रिंग रोड-बाईपास का इंतजार, शहर की सड़कों पर लगातार दौड़ रहे हाइवा और ट्रक; जगह-जगह हो रही ‘लीपापोती’ पर उठे सवाल
हजारीबाग: हजारीबाग की सड़कों पर गड्ढे कोई नई समस्या नहीं हैं। बारिश आते ही शहर की कई मुख्य और संपर्क सड़कें गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं और फिर शुरू होता है मरम्मत का सिलसिला। कहीं सांसद की पहल पर सड़क के गड्ढे भरे जाते हैं, कहीं विधायक समर्थक और कार्यकर्ता खुद सड़क को समतल करते नजर आते हैं, तो कहीं संबंधित विभाग तत्काल मरम्मत का काम करता है।
- रिंग रोड-बाईपास का इंतजार, शहर की सड़कों पर लगातार दौड़ रहे हाइवा और ट्रक; जगह-जगह हो रही ‘लीपापोती’ पर उठे सवाल
- असली बीमारी सड़क के गड्ढे नहीं, ट्रैफिक का दबाव?
- रिंग रोड और बाईपास पर आखिर कितनी गंभीरता?
- 107 करोड़ की सड़क परियोजना जरूर शुरू, लेकिन सवाल ट्रैफिक का भी
- NH की सड़कों पर भी रखरखाव का सवाल
- NH-100 यानी नए NH-522 के लिए भी आगे की तैयारी
- इमलीकोठी, विष्णुपुरी, कुम्हारटोली और मोहल्लों की सड़कें भी सवाल पूछ रही हैं
- बरसात से पहले काम क्यों नहीं?
- बिजली: कोयला क्षेत्र में रहने के बावजूद कटौती की मार
- पानी: छड़वा डैम में पानी बढ़ा, लेकिन व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी
- अब सवाल सीधे जनप्रतिनिधियों से
- हजारीबाग को गड्ढों से स्थायी मुक्ति कब मिलेगी—और इस सवाल का जवाब आखिर कौन देगा?
लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह सिलसिला कब तक चलेगा?
चोपड़ा मेडिकल के पास गड्ढे भरने का काम इसका ताजा उदाहरण है। ऊपर से देखने पर सड़क की मरम्मत होती दिखाई देती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर सवाल यह उठ रहा है कि जब सड़क पर पानी का सीपेज और भारी वाहनों का दबाव बना रहेगा, तो यह मरम्मत आखिर कितने दिनों तक टिकेगी?
असली बीमारी सड़क के गड्ढे नहीं, ट्रैफिक का दबाव?
हजारीबाग शहर की मुख्य सड़कों पर सामान्य यातायात के साथ भारी वाहनों का दबाव भी है। कोयला लदे हाइवा और बड़े ट्रकों की आवाजाही सड़क की मजबूती के लिए बड़ी चुनौती बनती है।
यही वजह है कि सवाल सिर्फ “गड्ढा कब भरेगा?” का नहीं होना चाहिए। बड़ा सवाल यह है कि शहर के बीच से भारी वाहनों की आवाजाही कब कम होगी?
जब तक भारी और मालवाहक वाहनों के लिए प्रभावी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं होगा, तब तक मुख्य शहर की सड़कों पर लगातार मरम्मत का दबाव बना रहेगा। सड़क आज बनेगी, कल भारी वाहन चलेंगे और कुछ समय बाद फिर वही गड्ढे दिखाई देने लगेंगे।
रिंग रोड और बाईपास पर आखिर कितनी गंभीरता?
हजारीबाग में रिंग रोड/बाईपास की जरूरत कोई नई चर्चा नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड में हजारीबाग रिंग रोड के निर्माण से संबंधित परियोजनाएं पहले भी दर्ज रही हैं। पुराने सरकारी दस्तावेज में रेवाली NH-100 से मासीपीढ़ी NH-33 तक 5.582 किलोमीटर के चार लेन रिंग रोड सेक्शन के लिए निर्माण पर्यवेक्षण परामर्श का टेंडर भी दर्ज है।
आज जरूरत इस बात की है कि पुरानी योजनाओं की स्थिति साफ-साफ जनता के सामने रखी जाए।
कितना काम हुआ?
कितना बाकी है?
कहां जमीन की समस्या है?
कहां पैसा अटका है?
किस विभाग की जिम्मेदारी है?
और सबसे महत्वपूर्ण—शहर के भारी ट्रैफिक को बाहर निकालने का अंतिम रोडमैप क्या है?
