हजारीबाग में भूजल की ‘डकैती’: 200 फीट की अनुमति लेकर 500 फीट गहरी बोरिंग का खेल; वार्ड पार्षद मन्नू पासवान ने रूकवाया अवैध काम

मटवारी के कृष्णापुरी गली नंबर 4 में नियमों को ठेंगा; 280 फीट हो चुकी थी खुदाई, बेखौफ संचालक बोला- 'जिसको जो करना है कर ले'

संध्या न्यूज-sandhya news
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भूजल
मुख्य बिंदु
  • बड़ी धांधली उजागर: मटवारी के समीप कृष्णापुरी गली नंबर 4 में 200 फीट बोरिंग की प्रशासनिक अनुमति की आड़ में लगभग 500 फीट गहरी कमर्शियल बोरिंग कराने का मामला सामने आया है।
  • वार्ड पार्षद का ऑन-स्पॉट एक्शन: नवनिर्वाचित वार्ड पार्षद मन्नू पासवान को जैसे ही स्थानीय लोगों से इसकी गुप्त सूचना मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंचे और काम रुकवाकर परमिशन पेपर की मांग की।
  • अहंकार और गुंडागर्दी की पराकाष्ठा: पार्षद के सामने संचालक ने खुद स्वीकार किया कि वह 280-290 फीट खुदाई कर चुका है और 500 फीट तक जाएगा। उसने सीधे धमकी भरे लहजे में कहा कि 'जिसको जो करना है करे।'
  • निगम की टीम ने जब्त की गाड़ी: पार्षद की त्वरित सूचना पर नगर आयुक्त के निर्देश पर निगम के मार्शल कर्मी मौके पर पहुंचे, बोरिंग मशीन (गाड़ी) को कब्जे में लिया और संचालक को निगम दफ्तर तलब किया।
  • प्रबंधन और सांठगांठ के आरोप: स्थानीय जनता का आरोप है कि कुछ पैसों के लालच में नगर निगम के निचले स्तर के कर्मी मैनेज हो जाते हैं, जिससे रसूखदारों को अवैध बोरिंग की खुली छूट मिल जाती है।

हजारीबाग: हजारीबाग शहर में वैसे ही हर साल गर्मी के दिनों में वाटर लेवल (भूजल स्तर) पाताल में चला जाता है, लेकिन इसके बावजूद चंद रसूखदार और बिल्डर माफिया पूरे शहर के पानी को सुखा देने पर आमादा हैं। ताजा मामला मटवारी के समीप कृष्णापुरी गली नंबर 4 का है, जहां नगर निगम के नियमों और आदेशों को सरेआम ठेंगा दिखाते हुए एक मकान में अवैध तरीके से गहरी बोरिंग कराई जा रही थी। इस धांधली का भंडाफोड़ तब हुआ जब स्थानीय वार्ड पार्षद मन्नू पासवान ने सजगता दिखाते हुए मौके पर धावा बोल दिया और नगर निगम की टीम को बुलाकर इस काले खेल को रुकवाया।

“एक घर को जिंदा रखने के लिए क्या 10 घरों को बर्बाद कर दें?”

वार्ड पार्षद मन्नू पासवान ने ग्राउंड जीरो पर इस धांधली को उजागर करते हुए नगर निगम की कार्यशैली और परमिशन देने के तौर-तरीकों पर बेहद तीखे और तार्किक सवाल खड़े किए।

वार्ड पार्षद मन्नू पासवान ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा:

“मुझे स्थानीय नागरिकों ने सूचना दी कि गली में एक नाजायज बोरिंग हो रही है। मैं तुरंत मौके पर पहुंचा और परमिशन पेपर मांगा। उनके पास सिर्फ 200 फीट बोरिंग की अनुमति थी, लेकिन वे खुद सीना तानकर बोल रहे थे कि 290 फीट खोद चुके हैं और 500 फीट पूरा करेंगे, जिसको जो उखाड़ना है उखाड़ ले। इस मुख्य मार्ग के पीछे 400 से अधिक परिवार रहते हैं। यह इस मकान मालिक की तीसरी बोरिंग है! आखिर नगर निगम ऐसे रसूखदारों को बार-बार परमिशन क्यों देता है कि एक रसूखदार घर को जिंदा रखने के लिए पूरे मोहल्ले के 10 घरों को पानी विहीन कर बर्बाद कर दिया जाए?”

पैसे देकर ‘मैनेज’ हो जाता है सिस्टम? जनता ने उठाए सवाल

कृष्णापुरी के स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि शहर में दिन-ब-दिन लोग बिना किसी डर के अवैध रूप से हैवी कमर्शियल बोरिंग करवा रहे हैं। आखिर इन लोगों के भीतर कानून या निगम की कार्रवाई का कोई डर क्यों नहीं होता? स्थानीय लोगों ने कैमरे के पीछे साफ तौर पर आरोप लगाया कि पैसे दे-दिलाकर नगर निगम के कुछ भ्रष्ट कनिष्ठ कर्मियों को आसानी से मैनेज कर लिया जाता है, जिससे गुपचुप तरीके से 400 से 500 फीट तक धरती का सीना चीर दिया जाता है।

फिलहाल नगर निगम के मार्शल कर्मियों ने बोरिंग का काम पूरी तरह बंद करवा दिया है और गाड़ी को जब्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए फाइल बढ़ा दी है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ काम रुकवाना काफी है या ऐसे ‘दबंग और अहंकारी’ भू-माफियाओं पर जेल भेजने जैसी सख्त कार्रवाई होगी?

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