जंतर-मंतर पर युवाओं के आंदोलन को खतियानी परिवार का नैतिक समर्थन

पुलिसिया लाठीचार्ज और बर्बरता की उच्चस्तरीय जांच की मांग; केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम बोले— देश की रीढ़ है शिक्षा, बंद सरकारी स्कूल तुरंत खोले सरकार

संध्या न्यूज-sandhya news
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खतियानी परिवार

हजारीबाग। देश की राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियों, धांधली और पेपर लीक के खिलाफ पिछले कई दिनों से युवाओं का उग्र और शांतिपूर्ण आंदोलन जारी है। इस आंदोलन की गूंज अब देश के अलग-अलग राज्यों और जिलों में भी साफ सुनाई देने लगी है। इसी कड़ी में झारखंड के हजारीबाग जिले में स्थित पुराना धरना स्थल के समीप ‘खतियानी परिवार’ की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत साप्ताहिक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता महेश विश्वकर्मा ने की, जबकि पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व संगठन के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने किया।

बैठक में मौजूद सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने एक स्वर में दिल्ली में आंदोलनरत छात्र-छात्राओं की मांगों का जोरदार समर्थन किया और कहा कि खतियानी परिवार इस लड़ाई में पूरी मजबूती के साथ देश के युवाओं के पीछे खड़ा है। वक्ताओं ने दिल्ली पुलिस द्वारा आंदोलनकारी छात्रों पर किए गए बल प्रयोग और बर्बर लाठीचार्ज की तीव्र शब्दों में घोर निंदा की।

पेपर लीक से युवाओं का भविष्य अंधकारमय, सरकार दे मुआवजा और मंत्री दें इस्तीफा

बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने देश की वर्तमान परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्षों तक दिन-रात एक करके कड़ी मेहनत करता है, अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए भूखा-प्यासा रहकर पढ़ाई करता है। लेकिन जब परीक्षा का समय आता है या परिणाम आने वाला होता है, तो अचानक पेपर लीक की खबर सामने आ जाती है। इस एक घटना से लाखों युवाओं का भविष्य पल भर में अंधकारमय हो जाता है।

वक्ताओं ने बेहद दुख व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षा धांधली और पेपर लीक से निराश होकर देश के कई होनहार छात्रों ने लाचार होकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। सरकार को ऐसे सभी मृतक छात्रों के परिजनों की सुध लेनी चाहिए और उनके परिवारों को तत्काल उचित आर्थिक मुआवजा देना चाहिए।

इसके साथ ही, खतियानी परिवार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में आए इस बड़े संकट और लगातार हो रहे पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

छात्र-छात्राओं पर पुलिसिया बर्बरता की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग

बैठक के दौरान जंतर-मंतर पर आंदोलन को कुचलने के लिए अपनाए गए हथकंडों पर भी गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अपने हक और अधिकार के लिए आवाज उठा रहे निर्दोष युवाओं पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाईं। आंदोलन में शामिल युवतियों और छात्राओं के साथ मारपीट की गई और उन्हें प्रताड़ित किया गया।

संगठन के नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में अपनी मांगों को रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। आंदोलन को दबाने के लिए की गई इस पुलिसिया कार्रवाई और बर्बरता की किसी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए ताकि दोषी पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।

“युवाओं के हक की लड़ाई में अब माता-पिता और पूरा देश खड़ा”

खतियानी परिवार की इस बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि अब यह आंदोलन सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है। लगातार हो रही धांधलियों से युवाओं की अंतरात्मा जीते जी मर जाती है, जिसके कारण वे मजबूर होकर सड़कों पर उतरते हैं।

शासन द्वारा आंदोलन को कुचलने की जितनी साजिशें रची जा रही हैं, जनता का आक्रोश घटने के बजाय और तीव्र होता जा रहा है। स्थिति यह है कि अब बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए उनके माता-पिता भी सड़कों पर उतरकर कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों से लेकर तमाम सामाजिक संगठन भी युवाओं के समर्थन में खुलकर मैदान में आ चुके हैं।

शिक्षा देश की रीढ़, बंद सरकारी स्कूलों को तुरंत खोले सरकार: मोहम्मद हकीम

खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने अपने विस्तृत वक्तव्य में कहा कि किसी भी देश का वास्तविक भविष्य उसकी युवा शक्ति पर निर्भर करता है और शिक्षा उस देश की रीढ़ की हड्डी होती है। बिना एक मजबूत, निष्पक्ष और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था के कोई भी राष्ट्र प्रगति के पथ पर आगे नहीं बढ़ सकता।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से पुरजोर मांग की कि देशभर में बंद किए गए सैकड़ों सरकारी प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों को अविलंब पुन: चालू किया जाए और पूरे देश में शिक्षा प्रणाली को पूरी तरह से मुफ्त और सुलभ बनाया जाए। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए सलाह दी कि आंदोलनरत युवाओं के साथ दमनकारी नीति अपनाने के बजाय संवेदनशीलता और नरमी से बात की जाए और उनकी समस्याओं का त्वरित व स्थायी समाधान निकाला जाए।

घटनाक्रम और मुख्य मांगों का संक्षिप्त विवरण

विवरण का क्षेत्रमुख्य बिंदु / सरकार से मांग
आयोजन स्थलपुराना धरना स्थल के समीप, हजारीबाग
बैठक की अध्यक्षता व नेतृत्वअध्यक्षता: महेश विश्वकर्मा | नेतृत्व: मोहम्मद हकीम (केंद्रीय महासचिव)
प्रमुख राजनीतिक मांगकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नैतिक आधार पर तत्काल इस्तीफा
छात्रों के लिए मांगपेपर लीक से हताश होकर जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा
जांच की मांगजंतर-मंतर पर लाठीचार्ज और पुलिस बर्बरता की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच
शिक्षा सुधार मांगबंद पड़े सरकारी स्कूलों को पुन: खोलना और शिक्षा पूरी तरह मुफ्त करना

बैठक में उपस्थित संगठन के सदस्य

महेश विश्वकर्मा की अध्यक्षता और मोहम्मद हकीम के नेतृत्व में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में खतियानी परिवार के कई प्रमुख सदस्य, पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें मुख्य रूप से तनवीर अख्तर, मेगन मेहता, चंदन कुमार गुप्ता, मोहम्मद फखरुद्दीन, प्रदीप कुमार मेहता, अमर कुमार गुप्ता, मोहम्मद शमीम, रामप्रसाद मेहता, शोएब अंसारी और सुरेश महतो शामिल थे। बैठक के अंत में सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से संकल्प दोहराया कि युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए इस आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाया जाएगा और संघर्ष को और तेज किया जाएगा।

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