हजारीबाग: कंधों पर बच्चे, सामने उफनती नदी… विकास के दावों के बीच इस सुदूर इलाके की यही हकीकत; पुल के इंतजार में चार गांव

संध्या न्यूज-sandhya news
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विकास की लंबी-चौड़ी बातें और सुदूर इलाकों की कड़वी सच्चाई

हजारीबाग: देश में गांवों तक सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के सुदूरवर्ती इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी आज भी ग्रामीणों की मुश्किल बढ़ा रही है। करगालो पंचायत के पिपरातिलहा में खोंगिया नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात के मौसम में ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।

पिपरातिलहा के साथ जारवाटांड़, महुआटांड़ और कोंडरागढ़ा समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए खोंगिया नदी आवागमन में बड़ी बाधा बनी हुई है। सामान्य दिनों में ग्रामीण किसी तरह नदी पार कर अपने जरूरी काम निपटा लेते हैं, लेकिन बारिश के बाद जलस्तर बढ़ने और बहाव तेज होने पर समस्या गंभीर हो जाती है।

कंधे पर बच्चों को बैठाकर नदी पार करने की मजबूरी

पुल नहीं होने का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ता है। नदी में पानी बढ़ने के बाद कई अभिभावकों को अपने छोटे बच्चों को कंधे पर बैठाकर नदी पार करानी पड़ती है, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

सामने आई तस्वीर में एक व्यक्ति बच्चों को कंधे पर लेकर नदी पार करता नजर आ रहा है। यह तस्वीर इलाके की जमीनी स्थिति को बयां करती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में बच्चों को स्कूल भेजना उनके लिए रोज की चुनौती बन जाता है।

मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती

समस्या सिर्फ बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। बारिश के मौसम में ग्रामीणों को बाजार, रोजगार, सरकारी कार्यालय और अन्य जरूरी कामों के लिए नदी पार करनी पड़ती है। किसी के बीमार पड़ने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की स्थिति में परेशानी और बढ़ जाती है।

जलस्तर बढ़ने पर सुरक्षित आवागमन का विकल्प सीमित हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को समय पर स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल तक पहुंचने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

150 से अधिक आबादी वाले टोले को पुल का इंतजार

ग्रामीणों के मुताबिक पिपरातिलहा टोले में 150 से अधिक लोगों की आबादी है। इसके अलावा आसपास के कई गांवों के लोग भी इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। ग्रामीण लंबे समय से खोंगिया नदी पर पुल या पक्की पुलिया निर्माण की मांग करते आ रहे हैं।

ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व मांडू विधायक को भी इस संबंध में लिखित आवेदन दिया गया था। वर्तमान जनप्रतिनिधियों को भी समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक पुल निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।

पुल बनने से कई इलाकों का सीधा संपर्क होगा आसान

ग्रामीणों के अनुसार खोंगिया नदी पर पुल बनने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आ सकता है। नदी के दूसरी ओर मौजूद पक्की सड़क से जुड़ाव होने पर सारूकुंदर, फाराचांच, मड़मो, गाल्होवार और पैक सहित कई इलाकों तक पहुंच आसान हो सकती है।

वहीं बनासो और विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय की ओर जाने वाले ग्रामीणों को भी सुविधा मिलेगी। इससे स्कूल, अस्पताल, बाजार और सरकारी कार्यालय तक पहुंचने में लगने वाला समय और दूरी कम हो सकती है।

ग्रामीण बोले- अब आश्वासन नहीं, चाहिए स्थायी समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात के दौरान खोंगिया नदी की समस्या सामने आती है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर वादे किए जाते हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है।

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से खोंगिया नदी पर जल्द से जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल बनने से सिर्फ आवागमन आसान नहीं होगा, बल्कि बच्चों की शिक्षा, मरीजों की स्वास्थ्य सुविधा और ग्रामीणों की आर्थिक गतिविधियों को भी सीधा लाभ मिलेगा।

खोंगिया नदी पर पुल का अभाव पिपरातिलहा और आसपास के ग्रामीणों के लिए आज भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। कंधे पर बच्चों को बैठाकर नदी पार करते ग्रामीणों की तस्वीर इस समस्या की गंभीरता को सामने लाने के लिए काफी है।

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