22 मौजों की 796.17 एकड़ खास महल जमीन का सर्वे करा रहा प्रशासन, झंडा चौक पर सर्वे टीम को रोकने का दावा; स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
हजारीबाग। शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र झंडा चौक पर खास महल जमीन के सर्वे को लेकर नया विवाद सामने आया है। जिला प्रशासन की ओर से हजारीबाग की खास महल जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में सर्वे टीम के झंडा चौक पहुंचने और वहां कुछ लोगों द्वारा टीम को काम करने से रोकने की बात सामने आई है। घटना के बाद खास महल जमीन पर वर्षों से चले आ रहे कब्जे और स्वामित्व को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
उपायुक्त हेमंत सती की पहल पर जिले की 22 मौजों में करीब 796.17 एकड़ खास महल जमीन के सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई है। सर्वे के माध्यम से जमीन की वास्तविक स्थिति, लीज की वैधता, नवीनीकरण, हस्तांतरण, कब्जे और वर्तमान उपयोग समेत विभिन्न बिंदुओं का रिकॉर्ड तैयार किया जाना है।
8 जून से 8 जुलाई तक निर्धारित था सर्वे
प्रशासन की ओर से सर्वे के लिए 8 जून से 8 जुलाई 2026 तक की समयावधि निर्धारित की गई थी। इसके तहत खास महल जमीन से संबंधित लीज विवरण, नवीनीकरण, पट्टे, पुनर्गृहित जमीन और खास महल लैंड बैंक से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।
खास महल जमीन को लेकर लंबे समय से उठते रहे सवालों के बीच प्रशासन की यह कवायद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सर्वे पूरा होने के बाद सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति और उस पर मौजूद दावों की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।
झंडा चौक पर सर्वे टीम को रोकने का दावा
इसी बीच झंडा चौक पर सर्वे टीम के पहुंचने के बाद कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा टीम को अपना काम करने से रोकने की स्थिति उत्पन्न हुई। टीम सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर जमीन की पैमाइश और स्थिति का आकलन करने पहुंची थी।
इस घटना को लेकर स्थानीय निवासी मनोज गुप्ता ने प्रशासन के सर्वे अभियान का स्वागत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से खास महल की जमीन की समुचित निगरानी नहीं होने के कारण कई स्थानों पर कब्जे की स्थिति बनी है। उन्होंने कहा कि झंडा चौक से इंद्रपुरी चौक तक बड़ी मात्रा में जमीन खास महल से संबंधित होने की बात सामने आती रही है, इसलिए प्रशासन को वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
मनोज गुप्ता ने मांग की कि खास महल जमीन के वास्तविक अधिकार और लीज की स्थिति की जांच हो तथा यदि कहीं नियम विरुद्ध कब्जा पाया जाता है तो प्रशासन उसे हटाने की कार्रवाई करे।
सर्वे में रुकावट क्यों? उठ रहे सवाल
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रशासन सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर जमीन का सर्वे और पैमाइश कर रहा है, तो सर्वे टीम को काम करने से रोकने की स्थिति क्यों बनी? यदि जमीन पर कब्जा या लीज पूरी तरह नियमों के अनुरूप है तो सर्वे के बाद स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच और सर्वे की प्रक्रिया जारी है। सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि झंडा चौक समेत अन्य इलाकों में खास महल जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है और किन जमीनों पर वैध लीज, कब्जे या हस्तांतरण से जुड़े दावे सही पाए जाते हैं।


