पुराना बस स्टैंड से इंद्रपुरी, ग्वालटोली और बंशीलाल चौक तक रोजाना जाम; जनता का सवाल—चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस के बावजूद व्यवस्था क्यों बेपटरी?
हजारीबाग: हजारीबाग शहर की रफ्तार इन दिनों जाम में फंस गई है। पुराना बस स्टैंड हो या इंद्रपुरी चौक, ग्वालटोली चौक, बंशीलाल चौक, सरदार चौक, मेन रोड या शहर के दूसरे प्रमुख मार्ग—कई इलाकों में जाम अब लोगों की रोजमर्रा की परेशानी बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले तीन-चार दिनों से स्थिति और ज्यादा खराब है।
- पुराना बस स्टैंड से इंद्रपुरी, ग्वालटोली और बंशीलाल चौक तक रोजाना जाम; जनता का सवाल—चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस के बावजूद व्यवस्था क्यों बेपटरी?
- चौक पर ट्रैफिक पुलिस, फिर भी जाम क्यों?
- टोटो की मनमानी से बढ़ रही परेशानी?
- जनता चाहती है टोटो के लिए स्पष्ट रूट चार्ट
- पुराना बस स्टैंड बना ट्रैफिक का बड़ा दबाव क्षेत्र
- इंद्रपुरी से बंशीलाल चौक तक एक जैसी तस्वीर
- खराब सड़कें भी बन रही हैं जाम की वजह
- आने वाले पर्वों से पहले व्यवस्था सुधारना जरूरी
- जनता का सवाल—घोषणा नहीं, जमीन पर व्यवस्था चाहिए
- हाईकोर्ट के निर्देश से भी बढ़ी जवाबदेही
- शिवम यादव बोले—अब व्यवस्था नहीं सुधरी तो जनता करेगी आंदोलन
- सवाल सिर्फ जाम का नहीं, पूरे सिस्टम का है
- पुराना बस स्टैंड से लेकर शहर के प्रमुख चौक-चौराहों तक रोज लगने वाले जाम का स्थायी समाधान आखिर कब होगा?
सुबह घर से निकलने वाला व्यक्ति हो या बाजार जाने वाला दुकानदार, स्कूल जाने वाला बच्चा हो या अस्पताल पहुंचने वाला मरीज—किसी को पता नहीं कि रास्ते में कितनी देर जाम में फंसना पड़ेगा।
पुराना बस स्टैंड के आसपास की स्थिति इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां चारों तरफ से आने वाले वाहनों का दबाव, ऑटो और ई-रिक्शा की आवाजाही तथा सड़क की सीमित चौड़ाई मिलकर ऐसी स्थिति बना रहे हैं कि थोड़ी देर में वाहनों की कतार लंबी होती चली जाती है।
चौक पर ट्रैफिक पुलिस, फिर भी जाम क्यों?
सबसे बड़ा सवाल ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के कई प्रमुख चौक-चौराहों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती है। इसके बावजूद जब जाम लगता है तो उसे नियंत्रित करने में काफी समय लग जाता है।
लोगों का आरोप है कि कई बार ट्रैफिककर्मी जाम लगने के बाद सक्रिय होते हैं, जबकि जरूरत इससे पहले व्यवस्था संभालने की है। जनता का सवाल है कि अगर किसी चौक पर पहले से पुलिसकर्मी मौजूद हैं तो वाहनों की अव्यवस्थित आवाजाही को शुरुआत में ही क्यों नहीं रोका जाता?
टोटो की मनमानी से बढ़ रही परेशानी?
