संध्या न्यूज ब्यूरो / हजारीबाग: Hazaribagh Infrastructure and Power Crisis: कहने को तो हजारीबाग झारखंड के सबसे प्रमुख, प्रतिष्ठित और संसाधन संपन्न जिलों में से एक है। एनटीपीसी (NTPC) और त्रिवेणी जैसी बड़ी कंपनियां यहां की छाती चीरकर हर दिन लाखों टन कोयला निकाल रही हैं, जिससे देश के बड़े-बड़े महानगर और उद्योग रोशन हो रहे हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि चिराग तले अंधेरा छाए रहने की कहावत आज हजारीबाग पर पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। Hazaribagh Infrastructure and Power Crisis के कारण इस भीषण और झुलसा देने वाली गर्मी में हजारीबाग की पूरी जनता बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है। नेताओं के चुनावी वादों और प्रशासनिक फाइलों में सिमटी योजनाओं के बीच हजारीबाग की जनता खुद को लावारिस महसूस कर रही है।
तपती गर्मी में इन्वर्टर ने तोड़ा दम, सूखे हलक और खाली पड़ी हैं टंकियां
इस जानलेवा उमस और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी में हजारीबाग में बिजली की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। बिजली कब आएगी और कब जाएगी, इसका कोई निश्चित समय तय नहीं है। घंटों की लगातार लोड शेडिंग के कारण लोगों के घरों में बैकअप के लिए लगे भारी-भरकम इन्वर्टर भी अब पूरी तरह दम तोड़ चुके हैं।
बिजली न रहने का सीधा असर जिले की जलापूर्ति व्यवस्था पर पड़ा है, जिससे शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पानी के लिए हाहाकार मच गया है। मोटरों के न चलने से घरों की छत पर रखी टंकियां सूखी पड़ी हैं और बूंद-बूंद पानी के लिए महिलाओं को तपती धूप में भटकना पड़ रहा है। इस नारकीय स्थिति के कारण सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि जिस जिले के कोयले से पूरी दुनिया में बिजली बनती है, उसी जिले के नसीब में सिर्फ धुआं, प्रदूषण और अंधेरा लिख दिया गया है।
सड़कें या मौत के कुएं, जानलेवा गड्ढों में हर दिन हिचकोले खाती जिंदगी
बिजली और पानी के संकट के साथ-साथ हजारीबाग की सड़कों की हालत भी इस वक्त कोढ़ में खाज का काम कर रही है। जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली प्रमुख सड़कों से लेकर मोहल्लों की गलियों तक, अब सड़कों में गड्ढे नहीं बल्कि गड्ढों के बीच सड़क को ढूंढना पड़ता है।
इन जानलेवा गड्ढों के कारण सड़कों पर चलने वाले वाहनों का कबाड़ा हो रहा है। गाड़ियों का माइलेज घटकर आधा रह गया है और आम लोगों की जेब पर मेंटेनेंस का खर्च दोगुना बढ़ गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि ये गड्ढे हर दिन हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं, जहां आए दिन राहगीर और दोपहिया वाहन चालक गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो रहे हैं। स्थानीय लोग इस बदहाली को लेकर लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं, लेकिन जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी और उपायुक्त इस पूरी बदहाली को देखकर भी अनजान बने बैठे हैं।
सियासी दलों का फ्लॉप शो, सिर्फ कुर्सी और वर्चस्व की लड़ाई में डूबे नेता
हजारीबाग की इस ऐतिहासिक दुर्दशा के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां के जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता और उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा है। चाहे झारखंड मुक्ति मोर्चा हो, कांग्रेस हो, भाजपा हो या राजद, सभी राजनीतिक दल जनसमस्याओं को भूलकर सिर्फ और सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटी सेकने में व्यस्त हैं। हर पार्टी के नेताओं के बीच इस बात की होड़ मची है कि क्षेत्र में वर्चस्व किसका रहेगा।
जमीनी हकीकत यह है कि सांसद महोदय जब रांची जाकर बड़े अधिकारियों से मुलाकात करते हैं, या विधायक जी बिजली विभाग को अल्टीमेटम और चेतावनी देते हैं, तो उसके ठीक बाद स्थिति सुधरने के बजाय और ज्यादा भयावह हो जाती है। अधिकारियों पर इन खोखली चेतावनियों का कोई असर नहीं होता, जिससे साफ पता चलता है कि यह सब सिर्फ जनता का ध्यान भटकाने के लिए किया जाने वाला एक सुनियोजित राजनीतिक ड्रामा है।
जनता का आक्रोश सातवें आसमान पर, अब आर-पार के मूड में हजारीबाग
हजारीबाग के मौजूदा हालात को लेकर जो जमीनी रिपोर्ट सामने आ रही है, वह यह साफ दिखाती है कि अब जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। भारी मात्रा में टैक्स देने और देश के राजस्व में सबसे बड़ा योगदान देने के बावजूद यहां की जनता को बुनियादी अधिकार भी नसीब नहीं हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने अब मुखर होकर प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है। यदि झारखंड सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन ने तुरंत इस त्राहिमाम की स्थिति पर संज्ञान लेकर बिजली, पानी और सड़कों को दुरुस्त नहीं किया, तो आने वाले दिनों में उग्र जन-आंदोलन को संभालना प्रशासन के लिए नामुमकिन हो जाएगा।


