JPSC 14वीं परीक्षा के विरोध में हजारीबाग की सड़कों पर उतरा छात्रों का सैलाब; ‘सिर पर कफ़न’ बांधकर मटवारी गांधी मैदान से निकाला मशाल जुलूस

संध्या न्यूज-sandhya news
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“साल बदलता रहा, हुक्मरान बदलते रहे… लेकिन झारखंड के प्रतियोगी छात्रों की तकदीर और सूबे की बदहाल परीक्षा प्रणाली के हालात नहीं बदले।” झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) एक बार फिर विवादों के उसी पुराने और बदबूदार दलदल में धंस चुका है, जहां से हर बार प्रदेश के लाखों नौजवानों का भविष्य अंधकार में डूब जाता है। JPSC 14वीं परीक्षा के परिणाम में हुई कथित घोर अनियमितता, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ बुधवार, 8 जुलाई 2026 की शाम हजारीबाग की सड़कें आक्रोश के बारूद से दहक उठीं। ‘हजारीबाग छात्र युवा अधिकार संघ’ के बैनर तले सैकड़ों छात्र अपने “सिर पर कफ़न बांधकर” और हाथों में जलती हुई मशालें लेकर सड़कों पर निकल पड़े। ‘जय झारखंड’ के गगनभेदी नारों और व्यवस्था के खिलाफ ‘हाय-हाय’ की गूंज से पूरा हजारीबाग शहर सन्न रह गया। यह मशाल जुलूस शाम ठीक 6:00 बजे शहर के ऐतिहासिक मटवारी गांधी मैदान से शुरू हुआ, जो विभिन्न चौक-चौराहों से गुजरते हुए एक बड़े जनाक्रोश आंदोलन में तब्दील हो गया।

जिला परिषद चौक पर फूटा गुस्सा, सीएम हेमंत सोरेन का पुतला दहन

मशाल जुलूस में शामिल आक्रोशित छात्र-छात्राओं के निशाने पर सीधे सूबे की सरकार और जेपीएससी प्रबंधन था। मार्च के दौरान छात्रों ने “हेमंत सोरेन मुर्दाबाद”, “JPSC के भ्रष्ट अधिकारी मुर्दाबाद”, “14वीं JPSC परीक्षा रद्द करो-रद्द करो” और “झारखंड के छात्रों के भविष्य से खेलना बंद करो” जैसे गगनभेदी नारे लगाए।

यह जुलूस जब शहर के व्यस्त जिला परिषद चौक पर पहुंचा, तो वहां छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। छात्रों ने बीच सड़क पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और जेपीएससी के अधिकारियों का पुतला दहन कर अपना कड़ा प्रतिवाद दर्ज कराया। इस दौरान जिला परिषद चौक पर काफी देर तक आवागमन बाधित रहा और चारों तरफ सिर्फ छात्रों का आक्रोश दिखाई दे रहा था। छात्र युवा अधिकार संघ के पदाधिकारियों ने दो टूक कहा कि इस परीक्षा के परिणाम में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार हुआ है, जिसने पूरी मेधा (मेरिट) का गला घोंट दिया है। जब तक इस परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी जांच नहीं कराई जाती, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

“35 लाख का रेट तय है, एग्जाम से पहले आते हैं कॉल”—छात्रों का सनसनीखेज दावा

आंदोलन की कमान संभाल रहे छात्र नेताओं ने मीडिया के कैमरों के सामने झारखंड की परीक्षा प्रणाली की कलई खोलकर रख दी। एक छात्र प्रतिनिधि ने रुंधे गले और आक्रोशित लहजे में कहा:

“पूरा झारखंड आज चिल्ला-चिल्ला कर जान रहा है कि यहाँ नौकरियों का रेट कैसे तय होता है। जो भी छात्र आज हमें देख रहे हैं, वो अपनी अंतरात्मा से पूछें कि क्या एग्जाम देने से पहले उनके पास सेटिंग के लिए कॉल आता है कि नहीं आता है? आज वही गरीब और होनहार छात्र दिन-रात लाइब्रेरी में बैठकर अपनी आंखें फोड़ रहा है, जिसके पास सेटिंग के लिए 15 लाख, 25 लाख या 35 लाख रुपये नहीं हैं। यह गंदा फिनोमिना अब झारखंड में बंद करना होगा।”

छात्रों ने सीधे तौर पर जेपीएससी अध्यक्ष और अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो रेगुलर बहाली निकाली गई है, उसे तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और पूरी तरह से पारदर्शी एवं साफ-सुथरे ढंग से दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए।

“बड़ी-बड़ी बातों से नहीं बचेगा भविष्य, उम्र खत्म हुई तो कहाँ से लाएंगे?”

छात्र युवा अधिकार संघ ने जिला प्रशासन और सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि झारखंड के वीर सपूतों की इस पावन भूमि पर युवाओं का भविष्य खोखला किया जा रहा है। सरकार में बैठे लोग सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और मंचों से खोखला आश्वासन देते हैं, लेकिन क्या आश्वासन देने से नौजवानों का भविष्य और उनका कीमती समय वापस आ जाएगा?

छात्रों का सबसे बड़ा दर्द उनकी उम्र सीमा को लेकर था। आंदोलनकारियों ने कहा कि एक छात्र अपनी जिंदगी के 5 से 6 साल एक परीक्षा की तैयारी में खपा देता है। अगर भ्रष्टाचार के कारण नियुक्तियां लटकी रहीं या गलत लोगों का चयन होता रहा, तो छात्रों की उम्र सीमा एक बार खत्म होने के बाद वापस लौटकर नहीं आएगी। जब उम्र ही खत्म हो जाएगी, तो वो सरकारी नौकरी की पात्रता ही खो देंगे। ऐसे में उनके बूढ़े माता-पिता के सपने और उनका खुद का भविष्य हमेशा के लिए काल के गाल में समा जाएगा।

यह तो सिर्फ झांकी है, अब मुख्यमंत्री कार्यालय और JPSC दफ्तर का होगा घेराव

हजारीबाग और राजधानी रांची में एक साथ भड़की इस आंदोलन की चिंगारी को लेकर छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि यह विरोध प्रदर्शन तो सिर्फ एक शुरुआत है। छात्र नेताओं ने कहा कि हजारीबाग के जिला परिषद चौक पर हुआ यह पुतला दहन और मशाल जुलूस महज एक ‘सांकेतिक’ (Symbolic) चेतावनी है। अगर सरकार ने हठधर्मिता नहीं छोड़ी और 14वीं जेपीएससी को रद्द कर निष्पक्ष जांच के आदेश नहीं दिए, तो झारखंड के हजारों छात्र बहुत जल्द रांची कूच करेंगे। इसके बाद सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और जेपीएससी मुख्यालय का अनिश्चितकालीन घेराव किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की होगी।

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