जनता को इन सवालों का जवाब चाहिए।
107 करोड़ की सड़क परियोजना जरूर शुरू, लेकिन सवाल ट्रैफिक का भी
भारत माता चौक से सिंदूर बाईपास तक करीब 9.5 किलोमीटर मुख्य सड़क के पुनर्निर्माण, मजबूतीकरण और चौड़ीकरण के लिए करीब 107 करोड़ रुपये की परियोजना का शिलान्यास मई 2026 में हुआ था। इस परियोजना को शहर की जर्जर सड़क और ट्रैफिक समस्या से राहत दिलाने वाली योजना के रूप में बताया गया है।
यह निश्चित रूप से महत्वपूर्ण काम है। लेकिन इसके साथ एक दूसरा सवाल भी खड़ा होता है—क्या सिर्फ सड़क चौड़ी करने से शहर का भारी ट्रैफिक संकट खत्म हो जाएगा?
अगर कोयला लदे हाइवा और बड़े मालवाहक वाहन लगातार शहरी हिस्सों से गुजरते रहे, तो नई सड़क पर भी दबाव बढ़ेगा। इसलिए सड़क निर्माण के साथ ट्रैफिक डायवर्जन और वैकल्पिक मार्ग की योजना भी उतनी ही जरूरी है।
NH की सड़कों पर भी रखरखाव का सवाल
हजारीबाग की सड़क समस्या सिर्फ नगर निगम या राज्य पथ निर्माण विभाग तक सीमित नहीं है। अलग-अलग सड़कें अलग-अलग एजेंसियों के अधीन हैं। हजारीबाग जिले की आधिकारिक वेबसाइट भी जिले की कनेक्टिविटी में NH-33 और NH-100 का उल्लेख करती है।
वहीं, NHAI के रिकॉर्ड में बरही-हजारीबाग NH-20/पुराना NH-33 सेक्शन के शॉर्ट-टर्म ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिए 2026 में निविदा प्रक्रिया भी दिखाई देती है।
इसका मतलब साफ है—जवाबदेही तय करने से पहले सड़कवार यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कौन-सी सड़क किस विभाग के अधीन है।
NH-100 यानी नए NH-522 के लिए भी आगे की तैयारी
एक और महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार के ई-प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड के मुताबिक NH-522 (पुराना NH-100), हजारीबाग-चतरा सेक्शन के किलोमीटर 66 से 119 तक दो लेन विद पेव्ड शोल्डर के लिए DPR तैयार करने की कंसल्टेंसी की निविदा अगस्त 2026 में जारी हुई है।
यानी कुछ सड़कों पर लंबी अवधि की योजना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। लेकिन सवाल यही है कि मौजूदा जर्जर सड़क पर तब तक जनता को राहत कैसे मिलेगी?
इमलीकोठी, विष्णुपुरी, कुम्हारटोली और मोहल्लों की सड़कें भी सवाल पूछ रही हैं
शहर की समस्या सिर्फ मुख्य राष्ट्रीय राजमार्गों तक सीमित नहीं है। इमलीकोठी, विष्णुपुरी, कुम्हारटोली और कई अन्य मोहल्लों की सड़कें भी लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी सड़कों की स्थिति और अधूरे काम को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में सिर्फ मुख्य सड़क पर काम शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है। शहर और ग्रामीण क्षेत्र की पूरी सड़क व्यवस्था को एक समग्र योजना की जरूरत है।
बरसात से पहले काम क्यों नहीं?
यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है।
हर साल बारिश आने के बाद गड्ढे दिखाई देते हैं, फिर बारिश के दौरान गड्ढे भरने की कवायद शुरू होती है। अगर किसी सड़क की मरम्मत जरूरी थी, तो बरसात से पहले टेंडर, तकनीकी जांच और निर्माण क्यों नहीं कराया गया?
बरसात में सड़क निर्माण की परिस्थितियां खुद चुनौतीपूर्ण होती हैं। ऐसे में पहले से खराब सड़कों को मानसून से पहले चिन्हित कर स्थायी मरम्मत की योजना क्यों नहीं बनाई जाती?
