60 मासूम बच्चों की जिंदगी खतरे में, ऐतिहासिक विद्यालय जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा; प्रशासन की अनदेखी पर उठे सवाल
हजारीबाग। नगर निगम क्षेत्र में रुक्मिणी भवन के समीप स्थित ऐतिहासिक राजकीय मध्य विद्यालय, जिसे लोग प्यार से ‘बजरिया स्कूल’ के नाम से जानते हैं, आज अपनी बदहाली के दौर से गुजर रहा है। कभी शिक्षा की रोशनी से इलाके को रोशन करने वाला यह विद्यालय अब जर्जर भवन और प्रशासनिक उदासीनता के बीच अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। विद्यालय भवन की स्थिति इतनी खराब है कि यहां पढ़ने वाले करीब 60 बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
जिस स्कूल ने गढ़े कई भविष्य, आज खुद खंडहर बनने की कगार पर
बजरिया स्कूल का इतिहास क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था से गहराई से जुड़ा रहा है। इस विद्यालय से पढ़कर निकले कई छात्र-छात्राएं आज देश के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक और अन्य प्रतिष्ठित पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विद्यालय के कई पूर्व विद्यार्थी विदेशों में भी उच्च पदों पर कार्यरत होकर क्षेत्र और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
विडंबना यह है कि जिस शिक्षण संस्थान ने वर्षों तक बच्चों के भविष्य को आकार दिया, आज वही विद्यालय खुद संरक्षण और पुनर्निर्माण की राह देख रहा है।
जर्जर भवन बना खतरा, बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
विद्यालय भवन की दीवारों की पपड़ियां उखड़ चुकी हैं और कई हिस्सों की हालत बेहद खराब है। छत भी कमजोर हो चुकी है। बारिश के मौसम में भवन की स्थिति और चिंताजनक हो जाती है। ऐसे माहौल में बच्चों की पढ़ाई जारी है, जिससे किसी भी समय अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों और विद्यालय से जुड़े लोगों का कहना है कि भवन की स्थिति को देखते हुए तत्काल तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत अथवा नए भवन के निर्माण की जरूरत है। उनका सवाल है कि आखिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन की नींद क्यों खुले?
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
ऐतिहासिक विद्यालय की बदहाल स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराना संबंधित विभाग और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अब देखना यह होगा कि बजरिया स्कूल की जर्जर स्थिति सामने आने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग कितनी गंभीरता से कदम उठाते हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए भवन के जीर्णोद्धार या पुनर्निर्माण की दिशा में कब तक ठोस पहल होती है।


