंट किया। समाज ने इस अनूठे ‘प्राकृतिक पत्र’ के जरिए सांसद को 30 जून (मंगलवार) को आयोजित होने वाले हूल दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का सादर निमंत्रण दिया है।
औपचारिक कार्ड नहीं, यह तो प्रकृति के प्रति अटूट आस्था का दस्तावेज है
आज के दौर में जहां छोटे से छोटे कार्यक्रमों के लिए भी धड़ल्ले से भारी मात्रा में कागज और रसायनों से सजे कार्ड छपवाए जाते हैं, वहीं सागवान के पत्ते पर लिखा गया यह निमंत्रण केवल एक औपचारिकता नहीं था। यह इस बात का जीता-जागता प्रमाण था कि बिना पेड़ों को काटे और बिना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए भी हम अपने सबसे महत्वपूर्ण संदेशों को पूरी गरिमा के साथ दूसरों तक पहुंचा सकते हैं।
इस बेहद खास और पारंपरिक आमंत्रण पत्र को स्वीकार करते हुए हजारीबाग सांसद मनीष जयसवाल भावुक हो उठे। उन्होंने इस पहल की खुले मन से और भूरि-भूरि सराहना करते हुए कहा कि हमारा आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और जमीन का सच्चा रक्षक रहा है। उनकी रोजमर्रा की जीवनशैली में पर्यावरण के प्रति जो गहरी समझ, आदर और संवेदनशीलता दिखाई देती है, वह आज ग्लोबल वार्मिंग से जूझ रहे पूरे आधुनिक समाज के लिए एक महान प्रेरणा है।
“पारंपरिक जीवनशैली की ओर लौटें, तभी सुरक्षित रहेगा हमारा भविष्य”
सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने वाले इस प्रयास पर बात करते हुए श्री जयसवाल ने कहा कि वर्तमान समय में जब पर्यावरण असंतुलन पूरी दुनिया के सामने एक विकराल समस्या बनता जा रहा है, ऐसे में हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना ही होगा। सागवान के पत्ते पर आमंत्रण देना भले ही एक छोटा सा प्रयास दिखे, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश बहुत बड़ा, गहरा और दूरगामी है।
यदि हम अपनी रोजमर्रा की आदतों में इस पारंपरिक जीवनशैली को स्थान देना शुरू कर दें, तो जंगलों पर इंसानी लालच का दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। सागवान के पत्ते पर आमंत्रण लिखने की यह गौरवशाली परंपरा न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान को जिंदा रखती है, बल्कि कागज की अंधाधुंध खपत को घटाकर हजारों पेड़ों को असमय कटने से भी बचाती है।
सांसद मनीष जयसवाल की आम जनता से अपील: कागज का फिजूलखर्च रोकें
इस ऐतिहासिक हूल दिवस की पूर्व संध्या पर सांसद श्री जयसवाल ने हजारीबाग समेत पूरे देश के नागरिकों से एक बेहद मार्मिक अपील की है। उन्होंने कहा कि हम सभी को अपने घरों, कार्यालयों और सामाजिक आयोजनों में कागज के अनावश्यक उपयोग से पूरी तरह बचना चाहिए। जहां भी संभव हो, हमें प्रकृति द्वारा दिए गए जैविक और प्राकृतिक विकल्पों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हमारा समाज सामूहिक रूप से ऐसे छोटे और संवेदनशील कदम उठाना शुरू कर दे, तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। सांसद ने इस अनूठे और पवित्र आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए हूल दिवस कार्यक्रम में उपस्थित रहने की अपनी पूर्ण सहमति दी है।