यही सवाल अब जनता पूछ रही है।
सड़क के बाद बिजली और पानी भी सवालों के घेरे में
हजारीबाग की मूलभूत सुविधाओं का संकट सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं है।
बिजली: कोयला क्षेत्र में रहने के बावजूद कटौती की मार
2026 में हजारीबाग ने कई बार बिजली संकट का सामना किया। अप्रैल में KTPS की तकनीकी खराबी और उत्पादन में कमी के कारण हजारीबाग समेत आसपास के जिलों में आपूर्ति प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
मई में DVC की लोड शेडिंग के कारण जिले में सुबह से रात तक बिजली संकट की खबर सामने आई और आपूर्ति लगभग 50 प्रतिशत तक सीमित रहने की बात रिपोर्ट में कही गई।
अगस्त में KTPS के 315 MVA ICT-2 पावर ट्रांसफॉर्मर में तकनीकी समस्या के कारण शहरी क्षेत्रों में 8-10 घंटे तक आपूर्ति प्रभावित होने की रिपोर्ट आई।
यानी बिजली का सवाल भी केवल “आज बिजली क्यों गई?” तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि बार-बार तकनीकी खराबी और लोड संकट से स्थायी राहत के लिए आधारभूत ढांचे को कितना मजबूत किया जा रहा है?
पानी: छड़वा डैम में पानी बढ़ा, लेकिन व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी
छड़वा डैम हजारीबाग की पेयजल व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक डैम से शहर में करीब 36 लाख गैलन पानी प्रतिदिन आपूर्ति की जाती है।
जून 2026 में नगर निगम की ओर से छड़वा डैम की जलापूर्ति व्यवस्था का निरीक्षण और सुधार की कवायद भी की गई थी।
अब बारिश से डैम का जलस्तर बढ़ना निश्चित रूप से राहत की खबर है। लेकिन यहां भी स्थायी सवाल यही है—सिर्फ डैम में पानी होना पर्याप्त है या पाइपलाइन, टावर, वितरण और जल संरक्षण व्यवस्था को भी उतना ही मजबूत किया जा रहा है?
सियासत बहुत हुई, अब जवाबदेही तय होनी चाहिए
हजारीबाग में सड़क को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कोई सांसद की पहल गिना रहा है, कोई विधायक की। कोई विभागीय काम बता रहा है, तो कोई अपने कार्यकर्ताओं द्वारा गड्ढे भरने को उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा है।
लेकिन जनता का सवाल इससे कहीं बड़ा है।
जनता को यह नहीं देखना कि गड्ढे किसने भरे। जनता यह देखना चाहती है कि सड़क दोबारा कब नहीं टूटेगी।
यही वह जगह है जहां “ढाक के दो पात” वाली कहावत सटीक बैठती नजर आती है—सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन आम नागरिक को सड़क, बिजली और पानी जैसी मूल सुविधाओं का स्थायी समाधान चाहिए।
अब सवाल सीधे जनप्रतिनिधियों से
हजारीबाग की जनता जानना चाहती है—
- शहर के भारी वाहनों के दबाव को कम करने के लिए रिंग रोड/बाईपास का स्पष्ट रोडमैप क्या है?
- कोयला और अन्य भारी मालवाहक वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग की योजना क्या है?
- कौन-सी सड़क NHAI, कौन-सी पथ निर्माण विभाग और कौन-सी नगर निगम/अन्य एजेंसी के अधीन है?
- बरसात से पहले सड़क मरम्मत की योजना समय पर क्यों नहीं पूरी होती?
- चोपड़ा मेडिकल जैसे स्थानों पर सीपेज की मूल समस्या का समाधान कब होगा?
- 107 करोड़ की सड़क परियोजना की समयसीमा क्या है और उसकी प्रगति कितनी है?
- बिजली संकट के स्थायी समाधान के लिए नए ग्रिड और ट्रांसमिशन सिस्टम की स्थिति क्या है?
- शहर की पेयजल व्यवस्था को भविष्य की बढ़ती आबादी के हिसाब से कैसे मजबूत किया जाएगा?
हजारीबाग को अब गड्ढे भरने वाली राजनीति नहीं, गड्ढे खत्म करने वाली नीति चाहिए।
क्योंकि सड़क पर पैबंद लगाने से कुछ समय के लिए तस्वीर बदल सकती है, लेकिन जब तक भारी ट्रैफिक का दबाव कम करने वाला वैकल्पिक मार्ग नहीं बनता और सड़क की पूरी संरचना मजबूत नहीं होती, तब तक हजारीबाग की सड़कें हर बरसात के बाद यही सवाल पूछती रहेंगी—“हम कब सुधरेंगे?”
संध्या न्यूज़ का सवाल:


