केरेडारी प्रेस क्लब में सांसद ने कहा- आवंटन के बाद भी खनन शुरू होने से पहले कई वैधानिक प्रक्रियाएं जरूरी, ग्राम सभा का निर्णय रहेगा अहम
केरेडारी/हजारीबाग। केरेडारी क्षेत्र की चट्टीबरियातू दक्षिणी कोयला खनन परियोजना को लेकर चल रही चर्चाओं और अलग-अलग तरह की बातों के बीच हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने क्षेत्रवासियों की चिंताओं पर स्थिति स्पष्ट की है। केरेडारी प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि स्थानीय जनता के हित, अधिकार और भावनाओं की अनदेखी कर किसी तरह की जबरदस्ती स्वीकार नहीं की जाएगी।
सांसद ने स्पष्ट किया कि कोयला ब्लॉक का आवंटन हो जाना अपने आप में खनन शुरू होने का प्रमाण नहीं है। परियोजना को जमीन पर उतारने से पहले निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय लोगों और ग्राम सभा की भूमिका महत्वपूर्ण है।
आवंटन के बाद भी कई चरण बाकी
मनीष जायसवाल ने कहा कि चट्टीबरियातू दक्षिण कोयला ब्लॉक का आवंटन हो चुका है, लेकिन इसके बाद भी खनन गतिविधि शुरू करने से पहले कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। उन्होंने सेक्शन 4, 7 और आगे सेक्शन 9 समेत अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इसलिए क्षेत्र में इस तरह की चर्चा करना कि आवंटन होते ही तत्काल खनन शुरू हो जाएगा, सही तस्वीर नहीं है। परियोजना से संबंधित तमाम जरूरी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
जमीन, रोजगार और पर्यावरण से जुड़ा मामला
सांसद ने कहा कि चट्टीबरियातू दक्षिण परियोजना को सिर्फ एक औद्योगिक या प्रशासनिक विषय के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसका सीधा संबंध क्षेत्र के लोगों की जमीन, आजीविका, पर्यावरण और भविष्य से है।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों की जमीन और जीवन इस परियोजना से प्रभावित हो सकता है, उनकी बात सुनी जानी चाहिए। स्थानीय लोगों की भावनाओं और उनके अधिकारों को नजरअंदाज करके किसी भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।
ग्राम सभा में अपनी बात रखने की अपील
क्षेत्रवासियों से सांसद ने अपील की कि जब ग्राम सभा की प्रक्रिया शुरू हो तो ग्रामीण अपनी आपत्तियों, सुझावों और मांगों को लोकतांत्रिक एवं मजबूती के साथ सामने रखें।
उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं और परियोजना का विरोध करते हैं, तो उनकी बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। सांसद ने भरोसा दिलाया कि ग्राम सभा और स्थानीय जनता की ओर से जो निर्णय सामने आएगा, उसके साथ वे मजबूती से खड़े रहेंगे।
कंपनी और प्रशासन को कानून के दायरे में काम करने की नसीहत
मनीष जायसवाल ने कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर किसी भी पक्ष को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि कंपनी हो या प्रशासन, सभी को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
सांसद ने यह भी कहा कि ग्राम सभा की प्रक्रिया को दरकिनार कर किसी प्रकार की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। जरूरत पड़ने पर स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और वैधानिक मंचों पर आवाज उठाई जाएगी।
उन्होंने प्रशासन और परियोजना से जुड़े पक्षों से अपील की कि क्षेत्रवासियों को विश्वास में लेकर, पूरी पारदर्शिता के साथ आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए।
अफवाहों से बचने की अपील
सांसद ने मीडिया और क्षेत्र के लोगों से परियोजना को लेकर फैल रही अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा कि अभी परियोजना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं पूरी होनी बाकी हैं। ऐसे में अधूरी जानकारी के आधार पर भय या भ्रम की स्थिति पैदा करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों को घबराने की जरूरत नहीं है। जनता के अधिकारों और हितों की लड़ाई में वे उनके साथ खड़े हैं। उनका कहना था कि जनता जो निर्णय लेगी, उसके अनुसार ही वे अपना रुख तय करेंगे।
प्रेस वार्ता में ये रहे मौजूद
प्रेस वार्ता की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह ने की, जबकि संचालन मंडल अध्यक्ष बालगोविन्द सोनी ने किया।
इस दौरान लोकसभा सांसद प्रतिनिधि सतेंद्र नारायण सिंह, जिला सांसद प्रतिनिधि अजय साहू, प्रमुख सुनीता देवी, जिला महामंत्री जयनारायण प्रसाद, उपाध्यक्ष उपेन्द्र सिंह, हजारीबाग विधानसभा सांसद प्रतिनिधि किशोर राणा, बड़कागांव विधानसभा सांसद प्रतिनिधि पूनम साव, बड़कागांव विधानसभा मीडिया सांसद प्रतिनिधि उमेश दांगी, मंडल अध्यक्ष बालगोविन्द सोनी, शेर सिंह, नरेश महती, शिबू मेहता, विजय यादव, सांसद मंडल प्रतिनिधि रंजीत कुमार, महेंद्र सिंह, प्रीतम साहू समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
क्या कहा सांसद ने—मुख्य बातें
- कोयला ब्लॉक का आवंटन होने का मतलब तत्काल खनन शुरू होना नहीं है।
- खनन से पहले निर्धारित वैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
- स्थानीय जनता और ग्राम सभा की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
- जनता की इच्छा के विरुद्ध जबरदस्ती स्वीकार नहीं की जाएगी।
- परियोजना से जुड़े तथ्यों को लेकर अफवाहों से बचने की जरूरत है।
- जनता के हित और अधिकारों के साथ सांसद मजबूती से खड़े रहने का भरोसा दिया।