शहर में टोटो की बढ़ती संख्या और उनके परिचालन को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोटो चालक कई बार सवारी उठाने या उतारने के लिए अचानक सड़क के बीच में रुक जाते हैं। इससे पीछे से आने वाले वाहनों की रफ्तार रुक जाती है और कुछ ही मिनटों में जाम की स्थिति बन जाती है।
लोगों का यह भी कहना है कि शहर में टोटो परिचालन के लिए स्पष्ट रूट व्यवस्था और स्टॉपेज को लेकर सख्ती दिखाई नहीं देती। जिस जगह सवारी मिलती है, वहीं टोटो रोक दिया जाता है और इससे मुख्य मार्गों पर यातायात प्रभावित होता है।
जनता चाहती है टोटो के लिए स्पष्ट रूट चार्ट
शहरवासियों की मांग है कि टोटो और ई-रिक्शा के परिचालन को लेकर प्रशासन स्पष्ट नियम बनाए। लोगों का कहना है कि रूट तय होने के साथ-साथ यह भी निर्धारित होना चाहिए कि टोटो कहां रुकेंगे और कहां सवारी बैठाने या उतारने की अनुमति होगी।
जनता चाहती है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई हो, ताकि सड़क पर मनमाने तरीके से टोटो रोकने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सके।
पुराना बस स्टैंड बना ट्रैफिक का बड़ा दबाव क्षेत्र
पुराना बस स्टैंड शहर का बेहद व्यस्त इलाका है। यहां चारों दिशाओं से लोगों और वाहनों की आवाजाही होती है। बस, ऑटो, ई-रिक्शा, दोपहिया और निजी वाहन एक ही सड़क पर दबाव बढ़ाते हैं।
इसी वजह से यहां छोटी सी अव्यवस्था भी जल्द ही बड़े जाम का रूप ले लेती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुराना बस स्टैंड जैसे संवेदनशील क्षेत्र के लिए अलग और स्थायी ट्रैफिक प्लान बनाया जाए तो स्थिति में काफी सुधार हो सकता है।
हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट में हजारीबाग की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सुनवाई के दौरान शहर के बीच स्थित पुराने बस स्टैंड को शहर से बाहर, बाईपास के आसपास स्थानांतरित करने के सुझाव पर गंभीरता से विचार करने को कहा गया था। इससे साफ है कि शहर के भीतर बस स्टैंड और उससे पैदा होने वाले यातायात दबाव का मुद्दा अब न्यायिक स्तर पर भी चर्चा में है।
इंद्रपुरी से बंशीलाल चौक तक एक जैसी तस्वीर
जाम की समस्या केवल पुराना बस स्टैंड तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इंद्रपुरी चौक, ग्वालटोली चौक, बंशीलाल चौक, सरदार चौक और मेन रोड सहित कई प्रमुख स्थानों पर लगभग यही स्थिति देखने को मिलती है।
अगस्त 2026 की एक स्थानीय रिपोर्ट में भी हजारीबाग के गुरुगोविंद सिंह रोड, अन्नदा चौक, पुराना बस स्टैंड रोड, बुढ़वा महादेव चौक, बंशीलाल चौक, बड़ा बाजार, मेन रोड, झंडा चौक, कोर्रा चौक, इंद्रपुरी चौक, नवाबगंज रोड और कचहरी चौक को ट्रैफिक दबाव वाले इलाकों के रूप में चिन्हित किया गया था। रिपोर्ट में सड़क का सिकुड़ता दायरा, बढ़ती वाहन संख्या और भारी वाहनों के प्रवेश को समस्या बढ़ाने वाले कारकों में गिना गया।
खराब सड़कें भी बन रही हैं जाम की वजह
ट्रैफिक समस्या को केवल वाहनों की संख्या से जोड़कर देखना भी पूरी तस्वीर नहीं होगी। शहर की कई सड़कें पहले से जर्जर हैं और जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं।
बारिश में गड्ढों में पानी भर जाता है। वाहन चालक अचानक गड्ढे से बचने के लिए ब्रेक लगाते या दिशा बदलते हैं। सड़क का खराब हिस्सा वाहनों की गति कम करता है। नतीजा यह होता है कि एक जगह धीमी हुई रफ्तार कुछ ही देर में पीछे तक वाहनों की लंबी कतार बना देती है।
यानी जाम और सड़क की बदहाली एक-दूसरे से जुड़ी हुई समस्याएं हैं।
आने वाले पर्वों से पहले व्यवस्था सुधारना जरूरी
अब सबसे बड़ी चिंता आने वाले पर्वों को लेकर है। दुर्गा पूजा और छठ जैसे अवसरों पर शहर में सामान्य दिनों की तुलना में वाहनों और लोगों की आवाजाही कई गुना बढ़ जाती है।
