शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज का अपना 500 बेड का अस्पताल जल्द होगा तैयार, दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद

संध्या न्यूज-sandhya news
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465 करोड़ की लागत से बन रहा छह मंजिला अत्याधुनिक भवन, अंतिम चरण में पहुंचा निर्माण; 350 से अधिक कर्मी फिनिशिंग कार्य में जुटे

हजारीबाग। शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, हजारीबाग के लिए लंबे समय से जिस अपने अस्पताल भवन का इंतजार किया जा रहा था, वह अब खत्म होने की ओर है। मेडिकल कॉलेज परिसर में करीब 465 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा 500 बेड का छह मंजिला अत्याधुनिक अस्पताल भवन निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। फिलहाल भवन में रंग-रोगन, फिनिशिंग, फिटिंग और अन्य अंतिम तैयारियों का काम तेजी से चल रहा है। विभागीय स्तर पर परियोजना को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया जा रहा है।

नए अस्पताल भवन के तैयार होने के बाद मेडिकल कॉलेज को मरीजों के इलाज और प्रशिक्षण के लिए सदर अस्पताल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज और अस्पताल एक ही परिसर में संचालित होने से डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों, मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

2018 में मेडिकल कॉलेज तैयार, अस्पताल के लिए करना पड़ा लंबा इंतजार

हजारीबाग में मेडिकल कॉलेज वर्ष 2018 में तैयार हो गया था। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के लिए अलग अस्पताल भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण सदर अस्पताल को ही लंबे समय से मेडिकल कॉलेज के अस्पताल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

सदर अस्पताल मेडिकल कॉलेज परिसर से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में मेडिकल छात्रों, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को नियमित रूप से दोनों परिसरों के बीच आवाजाही करनी पड़ती है। मरीजों के उपचार के साथ मेडिकल शिक्षा और क्लीनिकल प्रशिक्षण की व्यवस्था भी इसी कारण प्रभावित होती रही है।

अब मेडिकल कॉलेज परिसर में ही 500 बेड का अस्पताल तैयार होने से इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

465 करोड़ की परियोजना, छह मंजिला अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं

विभागीय जानकारी के मुताबिक, अस्पताल भवन छह मंजिला है और पूरी परियोजना पर करीब 465 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। मरीजों और अस्पताल कर्मियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भवन में लिफ्ट, रैंप सहित कई आधुनिक व्यवस्थाओं का प्रावधान किया गया है।

अस्पताल भवन के अलावा परियोजना में डीन रेजिडेंस, डॉक्टर रेजिडेंस और नर्सेज हॉस्टल का निर्माण भी शामिल है। इससे मेडिकल कॉलेज में पदस्थ चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के लिए आवासीय सुविधाएं भी विकसित होंगी।

इस तरह परियोजना का उद्देश्य केवल अस्पताल भवन तैयार करना नहीं, बल्कि मेडिकल कॉलेज के लिए एक व्यापक चिकित्सा एवं आवासीय ढांचा विकसित करना है।

कोरोना काल में धीमी हुई थी निर्माण की रफ्तार

अस्पताल भवन को पहले ही पूरा किए जाने की उम्मीद थी, लेकिन निर्माण के दौरान कई अड़चनें सामने आईं। निर्माण से जुड़े अधिकारियों के अनुसार कोविड-19 महामारी के दौरान पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध नहीं होने के कारण काम की गति प्रभावित हुई।

इसके बाद एक समय परियोजना के लिए फंड की उपलब्धता को लेकर भी समस्या सामने आई। इस परियोजना में 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही है।

अब फंड और मानव संसाधन से जुड़ी समस्याओं के दूर होने के बाद निर्माण कार्य ने फिर रफ्तार पकड़ ली है।

350 से अधिक कर्मी अंतिम तैयारियों में जुटे

फिलहाल निर्माण एजेंसी की ओर से 350 से अधिक कर्मी लगातार काम में जुटे हुए हैं। भवन का मुख्य निर्माण कार्य काफी हद तक पूरा हो चुका है। अब भवन को अस्पताल के रूप में संचालन के लिए तैयार करने की दिशा में फिनिशिंग से जुड़े कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।

इनमें रंग-रोगन, फिटिंग और अन्य अंतिम कार्य शामिल हैं। निर्माण कार्य झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड की निगरानी में कराया जा रहा है, जबकि निर्माण की जिम्मेदारी शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी को दी गई है।

अस्पताल शुरू होने पर मरीजों को मिलेगा बड़ा फायदा

नए 500 बेड के अस्पताल के शुरू होने के बाद इसका लाभ केवल हजारीबाग शहर के मरीजों तक सीमित नहीं रहेगा। हजारीबाग के साथ पूरे प्रमंडल से इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाले मरीजों को भी इसका फायदा मिलने की उम्मीद है।

अत्याधुनिक अस्पताल में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद गंभीर मरीजों को उपचार के लिए दूसरे बड़े शहरों या संस्थानों में रेफर करने की आवश्यकता में कमी आने की संभावना है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त यात्रा और खर्च से भी राहत मिल सकती है।

मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण में भी आएगा बदलाव

अस्पताल के मेडिकल कॉलेज परिसर में ही शुरू होने से विद्यार्थियों को क्लीनिकल प्रशिक्षण के लिए अलग परिसर में जाने की जरूरत नहीं होगी। फिलहाल सदर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बीच दूरी के कारण डॉक्टरों और छात्रों को आवाजाही करनी पड़ती है।

नया अस्पताल शुरू होने के बाद मेडिकल शिक्षा, मरीजों का उपचार और चिकित्सकीय प्रशिक्षण एक ही परिसर में संचालित किया जा सकेगा। इससे छात्रों को मरीजों के उपचार की प्रक्रिया को करीब से समझने और व्यावहारिक प्रशिक्षण हासिल करने में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

अधिकारी बोले- अंतिम चरण में है काम

झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मुकेश कुमार के अनुसार अस्पताल भवन की परियोजना की लागत करीब 465 करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के साथ डीन रेजिडेंस, डॉक्टर रेजिडेंस और नर्सेज हॉस्टल का निर्माण भी कराया गया है।

उनके अनुसार निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है और परियोजना को जल्द पूरा करने की दिशा में काम जारी है।

वर्षों का इंतजार अब खत्म होने की उम्मीद

कुल मिलाकर, वर्ष 2018 में मेडिकल कॉलेज के तैयार होने के बाद से अलग अस्पताल भवन की प्रतीक्षा कर रहे हजारीबाग को अब एक बड़ी स्वास्थ्य सुविधा मिलने वाली है। यदि दिसंबर 2026 तक निर्माण कार्य पूरा हो जाता है, तो मेडिकल कॉलेज परिसर में 500 बेड का अस्पताल शुरू होना हजारीबाग ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।

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