सीएए (CAA) के तहत नागरिकता के लिए कट-ऑफ साल बढ़कर हुआ 31 दिसंबर 2024: विधायक डॉ. राजदीप रॉय

'बराक उपत्यका बंग साहित्य सम्मेलन' के 50वें वर्षगांठ समारोह में बोले सिलचर के विधायक— 'प्रचार की कमी से लोगों में रहा डर, प्रताड़ितों को नागरिकता देने के लिए मोदी सरकार प्रतिबद्ध'

संध्या न्यूज-sandhya news
5 Min Read

सिलचर: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। सिलचर के विधायक डॉ. राजदीप रॉय ने घोषणा की है कि भारत में आने और उसके बाद बिना किसी वैध दस्तावेज़ के रहने के लिए कट-ऑफ साल को बढ़ाकर अब 31 दिसंबर, 2024 कर दिया गया है।

डॉ. रॉय रविवार को बंग भवन में आयोजित ‘बराक उपत्यका बंग साहित्य सम्मेलन’ (BUBSS) की 50वीं वर्षगांठ के साल भर चलने वाले भव्य उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार उन सभी योग्य लोगों को भारतीय नागरिकता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो तीन पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान) में धार्मिक रूप से प्रताड़ित रहे हैं।

प्रचार की कमी के कारण आवेदकों में रहा डर: डॉ. राजदीप रॉय

समारोह में बोलते हुए विधायक डॉ. राजदीप रॉय ने इस बात को स्वीकार किया कि अब तक CAA के ज़रिए बहुत कम लोगों को ही नागरिकता मिल सकी है। उन्होंने इसके पीछे का मुख्य कारण ‘प्रचार की कमी’ को बताया।

“उचित प्रचार-प्रसार न होने के कारण शरणार्थियों के मन में आवेदन करने से जुड़ी संभावित समस्याओं और कानूनी पेचीदगियों का डर बना रहा, जिसे दूर नहीं किया जा सका। लेकिन मैं आश्वस्त करना चाहता हूँ कि अगर कोई व्यक्ति वास्तव में पड़ोसी देश में प्रताड़ित हुआ है, तो भारत सरकार उसकी नागरिकता को लेकर कोई सवाल नहीं उठाएगी।”

डॉ. राजदीप रॉय, विधायक (सिलचर)

भाषा शहीदों का सम्मान और BUBSS के लिए ‘कॉर्पस फंड’ का आश्वासन

विधायक डॉ. रॉय ने अपने संबोधन में असम की क्षेत्रीय राजनीति और संस्कृति पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने बराक घाटी के उन भाषा शहीदों का हमेशा दिल से सम्मान किया है, जिन्होंने साल 1961 के ऐतिहासिक भाषा आंदोलन में अपनी मातृभाषा की रक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी।

पिछले कुछ वर्षों की तरह इस बार राज्य सरकार से वित्तीय सहायता (आर्थिक मदद) न मिलने को लेकर ‘बराक उपत्यका बंग साहित्य सम्मेलन’ (BUBSS) की नाराज़गी पर विधायक ने सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने मंच से आश्वासन दिया कि वह बराक घाटी के सभी साथी विधायकों के साथ मिलकर इस विषय पर मुख्यमंत्री से सीधे बात करेंगे, ताकि घाटी के इस प्रमुख और गौरवशाली संगठन की गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक स्थायी ‘कॉर्पस फंड’ (बड़ी राशि का फंड) बनाया जा सके।

1977 से भाषाई और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा कर रहा है संगठन

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कर रहे BUBSS के अध्यक्ष सतु रॉय ने संगठन के समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि साल 1977 में स्थापित यह मंच अब अपने गौरवमयी 50वें साल में प्रवेश कर चुका है।

अध्यक्ष सतु रॉय ने मुख्य बातें कहीं:

  • अखंड भाईचारा: हालांकि इस मंच का निर्माण 1977 में बंगालियों की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए किया गया था, लेकिन BUBSS ने हमेशा से ही दूसरे सभी भाषाई समुदायों के साथ आपसी भाईचारे और सौहार्द में विश्वास रखा है।

  • प्रतिनिधियों से अपील: उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद सभी चुने हुए जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे असम विधानसभा में इस मुद्दे को पूरी मजबूती से उठाएं ताकि भाषा शहीदों को राष्ट्रीय स्तर पर उचित और सम्मानजनक स्थान मिल सके।

भव्य समारोह में जुटे प्रबुद्ध जन

रविवार को बंग भवन में आयोजित इस साल भर चलने वाले स्वर्ण जयंती समारोह के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर त्रिपुरा के जाने-माने कवि और त्रिपुरा शिक्षा परिषद व त्रिपुरा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मिहिर कांति देब विशेष रूप से शामिल हुए। कार्यक्रम में बराक घाटी के कई बुद्धिजीवी, साहित्यकार और भारी संख्या में सांस्कृतिक कर्मी मौजूद रहे, जिससे पूरा माहौल उत्सवमय बना रहा।

Share This Article
"संध्या न्यूज हजारीबाग और झारखंड की स्थानीय खबरों को कवर करने वाली एक समर्पित टीम है, जो निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता में विश्वास रखती है।"
Leave a Comment
🏠 होम 🔥 ताज़ा ख़बरें 💬 व्हाट्सएप 📺 यूट्यूब
error: Content is protected !!