पिछले वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान भी हजारीबाग में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या को लेकर लोगों ने चिंता जताई थी। प्रमुख पूजा स्थलों के आसपास पार्किंग की कमी, सड़क किनारे वाहनों के खड़े होने और भीड़ के कारण जाम की समस्या सामने आई थी।
ऐसे में अगर सामान्य दिनों में ही पुराना बस स्टैंड, इंद्रपुरी, बंशीलाल चौक और अन्य इलाकों में जाम की स्थिति है, तो त्योहारों के दौरान हालात कितने चुनौतीपूर्ण होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
जनता का सवाल—घोषणा नहीं, जमीन पर व्यवस्था चाहिए
शहर के लोगों की मांग अब सिर्फ ट्रैफिक पुलिस की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। लोग चाहते हैं कि प्रशासन एक समग्र ट्रैफिक प्लान तैयार करे।
ऑटो और ई-रिक्शा के लिए रूट और स्टॉपेज तय हों, प्रमुख चौक-चौराहों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित हो, सड़क किनारे अवैध पार्किंग पर कार्रवाई हो और खराब सड़कों की मरम्मत भी प्राथमिकता से की जाए।
साथ ही भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग और शहर के बाहर यातायात को डायवर्ट करने की दीर्घकालिक योजना पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
हाईकोर्ट के निर्देश से भी बढ़ी जवाबदेही
हजारीबाग की ट्रैफिक समस्या को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप पहले भी हो चुका है। अक्टूबर 2025 में झारखंड हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को पार्किंग से जुड़े अतिक्रमण हटाने, पर्याप्त ट्रैफिक रूम स्थापित करने और ऑटो-टोटो चालकों के साथ नियमित बैठकें करने जैसे कदम उठाने का निर्देश दिया था। अदालत ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर सख्ती और खराब सीसीटीवी कैमरों को चालू करने की दिशा में भी निर्देश दिए थे।
अब सवाल यह है कि इन व्यवस्थाओं का जमीनी असर कितना दिखाई दे रहा है।
शिवम यादव बोले—अब व्यवस्था नहीं सुधरी तो जनता करेगी आंदोलन
पुराना बस स्टैंड के आसपास की स्थिति को लेकर स्थानीय निवासी शिवम यादव, बड़ा बाजार, हजारीबाग ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि पिछले तीन-चार दिनों से जाम की समस्या लगातार बनी हुई है। उनके अनुसार ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद जाम से लोगों को राहत नहीं मिल रही है।
उन्होंने ऑटो परिचालन को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम और रूट व्यवस्था लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि आने वाले पर्वों से पहले यदि ट्रैफिक व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो जनता को आंदोलन और धरना जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
सवाल सिर्फ जाम का नहीं, पूरे सिस्टम का है
हजारीबाग में जाम अब महज कुछ मिनट की देरी का मामला नहीं रह गया है। खराब सड़क, बढ़ते वाहन, ऑटो की अनियंत्रित आवाजाही, सड़क किनारे रुकते वाहन, पार्किंग की समस्या, भारी वाहनों का दबाव और ट्रैफिक प्रबंधन की कमियां—ये सभी मिलकर शहर की रफ्तार रोक रहे हैं।
जनता का सवाल सीधा है—जब समस्या रोज दिखाई दे रही है, तो समाधान के लिए स्थायी व्यवस्था कब बनेगी?
अगर अभी से व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो दुर्गा पूजा और छठ जैसे बड़े पर्वों में शहर की स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। तब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि लोग कितनी देर जाम में फंसे, बल्कि यह होगा कि आपात स्थिति में एंबुलेंस, मरीज, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग कितनी आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच पाए।
हजारीबाग को अब जाम खुलवाने के लिए हर बार मौके पर दौड़ती व्यवस्था नहीं, बल्कि जाम लगने ही न देने वाली ट्रैफिक व्यवस्था चाहिए।
संध्या न्यूज़ का सवाल:


