हजारीबाग में गो-तस्करी का ‘महा-सिंडिकेट’: जीटी रोड से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक फैला जाल, माफिया ए खान के रसूख पर उठे गंभीर सवाल

'जब तक सरकार, तब तक बेखौफ व्यापार!'— तस्करों के कथित दावों से हिला सिस्टम; सीएमओ कनेक्शन और बॉर्डर पर मजहर कुरैशी की लाइजनिंग का सनसनीखेज आरोप

संध्या न्यूज-sandhya news
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हजारीबाग में गो तस्करी
मुख्य बिंदु
  • अवैध सिंडिकेट: हजारीबाग, रांची और धनबाद के इलाकों में गो-तस्करी का एक बेहद संगठित और रसूखदार सिंडिकेट सक्रिय होने के आरोप लग रहे हैं।
  • हाई-प्रोफाइल कनेक्शन: आरोप है कि गो-तस्करी के मुख्य माफिया ए खान का भांजा कथित तौर पर ऊंचे प्रशासनिक गलियारों (CMO) में बैठकर इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण दे रहा है।
  • बॉर्डर मैनेजमेंट: पश्चिम बंगाल का रूट प्रभावित होने के बाद अब झारखंड के बरही बॉर्डर पर मजहर कुरैशी नामक व्यक्ति द्वारा तस्करों की गाड़ियों को बेखौफ पार कराने की बात सामने आ रही है।
  • खुली चुनौती: सूत्रों के अनुसार, इस सिंडिकेट से जुड़े लोग खुलेआम दावा कर रहे हैं कि वर्तमान राजनैतिक संरक्षण के रहते कोई भी उनके इस धंधे को रोक नहीं सकता।

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग और जीटी रोड (GT Road) के इलाके इन दिनों गो-तस्करी के एक बेहद हाई-प्रोफाइल और दुस्साहसिक सिंडिकेट के गढ़ बन चुके हैं। यह मामला सिर्फ पशुओं की अवैध ढुलाई का नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण, प्रशासनिक रसूख और करोड़ों रुपये के टर्नओवर वाले एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हो रहा है, जिसने कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती दे दी है। हाल के दिनों में इस धंधे से जुड़े सरगनाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम सत्ता और सरकार की धौंस दिखाकर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

“जब तक सरकार, तब तक कोई नहीं रोक सकता”— तस्करों का दुस्साहस

ग्राउंड जीरो से आ रही खबरों के मुताबिक, इस सिंडिकेट से जुड़े गौ-तस्करों और उनके गुर्गों में कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। तस्करों के बीच कथित तौर पर यह बात आम हो चुकी है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के रहते कोई भी उनके इस काले कारोबार पर आंच नहीं आने दे सकता। इस तरह के दावों ने न केवल स्थानीय पुलिस-प्रशासन की साख पर सवालिया निशान लगा दिया है, बल्कि विपक्ष को भी सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा दे दिया है।

🏛️ सीएमओ (CMO) तक जुड़े तार? सिंडिकेट के इनसाइड नेटवर्क का पर्दाफाश

इस पूरे खेल का सबसे चौंकाने वाला पहलू इसका प्रशासनिक गलियारों से जुड़ा होना बताया जा रहा है। सूत्रों और आरोपों की मानें तो इस सिंडिकेट की कमान कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि सत्ता के शीर्ष गलियारों में पैठ रखने वाले लोग संभाल रहे हैं।

🚨 सिंडिकेट का कथित ताना-बाना:
• मुख्य माफिया: ए खान (हजारीबाग, रांची और धनबाद में सक्रिय)
• बॉर्डर कमांडर: बरही का मजहर कुरैशी (झारखंड बॉर्डर का रणनीतिकार)
• मुख्य रूट: ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road) और हजारीबाग के अंदरूनी रास्ते

आरोप है कि हजारीबाग का कुख्यात गो-तस्करी माफिया ए खान इस पूरे धंधे का मुख्य मास्टरमाइंड है। ए खान का सगा भांजा, बताया जा रहा है, कथित तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में अपनी पहुंच का इस्तेमाल करता है। आरोप है कि वहीं से बैठकर इस पूरे सिंडिकेट के लिए सुरक्षा कवच तैयार करता है और पुलिसिया कार्रवाई की हर भनक पहले ही तस्करों तक पहुंचा देता है।

बंगाल बंद हुआ तो झारखंड बना नया ‘सॉफ्ट टारगेट’

हाल के महीनों में पश्चिम बंगाल की सीमा पर सख्ती बढ़ने और रूट पूरी तरह से ब्लॉक होने के बाद, माफिया ए खान ने अपना पूरा ध्यान झारखंड की ओर केंद्रित कर दिया है। अब हजारीबाग, रांची और धनबाद की सड़कों पर देर रात गो-तस्करी की गाड़ियों की रफ्तार तेज हो गई है। जीटी रोड पर ए  खान का पूरा साम्राज्य फैला हुआ है, जहां उसके गुर्गे हर चौक-चौराहे पर नजर रखते हैं।

बरही बॉर्डर पर मजहर कुरैशी की ‘लाइजनिंग’

इस सिंडिकेट का सबसे महत्वपूर्ण जमीनी सिपहसालार बरही का मजहर कुरैशी बताया जाता है। मजहर कुरैशी का काम झारखंड की सीमा पर खड़े होकर गो-तस्करों की गाड़ियों को बिना किसी रोक-टोक के पार कराना है। स्थानीय स्तर पर सेटिंग और लाइजनिंग के दम पर मजहर कुरैशी इन गाड़ियों को बेखौफ होकर बॉर्डर पार कराता है।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब गेंद पूरी तरह से हजारीबाग जिला प्रशासन और राज्य सरकार के पाले में है। देखना यह है कि क्या पुलिस इस हाई-प्रोफाइल सिंडिकेट के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करती है या रसूख के आगे कानून इसी तरह बेबस नजर आता रहेगा।

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"संध्या न्यूज हजारीबाग और झारखंड की स्थानीय खबरों को कवर करने वाली एक समर्पित टीम है, जो निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता में विश्वास रखती है।"
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